महाराष्ट्र के नासिक में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. IT की बड़ी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की कई महिला कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि उनके टीम लीडर्स ने काम की जगह पर उनके साथ यौन उत्पीड़न किया और उन्हें धर्म बदलने के लिए मजबूर करने की कोशिश की. महाराष्ट्र के अलग-अलग पुलिस स्टेशनों में कई FIR दर्ज की गई हैं, जिनमें दुष्कर्म का एक मामला भी शामिल है और कम से कम छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है. BJP का आरोप है कि नासिक का यह मामला "कॉर्पोरेट जिहाद" का एक उदाहरण है.
FIRs में, कर्मचारियों पर महिलाओं के साथ छेड़छाड़ करने और उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया है. इंडिया टुडे के लिए नासिक से 9 अप्रैल को प्रवीण बी. ठाकरे ने रिपोर्ट किया कि 18 से 25 साल की उम्र की महिलाओं द्वारा बताई गई ये कथित घटनाएं, 2022 के आस-पास शुरू होकर दो से तीन साल की अवधि में हुई बताई जाती हैं.
छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जिनमें से कई टीम लीडर और इंजीनियर हैं; जबकि अन्य अभी भी जांच के दायरे में हैं.
गिरफ्तार किए गए लोगों में आसिफ अंसारी, शफी शेख, शाहरुख कुरैशी, रजा मेमन और तौसीफ अत्तार शामिल हैं. समाचार एजेंसी ANI की रिपोर्ट के अनुसार, एक अन्य कर्मचारी अश्विन चैनानी को भी गिरफ्तार किया गया है. रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस एक अन्य HR अधिकारी की भी तलाश कर रही है.
महाराष्ट्र के मंत्री और BJP नेता गिरीश महाजन ने कहा, 'कंपनी के चार-पांच मुस्लिम कर्मचारियों और कुछ अधिकारियों ने लड़कियों को नौकरी और अच्छी सैलरी का वादा करके उन्हें बहलाया.' उन्होंने दावा किया कि उन महिलाओं से 'नमाज पढ़वाई गई और रोजा रखवाया गया.'
कंपनी TCS ने एक बयान में कहा कि वह 'जीरो-टॉलरेंस पॉलिसी' का पालन करती है और जिन कर्मचारियों की जांच चल रही है, उन्हें सस्पेंड कर दिया गया है. हालांकि, यह सवाल अभी भी बना हुआ है कि HR को पहले की गई शिकायतों पर कथित तौर पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई.
पुलिस ने ACP रैंक के एक अधिकारी के नेतृत्व में 12 सदस्यों वाली एक SIT बनाई है, और उनका कहना है कि यह जांच तकनीकी और भौतिक, दोनों तरह के सबूतों पर आधारित है.
इस मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं. नासिक में BJP कार्यकर्ताओं ने सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किया, वहीं पार्टी के नेता बंदी संजय कुमार ने इसे "कॉर्पोरेट जिहाद" का मामला बताते हुए चेतावनी दी कि 'इस तरह के चेतावनी भरे संकेतों को नजरअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए.'
पूर्व सांसद और शिवसेना (UBT) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने कार्यस्थल पर सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और TCS की प्रतिक्रिया की कड़ी आलोचना की, जिसे उन्होंने 'अपर्याप्त और लापरवाही भरा' बताया.
इंडिया टुडे डिजिटल ने सोमवार, 13 अप्रैल को TCS से संपर्क किया और आरोपों के साथ-साथ कंपनी की प्रतिक्रिया पर अतिरिक्त जानकारी और स्पष्टीकरण मांगा. जैसे ही कोई नई और विस्तृत जानकारी मिलेगी, इस रिपोर्ट को अपडेट कर दिया जाएगा. फिलहाल, इस रिपोर्ट में TCS के शुरुआती बयान का ही इस्तेमाल किया गया है.
नासिक में क्या हुआ? क्या TCS में टीम लीड्स धर्मांतरण का रैकेट चला रहे थे?
नासिक की एक जानी-मानी मल्टीनेशनल कंपनी में महिला कर्मचारियों के कथित यौन शोषण, धर्मांतरण, छेड़छाड़ और मानसिक उत्पीड़न का मामला पिछले हफ़्ते सामने आया. अब इस कंपनी की पहचान TCS के तौर पर हुई है और उसने इस मामले पर एक बयान जारी किया है.
नासिक के देवलाली पुलिस स्टेशन में, दुष्कर्म, छेड़छाड़ और उत्पीड़न के आरोप में दो लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. इस बीच, नासिक जिले के मुंबई नाका पुलिस स्टेशन में आठ अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं.
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कंपनी के भीतर पांच व्यक्तियों ने धार्मिक धर्मांतरण का माहौल बनाया, जिसके कारण कार्यस्थल पर तनाव और टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई. आठ पीड़ित महिलाओं ने शिकायतें दर्ज कराई हैं, जिनमें उन्होंने आरोप लगाया है कि विभिन्न कार्यस्थलों पर उनके साथ शारीरिक उत्पीड़न किया गया. उनके शरीर और पहनावे को लेकर उन पर टिप्पणियां की गईं और उन्हें ऐसी बातों का भी सामना करना पड़ा जिनसे उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुईं.
कुछ मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन पुरुषों ने महिलाओं को निशाना बनाया और उनकी वैवाहिक समस्याओं का फायदा उठाकर उन्हें टारगेट किया.
कहा जा रहा है कि यह उत्पीड़न दो से तीन साल तक जारी रहा. पीड़ितों ने कथित तौर पर दावा किया कि उन्होंने पहले भी कंपनी के HR से संपर्क किया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई. कंपनी के पुणे ऑफिस की एक महिला HR अधिकारी के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है.
आरोपियों में से पांच लोग टीम लीडर और इंजीनियर बताए जा रहे हैं.
सिर्फ महिलाओं को ही नहीं, बल्कि कथित तौर पर एक पुरुष कर्मचारी का भी ब्रेनवॉश किया गया और उस पर धर्म परिवर्तन करने का दबाव डाला गया. उसे कुछ खास धार्मिक रस्में निभाने और मांसाहारी खाना खाने के लिए मजबूर किया गया. कथित तौर पर दुष्कर्म का आरोपी शादीशुदा है और उसने कथित तौर पर पीड़िता को एक प्रेम-संबंध में फंसा लिया था.
पुलिस ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का एक मामला, दुष्कर्म का एक मामला, छेड़छाड़ के चार मामले और छेड़छाड़ तथा धार्मिक अपराध के तीन संयुक्त मामले दर्ज किए हैं. इनमें से आठ मामले मुंबई नाका पुलिस स्टेशन में और एक मामला देवलाली पुलिस स्टेशन में दर्ज है.
ACP संदीप मितके ने 10 अप्रैल को समाचार एजेंसी ANI को बताया, 'केस नंबर 163/2016 में, संदिग्ध आरोपी का नाम अश्विन चैननी है. उसे आज कोर्ट के सामने पेश किया गया. कोर्ट ने उसे 13 अप्रैल, 2026 तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है. बाकी छह आरोपी अभी MCR (मजिस्ट्रेट हिरासत) में हैं; हम उनके ट्रांसफर वारंट मिलने के बाद उन्हें पुलिस हिरासत में लेने की योजना बना रहे हैं.'
नासिक मामले पर TCS ने क्या कहा है?
कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि 'TCS की किसी भी तरह के उत्पीड़न और जबरदस्ती के प्रति लंबे समय से 'ज़ीरो-टॉलरेंस' (बिल्कुल बर्दाश्त न करने की) नीति रही है.'
TCS ने एक बयान में कहा, 'हमने हमेशा काम की जगह पर अपने कर्मचारियों की सुरक्षा और भलाई के उच्चतम मानकों को सुनिश्चित किया है. जैसे ही हमें नासिक के मामले के बारे में पता चला, हमने तुरंत कार्रवाई की. जिन कर्मचारियों की जांच चल रही है, उन्हें जांच पूरी होने तक निलंबित कर दिया गया है. हम स्थानीय कानून प्रवर्तन अधिकारियों के साथ सहयोग कर रहे हैं, और आगे की कोई भी कार्रवाई इस जांच के नतीजों पर आधारित होगी.'
हालांकि, इस बयान ने उन बातों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिन्हें पूर्व शिवसेना (UBT) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने 'बहरापन भरा रवैया' कहा है. चतुर्वेदी ने कहा कि यह बयान 'बहुत बड़ी निराशा और हताशा' वाला था.
महाराष्ट्र के नासिक में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. IT की बड़ी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की कई महिला कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि उनके टीम लीडर्स ने काम की जगह पर उनके साथ यौन उत्पीड़न किया और उन्हें धर्म बदलने के लिए मजबूर करने की कोशिश की. महाराष्ट्र के अलग-अलग पुलिस स्टेशनों में कई FIR दर्ज की गई हैं, जिनमें दुष्कर्म का एक मामला भी शामिल है और कम से कम छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है. BJP का आरोप है कि नासिक का यह मामला “कॉर्पोरेट जिहाद” का एक उदाहरण है.
FIRs में, कर्मचारियों पर महिलाओं के साथ छेड़छाड़ करने और उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया है. इंडिया टुडे के लिए नासिक से 9 अप्रैल को प्रवीण बी. ठाकरे ने रिपोर्ट किया कि 18 से 25 साल की उम्र की महिलाओं द्वारा बताई गई ये कथित घटनाएं, 2022 के आस-पास शुरू होकर दो से तीन साल की अवधि में हुई बताई जाती हैं.
छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जिनमें से कई टीम लीडर और इंजीनियर हैं; जबकि अन्य अभी भी जांच के दायरे में हैं.
गिरफ्तार किए गए लोगों में आसिफ अंसारी, शफी शेख, शाहरुख कुरैशी, रजा मेमन और तौसीफ अत्तार शामिल हैं. समाचार एजेंसी ANI की रिपोर्ट के अनुसार, एक अन्य कर्मचारी अश्विन चैनानी को भी गिरफ्तार किया गया है. रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस एक अन्य HR अधिकारी की भी तलाश कर रही है.
महाराष्ट्र के मंत्री और BJP नेता गिरीश महाजन ने कहा, ‘कंपनी के चार-पांच मुस्लिम कर्मचारियों और कुछ अधिकारियों ने लड़कियों को नौकरी और अच्छी सैलरी का वादा करके उन्हें बहलाया.’ उन्होंने दावा किया कि उन महिलाओं से ‘नमाज पढ़वाई गई और रोजा रखवाया गया.’
कंपनी TCS ने एक बयान में कहा कि वह ‘जीरो-टॉलरेंस पॉलिसी’ का पालन करती है और जिन कर्मचारियों की जांच चल रही है, उन्हें सस्पेंड कर दिया गया है. हालांकि, यह सवाल अभी भी बना हुआ है कि HR को पहले की गई शिकायतों पर कथित तौर पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई.
पुलिस ने ACP रैंक के एक अधिकारी के नेतृत्व में 12 सदस्यों वाली एक SIT बनाई है, और उनका कहना है कि यह जांच तकनीकी और भौतिक, दोनों तरह के सबूतों पर आधारित है.
इस मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं. नासिक में BJP कार्यकर्ताओं ने सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किया, वहीं पार्टी के नेता बंदी संजय कुमार ने इसे “कॉर्पोरेट जिहाद” का मामला बताते हुए चेतावनी दी कि ‘इस तरह के चेतावनी भरे संकेतों को नजरअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए.’
पूर्व सांसद और शिवसेना (UBT) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने कार्यस्थल पर सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और TCS की प्रतिक्रिया की कड़ी आलोचना की, जिसे उन्होंने ‘अपर्याप्त और लापरवाही भरा’ बताया.
इंडिया टुडे डिजिटल ने सोमवार, 13 अप्रैल को TCS से संपर्क किया और आरोपों के साथ-साथ कंपनी की प्रतिक्रिया पर अतिरिक्त जानकारी और स्पष्टीकरण मांगा. जैसे ही कोई नई और विस्तृत जानकारी मिलेगी, इस रिपोर्ट को अपडेट कर दिया जाएगा. फिलहाल, इस रिपोर्ट में TCS के शुरुआती बयान का ही इस्तेमाल किया गया है.
नासिक में क्या हुआ? क्या TCS में टीम लीड्स धर्मांतरण का रैकेट चला रहे थे?
नासिक की एक जानी-मानी मल्टीनेशनल कंपनी में महिला कर्मचारियों के कथित यौन शोषण, धर्मांतरण, छेड़छाड़ और मानसिक उत्पीड़न का मामला पिछले हफ़्ते सामने आया. अब इस कंपनी की पहचान TCS के तौर पर हुई है और उसने इस मामले पर एक बयान जारी किया है.
नासिक के देवलाली पुलिस स्टेशन में, दुष्कर्म, छेड़छाड़ और उत्पीड़न के आरोप में दो लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. इस बीच, नासिक जिले के मुंबई नाका पुलिस स्टेशन में आठ अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं.
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कंपनी के भीतर पांच व्यक्तियों ने धार्मिक धर्मांतरण का माहौल बनाया, जिसके कारण कार्यस्थल पर तनाव और टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई. आठ पीड़ित महिलाओं ने शिकायतें दर्ज कराई हैं, जिनमें उन्होंने आरोप लगाया है कि विभिन्न कार्यस्थलों पर उनके साथ शारीरिक उत्पीड़न किया गया. उनके शरीर और पहनावे को लेकर उन पर टिप्पणियां की गईं और उन्हें ऐसी बातों का भी सामना करना पड़ा जिनसे उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुईं.
कुछ मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन पुरुषों ने महिलाओं को निशाना बनाया और उनकी वैवाहिक समस्याओं का फायदा उठाकर उन्हें टारगेट किया.
कहा जा रहा है कि यह उत्पीड़न दो से तीन साल तक जारी रहा. पीड़ितों ने कथित तौर पर दावा किया कि उन्होंने पहले भी कंपनी के HR से संपर्क किया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई. कंपनी के पुणे ऑफिस की एक महिला HR अधिकारी के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है.
आरोपियों में से पांच लोग टीम लीडर और इंजीनियर बताए जा रहे हैं.
सिर्फ महिलाओं को ही नहीं, बल्कि कथित तौर पर एक पुरुष कर्मचारी का भी ब्रेनवॉश किया गया और उस पर धर्म परिवर्तन करने का दबाव डाला गया. उसे कुछ खास धार्मिक रस्में निभाने और मांसाहारी खाना खाने के लिए मजबूर किया गया. कथित तौर पर दुष्कर्म का आरोपी शादीशुदा है और उसने कथित तौर पर पीड़िता को एक प्रेम-संबंध में फंसा लिया था.
पुलिस ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का एक मामला, दुष्कर्म का एक मामला, छेड़छाड़ के चार मामले और छेड़छाड़ तथा धार्मिक अपराध के तीन संयुक्त मामले दर्ज किए हैं. इनमें से आठ मामले मुंबई नाका पुलिस स्टेशन में और एक मामला देवलाली पुलिस स्टेशन में दर्ज है.
ACP संदीप मितके ने 10 अप्रैल को समाचार एजेंसी ANI को बताया, ‘केस नंबर 163/2016 में, संदिग्ध आरोपी का नाम अश्विन चैननी है. उसे आज कोर्ट के सामने पेश किया गया. कोर्ट ने उसे 13 अप्रैल, 2026 तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है. बाकी छह आरोपी अभी MCR (मजिस्ट्रेट हिरासत) में हैं; हम उनके ट्रांसफर वारंट मिलने के बाद उन्हें पुलिस हिरासत में लेने की योजना बना रहे हैं.’
नासिक मामले पर TCS ने क्या कहा है?
कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि ‘TCS की किसी भी तरह के उत्पीड़न और जबरदस्ती के प्रति लंबे समय से ‘ज़ीरो-टॉलरेंस’ (बिल्कुल बर्दाश्त न करने की) नीति रही है.’
TCS ने एक बयान में कहा, ‘हमने हमेशा काम की जगह पर अपने कर्मचारियों की सुरक्षा और भलाई के उच्चतम मानकों को सुनिश्चित किया है. जैसे ही हमें नासिक के मामले के बारे में पता चला, हमने तुरंत कार्रवाई की. जिन कर्मचारियों की जांच चल रही है, उन्हें जांच पूरी होने तक निलंबित कर दिया गया है. हम स्थानीय कानून प्रवर्तन अधिकारियों के साथ सहयोग कर रहे हैं, और आगे की कोई भी कार्रवाई इस जांच के नतीजों पर आधारित होगी.’
हालांकि, इस बयान ने उन बातों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिन्हें पूर्व शिवसेना (UBT) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने ‘बहरापन भरा रवैया’ कहा है. चतुर्वेदी ने कहा कि यह बयान ‘बहुत बड़ी निराशा और हताशा’ वाला था.