कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की राष्ट्रीय कार्यसमिति का गठन हो गया है, जिसमें अभिजीत दीपके समेत 12 लोगों को जगह मिली है. अभिजीत दीपके के छत्रपतिसंभाजी नगर स्थित घर 2 दिन चली बैठक में कार्यसमिति गठित करके उसके सदस्यों के नामों और उनकी जिम्मेदारियों का ऐलान किया गया. बैठक खत्म होने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर बताया गया कि पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक यानी नेशनल कन्वीनर होंगे. वहीं CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और प्रवक्ता आशुतोष रांका पार्टी संगठन के सह-संयोजक होंगे.
6 महीने में स्टेट को-ऑर्डिनेशन कमेटी बनाएंगे
कार्यसमिति का गठन होने के बाद अभिजीत दीपके ने ऐलान किया कि कॉकरोच जनता पार्टी को अभी राजनीतिक दल नहीं बनाया जाएगा, बल्कि इसके जरिए जमीनी स्तर पर काम किया जाएगा. अगले 6 महीने में पूरे भारत में स्टेट को-ऑर्डिनेशन कमेटी बनाई जाएंगी. वेबसाइट के जरिए सदस्यता अभियान शुरू करंगे. स्टूडेंट्स, युवाओं, प्रोफेशनल्स और वर्कर्स को एकजुट करके पार्टी से जोड़ा जाएगा. पार्टी वर्कर पार्टी को राजनीतिक दल बनते देखना चाहते हैं. लेकिन फिलहाल जमीनी स्तर पर ही काम करेंगे, ताकि जनमत संग्रह हो और फिर राजनीति में आएंगे.
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राष्ट्रीय कार्यसमिति में काम करेंगे ये 12 सदस्य
बता दें कि कॉकरोच जनता पार्टी में अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका के बाद अजिंक्य शिंदे (35) को राष्ट्रीय संगठन प्रभारी और दीपक बालियान (26) को संगठन का सह-प्रभारी नियुक्त किया गया. अन्य पदाधिकारी आफरीन नवाज (34) राष्ट्रीय सचिव, विजय रेड्डी मल्लांगी (30) मीडिया प्रमुख, रत्ना सिंह (31) कानूनी मामलों की प्रमुख, वैष्णवी गौड़ (29) रिसर्च एंड पॉलिसी चीफ, रोहन देशपांडे (31) टेक्नोलॉजी चीफ और योगेश इंगले (33) फाइनेंस चीफ हैं. CJP की योजना पार्टी को देश के चारों दिशाओं उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम तक पहुंचाने की है.
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नीट पेपर लीक के खिलाफ छात्र आंदोलन किया
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत के एक बयान के विरोध में अभिजीत दीपके ने कॉकरोच जनता पार्टी बनाई थी. जून में अमेरिका से लौटकर अभिजीत दीपके ने देशभर के युवाओं को अपने साथ जोड़ा और 23 जून से जंतर-मंतर दिल्ली में नीट पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन शुरू किया था. अभिजीत दीपके के आंदोलन में ही सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर बैठे थे, लेकिन 22 जुलाई को हड़ताल खत्म करा दी गई थी. अपनी मांगें मनवाने के लिए CJP ने सांसद मार्च निकाला था, जिसमें प्रदर्शनकारियों पर पुलिस लाठीचार्ज और हिंसक कार्रवाई हुई.
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विपक्ष ने CJP के छात्र आंदोलन को समर्थन दिया और छात्रों पर लाठीचार्ज का मुद्दा जोर-शोर से उठाया. दबाव में आकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया और कॉकरोच जनता पार्टी की जीत हो गई.
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