सरकार के सामने CJP ने रखी तीन मांगें, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कोई समझौता नहीं; कल फिर होगी बैठक
सरकार द्वारा CJP की दो अहम शर्तें स्वीकार किए जाने के बाद यह वार्ता संभव हो सकी. इनमें शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं करने और हालिया परीक्षा अनियमितताओं से प्रभावित छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा देने का आश्वासन शामिल है.
Written By: Akarsh Shukla|Updated: Jul 24, 2026 15:11
Edited By : Akarsh Shukla|Updated: Jul 24, 2026 15:11
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नीट पेपर लीक को लेकर जारी आंदोलन के बीच केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बीच शुक्रवार को एक बार फिर बातचीत हुई. केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका से मुलाकात की. बैठक खत्म होने के बाद सीजेपी प्रवक्ताओं ने बताया कि सरकार ने उनकी तीन मांगों में से 2 पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है, हालांकि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर समझौता नहीं हो सका है. केंद्र सरकार कल दोपहर तक अपना जवाब देगी.
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के साथ बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा, 'बैठक लगभग 2 घंटे तक चली… उनकी 3 मुख्य मांगें थीं और परीक्षाओं के लिए 5 सुधार के सुझाव थे. हमने उनसे कहा है कि हम कल दोपहर फिर मिलेंगे और सरकार के बीच हुई चर्चा के बारे में उन्हें बताएंगे.'
सीजेपी प्रवक्ता ने मीडियाकर्मियों से बात करते हुए कहा कि सरकार ने उनकी दो मांगों पर पॉजिटिव रिस्पॉन्स दिया है, लेकिन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कल की बैठक में स्पष्ट जवाब दिया जा सकता है. सीजेपी अब भी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को आंदोलन का मुख्य मुद्दा बता रही है और इस पर किसी तरह का समझौता करने के संकेत नहीं दिए हैं. इस घटनाक्रम के बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी अपना 26 दिनों से जारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल समाप्त कर दी. उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से राष्ट्रीय परीक्षा व्यवस्था में सुधार और NEET परीक्षा से जुड़े मुद्दों पर लिखित आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने यह फैसला लिया.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने कहा कि उन्हें पहले मौखिक भरोसा दिया गया था, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि जब तक सरकार लिखित आश्वासन नहीं देगी, तब तक वह अनशन समाप्त नहीं करेंगे. उन्होंने बताया कि इसी कारण आंदोलन खत्म होने में दो दिन की अतिरिक्त देरी हुई. सोनम वांगचुक ने यह भी कहा कि संसद के कई सदस्यों के समर्थन और लगातार हुई बातचीत के बाद समाधान का रास्ता निकल सका.
नीट पेपर लीक को लेकर जारी आंदोलन के बीच केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बीच शुक्रवार को एक बार फिर बातचीत हुई. केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका से मुलाकात की. बैठक खत्म होने के बाद सीजेपी प्रवक्ताओं ने बताया कि सरकार ने उनकी तीन मांगों में से 2 पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है, हालांकि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर समझौता नहीं हो सका है. केंद्र सरकार कल दोपहर तक अपना जवाब देगी.
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के साथ बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा, ‘बैठक लगभग 2 घंटे तक चली… उनकी 3 मुख्य मांगें थीं और परीक्षाओं के लिए 5 सुधार के सुझाव थे. हमने उनसे कहा है कि हम कल दोपहर फिर मिलेंगे और सरकार के बीच हुई चर्चा के बारे में उन्हें बताएंगे.’
#WATCH | Delhi: After meeting with Cockroach Janta Party (CJP), Union Minister JP Nadda says, "…The meeting went on for almost 2 hours…They had 3 main demands and 5 reform suggestions for exams. We have told them that we will meet them again tomorrow afternoon and tell them… pic.twitter.com/t8u2YkBHQ8
सीजेपी प्रवक्ता ने मीडियाकर्मियों से बात करते हुए कहा कि सरकार ने उनकी दो मांगों पर पॉजिटिव रिस्पॉन्स दिया है, लेकिन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कल की बैठक में स्पष्ट जवाब दिया जा सकता है. सीजेपी अब भी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को आंदोलन का मुख्य मुद्दा बता रही है और इस पर किसी तरह का समझौता करने के संकेत नहीं दिए हैं. इस घटनाक्रम के बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी अपना 26 दिनों से जारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल समाप्त कर दी. उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से राष्ट्रीय परीक्षा व्यवस्था में सुधार और NEET परीक्षा से जुड़े मुद्दों पर लिखित आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने यह फैसला लिया.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने कहा कि उन्हें पहले मौखिक भरोसा दिया गया था, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि जब तक सरकार लिखित आश्वासन नहीं देगी, तब तक वह अनशन समाप्त नहीं करेंगे. उन्होंने बताया कि इसी कारण आंदोलन खत्म होने में दो दिन की अतिरिक्त देरी हुई. सोनम वांगचुक ने यह भी कहा कि संसद के कई सदस्यों के समर्थन और लगातार हुई बातचीत के बाद समाधान का रास्ता निकल सका.