देश में आज से 'एक अफसर एक वाहन' नीति लागू हो गई है. केंद्र सरकार ने नोटिफिकेशन जारी करके नए नियमों का सख्ती से पालने करने के निर्देश दिए हैं. वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग की ओर से मेमोरेंडम जारी करके सभी राज्यों को नोटिस भेज दिया गया है. सरकारी आदेश के अनुसार, अब एक सरकारी अधिकारी को एक ही सरकारी गाड़ी मिलेगी. अगर अधिकारी को पहले से एक गाड़ी मिली हुई हो तो अतिरिक्त जिम्मेदारी मिलने पर उसने दूसरी गाड़ी नहीं मिलेगी.
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एक कार मिली तो दूसरी कार नहीं मिलेगी
बता दें कि केंद्र सरकार ने सरकारी वाहनों के दुरुपयोग पर रोक लगाने और सरकारी खर्च में कटौती करने के लिए नई नीति लागू की है. आज 28 जुलाई से ही देशभर की नौकरशाही के लिए 'एक अधिकारी, एक सरकारी गाड़ी' की पॉलिसी लागू हो गई है. अब कोई अधिकारी अगर किसी मंत्रालय, विभाग, सार्वजनिक उपक्रम (PSU) या ऑटोनॉमस बॉडी का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहा है तो उसे दूसरी सरकारी कार नहीं दी जाएगी, अगर उसे पहले से ही एक कार मिली हुई है.
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सरकारी वाहनों का दुरुपयोग रोकना मकसद
केंद्र सरकार ने देश के सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों को नई नीति का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं. सरकारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि सरकारी वाहन लिए तो जा रहे हैं, लेकिन उनका उपयोग नहीं हो रहा है, इसलिए उन्हें वापस लेकर सुरक्षित स्थान पर रखा जाए, किसी के भी उनका बेवजह इस्तेमाल न होने दिया जाए. इसके अलावा केंद्र सरकार के अधिकारी सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs), ऑटोनॉमस बॉडी या अर्ध-सरकारी संगठनों के वाहनों का इस्तेमाल भी नहीं करेंगे.
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केंद्र सरकार ने नोटिफिकेशन में स्पष्ट किया है कि 'एक अफसर एक कार' नीति का उद्देश्य सरकारी संसाधनों का सहीं और पूर्ण इस्तेमाल सुनिश्चित करना है. एक अधिकारी को एक से ज्यादा वाहनों के आवंटन पर रोक लगाना है. सरकारी वाहनों के रखरखाव और ईंधन पर होने वाले खर्च को बचाकर उसका इस्तेमाल बेहतर तरीके से करना है.
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