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दुनिया को भारत का बड़ा झटका! सितंबर तक चीनी के निर्यात पर लगाई रोक, जानें क्यों और क्या होंगे फायदे-नुकसान?

Sugar Export Ban: केंद्र सरकार ने शुगर कंपनियों को बड़ा झटका दिया है। क्योंकि सरकार ने सितंबर महीने तक चीनी के निर्यात पर बैन लगा दिया है। हालांकि सरकार के इस फैसले से फायदा भी होगा, लेकिन कंपनियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

भारत सरकार ने एक बहुत बड़ा फैसला लेकर उसे लागू कर दिया है। मोदी सरकार ने चीनी के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से बैन लगा दिया है। अब भारत सितंबर 2026 तक किसी देश को चीनी का निर्यात नहीं करेगा। कच्ची, सफेद और रिफाइंड तीनों प्रकार की चीनी के निर्यात (एक्सपोर्ट) पर प्रतिबंध लगाया गया हे। संकेत दिए गए हैं कि अगर जरूरत पड़ती तो इस रोक को आगे भी बढ़ाया जा सकता है। केंद्र सरकार ने अधिसूचना जारी करके आदेश का पालन करने के निर्देश दिए हैं।

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक

केंद्र सरकार ने देश में चीनी की कीमतों को कंट्रोल में रखने के लिए इसके निर्यात पर प्रतिबंध लगाया है। ब्राजील के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है। हाल ही में सरकार ने चीनी कंपनियों को 15 लाख मीट्रिक टन चीनी निर्यात करने की परमिशन दी थी, क्योंकि घरेलू मांग से ज्यादा चीनी का उत्पादन होने की उम्मीद थी, लेकिन आशंका जताई जा रही है कि गन्ना उत्पादक राज्यों में फसल कमजोर होने के कारण लगातार दूसरे साल उत्पादन कम रहेगा, जबकि खपत पूरी रहेगी।

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एल नीनो के कारण उत्पादन कम होने की आशंका

केंद्र सरकार के अनुसार, कम उत्पादन की वजह एल नीनो वेदर होगा, जिसके कारण मानसून की बारिश कम होने से फसल कमजोर रहेगी और उत्पादन कम होगा। जितना भी उत्पादन होगा, वह अपने देश की खपत को पूरा करने के लिए चाहिए तो निर्यात पर प्रतिबंध लगाना अनिवार्य हो गया था। वहीं डीलरों का कहना है कि निर्यात के लिए स्वीकृत 15 लाख मीट्रिक टन में से 8 लाख टन चीनी के निर्यात के लिए समझौते साइन हो चुके हैं। 6 लाख टन से ज्यादा चीनी का निर्यात हो भी चुका है।

निर्यात के लिए लोड हो चुका माल रोका नहीं जाएगा

केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि निर्यात के लिए जो चीनी लोड हो चुकी है, उसे रोका नहीं जाएगा। यह नियम उन मामलों में लागू होगा, जहां शिपिंग बिल दाखिल कर दिया गया हो और चीनी लेने आया समुद्री जहाज किसी भारतीय बंदरगाह पर लंगर डाल चुका हो, लेकिन चीनी निर्यात पर प्रतिबंध लगाते ही दुनिया को झटके लगने शुरू हो गए हैं। क्योंकि भारत के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी के दाम बढ़ सकते हैं। इससे दुनियाभर की कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ेगा।

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चीनी का निर्यात रोकने से यह फायदे-नुकसान होंगे

भारत के द्वारा चीनी के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के बाद न्यूयॉर्क में कच्चे चीनी का वायदा भाव 2% से ज्यादा बढ़ गया। वहीं लंदन में सफेद चीनी के वायदा भाव में 3% का उछाल आया। लेकिन भारत में चीनी की सप्लाई बनी रहेगी, जिससे त्योहारों के सीजन में चीनी महंगी नहीं होगी। वहीं चीनी व्यापारियों को कॉन्ट्रैक्ट रद्द होने से आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। भारत सरकार गन्ने का इस्तेमाल चीनी बनाने की बजाय एथेनॉल के उत्पादन में करना चाहती है। 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य तय किया है।

First published on: May 14, 2026 07:14 AM

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About the Author

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल ने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के IMC&MT इंस्टीट्यूट से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन एवं Mphil कोर्स किया है। पिछले 12 साल से डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना रही हैं। वर्तमान में BAG Convergence Limited के News 24 Hindi डिजिटल विंग से बतौर चीफ सब एडिटर जुड़ी हैं। यहां खुशबू नेशनल, इंटरनेशनल, लाइव ब्रेकिंग, पॉलिटिक्स, क्राइम, एक्सप्लेनर आदि कवर करती हैं। इससे पहले खुशबू Amar Ujala और Dainik Bhaskar मीडिया हाउस के डिजिटल विंग में काम कर चुकी हैं।

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