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तो अब CJP बनेगी ‘जन-दबाव समूह’? जानिए कैसे काम करता है ये संगठन, राजनीति में उतरे बिना भी सरकार के लिए बने रहेंगे ‘सिर दर्द’

महाराष्ट्र में हुई बैठक के बाद CJP ने साफ किया है कि संगठन का अगला फोकस सिर्फ नीट या भर्ती परीक्षाओं तक सीमित नहीं रहेगा. शिक्षा सुधार, युवाओं के रोजगार, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और E20 पेट्रोल से जुड़े मुद्दों पर भी आंदोलन की तैयारी है.

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दिल्ली के जंतर-मंतर पर सफल आंदोलन के बाद अब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के अभिजीत दीपके और उनकी पार्टी आगे क्या करेगी, युवाओं के बीच ये बड़ा सवाल है. मुंबई में दो दिन चली सीजेपी की अहम बैठक में अब भविष्य के प्लान को लेकर चर्चा की गई, जिसका खुलासा खुद अभिजीत दीपके ने किया. कोर कमेटी की बैठक में यह फैसला लिया गया कि CJP फिलहाल खुद को राजनीतिक दल के रूप में आगे नहीं बढ़ाएगी. इसके बजाय CJP एक ‘जन-दबाव समूह’ (Pressure Group) के तौर पर काम करेगी. आपके मन में भी अगर ये सवाल उठ रहा है कि आखिर जन-दबाव समूह क्या होता है, तो ये खबर आपके लिए ही है.

जन-दबाव समूह का क्या होता है काम?


सीजेपी के मुताबिक मुंबई में हुई मीटिंग में शिक्षा व्यवस्था, भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और E20 पेट्रोल जैसे विषयों पर आगे आंदोलन की रूपरेखा तैयार की गई. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दबाव समूह लोकतांत्रिक व्यवस्था का ऐसा हिस्सा होते हैं, जो सीधे चुनाव नहीं लड़ते और न ही सरकार बनाने की कोशिश करते हैं. इनका उद्देश्य सरकार की नीतियों और फैसलों को प्रभावित करना होता है. ऐसे संगठन जनसमर्थन जुटाकर, धरना-प्रदर्शन, नोटिफिकेशन, जन अभियान, कानूनी कार्रवाई और बातचीत के जरिए अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाते हैं. अभिजीत दीपके ने भी यहीं संकेत दिए हैं कि CJP भविष्य में इसी मॉडल पर काम करेगी और युवाओं, आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगी.

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दबाव समूह और हित समूह में क्या होता है अंतर?


जब संगठन या समूहों की बात आती है तो देश में दो तरह के मुख्य समूहों पर चर्चा होती है, पहली दबाव समूह और दूसरी हित समूह. इन दोनों ग्रुप्स में काफी अंतर होता है. हित समूह की बात करें तो ये मुख्य रूप से किसी विशेष वर्ग या समुदाय के हितों की रक्षा के लिए काम करते हैं. वहीं, दबाव समूह सरकारी नीतियों को प्रभावित करने के लिए सक्रिय दबाव बनाने का काम करता है, जिससे सरकार को अपनी नीतियों और फैसलों में बदलाव करना पड़ सकता है. यहां समझने की जरूरत है कि हर ‘हित समूह’ दबाव समूह नहीं होता. भारत में व्यापारिक संगठनों, कर्मचारी यूनियन, सामाजिक संगठनों और नागरिक समाज के कई संगठन दबाव समूह की श्रेणी में आते हैं.

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सरकार के लिए बने रहते हैं ‘सिर दर्द’


आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ऐसे दबाव समूह राजनीतिक में ना होकर भी सरकार के लिए सिर दर्द बने रहते हैं, क्योंकि उनका उद्देश्य सत्ता हासिल करना नहीं बल्कि नीति निर्माण की प्रक्रिया को प्रभावित करना होता है. ये संगठन लॉबिंग, जनजागरूकता अभियान, धरना-प्रदर्शन, याचिका, सार्वजनिक बहस और सरकार के साथ चर्चा जैसे लोकतांत्रिक माध्यमों का इस्तेमाल करते हैं. हालांकि कई बार इन पर अत्यधिक दबाव बनाने या आक्रामक आंदोलन का सहारा लेने के आरोप भी लगते रहे हैं. इसके बावजूद लोकतांत्रिक व्यवस्था में इन्हें जनता और सरकार के बीच संवाद की एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है.

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First published on: Aug 06, 2026 02:59 PM

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Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला (Akarsh Shukla) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्तमान में वो News 24 Digital टीम को शिफ्ट हेड के तौर पर लीड कर रहे हैं। आकर्ष शुक्ला की विशेषज्ञता प्रिंट, डिजिटल मीडिया (वेबसाइट) और मोबाइल ऐप्स के माध्यम से खबरों को सजीव और प्रभावी रूप में पेश करने में है। देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों के साथ-साथ आकर्ष को मनोरंजन, लाइफस्टाइल, ट्रेंडिंग और खेल जगत की खबरों का भी बखूबी ज्ञान है। आकर्ष शुक्ला, पत्रकारिता को सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि समाज की आवाज और जनसंवाद का एक सशक्त माध्यम मानते हैं।

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आकर्ष शुक्ला (Akarsh Shukla) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्तमान में वो News 24 Digital टीम को शिफ्ट हेड के तौर पर लीड कर रहे हैं। आकर्ष शुक्ला की विशेषज्ञता प्रिंट, डिजिटल मीडिया (वेबसाइट) और मोबाइल ऐप्स के माध्यम से खबरों को सजीव और प्रभावी रूप में पेश करने में है। देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों के साथ-साथ आकर्ष को मनोरंजन, लाइफस्टाइल, ट्रेंडिंग और खेल जगत की खबरों का भी बखूबी ज्ञान है। आकर्ष शुक्ला, पत्रकारिता को सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि समाज की आवाज और जनसंवाद का एक सशक्त माध्यम मानते हैं।

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