भारत में जनगणना 2027 चल रही है और दूसरे फेज की जनगणना का एक और शेड्यूल जारी हो गया है. एक सितंबर से 30 सितंबर तक केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फबारी वाले पहाड़ी इलाकों में दूसरे फेज की जनगणना चल रही है, जिसके तहत घर-घर जाकर लोगों की संख्या काउंट की जा रही है. अब 4 चुनावी राज्यों गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड के मैदानी इलाकों में जनसंख्या की गणना होगी. रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया के अनुसार, इन राज्यों के लोग 16 नवंबर से 30 नवंबर तक सेल्फ-एन्यूमरेशन कर सकेंगे. यह जनगणना 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 तक होगी. 5 से 9 जनवरी 2027 तक आपत्तियां दर्ज की जाएगी.
ये है दूसरे फेज की जनगणना का पहले शेड्यूल
बता दें कि दूसरे फेज में तहत केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फबारी वाले पहाड़ी इलाकों में जनगणना चल रही है. 17 से 31 अगस्त तक इन चारों राज्यों में लोगों ने ‘सेल्फ एन्यूमेरेशन’ किया. उसके बाद अब 1 सितंबर से 30 सितंबर तक घर-घर जाकर जनगणना की जा रही है. 1 अक्टूबर से 5 अक्टूबर तक रिवीजन राउंड चलेगा और 1 अक्टूबर की रात 12 बजे तक जनगणना का रेफ्रेंस फेज चलेगा. इससे पहले एक अप्रैल से 30 सितंबर तक देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में पहले फेज की जनगणना हुई. घर-घर जाकर मकानों की लिस्टिंग और हाउसिंग सर्वे किया गया. पहले चरण में 33 सवाल पूछे गए थे और दूसरे फेज में करीब 40 सवाल पूछे जा रहे हैं.
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किस राज्य में कब खत्म होगा विस का कार्यकाल?
बता दें कि उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल 22 मई 2027 को खत्म हो रहा है. इस राज्य में पिछली बार 10 फरवरी से 7 मार्च 2022 तक 7 चरणों में विधानसभा चुनाव कराए गए थे. उत्तराखंड विधानसभा का कार्यकाल 28 मार्च 2027 को खत्म होगा. पिछली बार इस राज्य में एक चरण में 14 फरवरी 2022 को चुनाव कराए गए थे. लेकिन इस बार कुंभ मेले के कारण चुनाव के कार्यक्रम में बदलाव संभव है. पंजाब विधानसभा का कार्यकाल 16 मार्च 2026 को खत्म हो जाएगा. पिछली बार इस राज्य में 20 फरवरी को एक चरण में चुनाव कराए गए थे. गोवा विधानसभा का कार्यकाल 14 मार्च 2027 को खत्म होगा. पिछली बार एक ही चरण में 14 फरवरी 2022 को चुनाव कराए गए थे. मणिपुर विधानसभा का कार्यकाल मार्च में खत्म होगा.
पहली बार डिजिटल और जातिगत जनगणना
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जनगणना 2027 देश की पहली डिजिटल जनगणना होगी। डेटा डिजिटल माध्यम से दर्ज किया जाएगा और लोगों को खुद अपनी जानकारी देने यानी सेल्फ-एन्यूमरेशन का विकल्प भी मिलेगा।
केंद्र के मुताबिक, लोगों की दी गई व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। सेंसस एक्ट की धारा 15 के तहत इसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता, RTI के तहत नहीं दिया जा सकता और किसी कोर्ट में सबूत के तौर पर भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
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