तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय और कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार के बीच जल्द ही एक अहम बैठक हो सकती है. कावेरी जल विवाद को सुलझाने के लिए विजय ने सीधी बातचीत का प्रस्ताव रखा है. अगर यह मुलाकात होती है, तो पिछले 14 सालों में पहली बार होगा जब दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री इस मुद्दे पर आमने-सामने बैठेंगे. तमिलनाडु पिछले 30 सालों से बातचीत के बजाय सुप्रीम कोर्ट और ट्रिब्यूनल के आदेशों पर ही भरोसा करता आया है. लेकिन फसलों को बचाने के लिए सीएम विजय अब कानूनी रास्ते को छेड़े बिना संवाद से रास्ता निकालना चाहते हैं.
तमिलनाडु में गहराया पानी का बड़ा संकट
तमिलनाडु के कावेरी डेल्टा में किसानों की फसलें पानी न मिलने से सूखने की कगार पर पहुंच गई हैं. तय नियमों के हिसाब से तमिलनाडु को लगभग 32 हजार मिलियन क्यूबिक फीट पानी मिलना चाहिए था, लेकिन उसे केवल 3.5 टीएमसी पानी ही मिल पाया है. राज्य सरकार का मानना है कि कमजोर मानसून के बावजूद कर्नाटक को अतिरिक्त पानी तुरंत छोड़ना चाहिए था. इसी वजह से संकट के दौर में फसलों को बचाने के लिए विजय ने 31 जुलाई से 3 अगस्त के बीच बातचीत की पहल की है, ताकि किसानों को तुरंत राहत मिल सके.
यह भी पढ़ें: PM मोदी की पोस्ट हटाने पर Meta ने मांगी माफी, अधिकारियों को किया जा सकता है तलब, जानें क्या है मामला?
विजय की पहल पर क्यों उठ रहे सवाल?
सीएम विजय की इस कोशिश पर विपक्षी दलों और किसान संगठनों ने सवाल उठाए हैं. आलोचकों का मानना है कि सीधी बातचीत से कर्नाटक को कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण को नजरअंदाज करने का मौका मिल सकता है. यह भी आशंका है कि कर्नाटक पानी के बदले मेकेदातु डैम प्रोजेक्ट से विरोध हटाने की शर्त रख सकता है. कानून के जानकारों का कहना है कि मुख्यमंत्रियों की बातचीत से माहौल तो अच्छा बन सकता है, पर यह सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की जगह नहीं ले सकता. अगर विजय पानी दिलाने में सफल रहे तो यह उनकी बड़ी जीत होगी, वरना विपक्षी इसे नाकामी बताएंगे.