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राज्यसभा में उठा पैरा मिलिट्री में प्रमोशन का मामला, 15 साल तक एक ही पद पर रहते हुए अधिकारी हो जाते हैं रिटायर

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रस्तावित केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल सामान्य प्रशासन और विनियमन विधेयक, 2026 पर चर्चा की है, जिससे सीएपीएफ में भारतीय पुलिस सेवा अधिकारियों के लिए आरक्षित पदों की संख्या निर्धारित हो सकती है, जिससे लगभग 13,000 अधिकारी प्रभावित हो सकते हैं.

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Written By: Pawan Mishra Updated: Mar 12, 2026 15:48

पैरा मिलिट्री फोर्स में प्रमोशन को लेकर लगातार मांग बढ़ते जा रही है. फोर्स के अधिकारियों का कहना है कि असिस्टेंट कमांडेट के पद पर बहाल होने के बाद 15 सालों तक उन्हें प्रमोशन नहीं मिल पाता है या फिर इसी पद पर रहते हुए रिटायरमेंट भी हो जाता है, कुछ मामलों को छोड़कर प्रमोशन कभी भी समय पर नहीं मिल पाता है. लेकन आईपीएस अधिकारियों को तय समय में प्रमोशन मिल जाता है, जिस वजह से वह डेपुटेशन के आधार पर पैरा मिलिट्री ज्वाइन कर लेते हैं.

बता दें, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रस्तावित केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल सामान्य प्रशासन और विनियमन विधेयक, 2026 पर चर्चा की है, जिससे सीएपीएफ में भारतीय पुलिस सेवा अधिकारियों के लिए आरक्षित पदों की संख्या निर्धारित हो सकती है, जिससे लगभग 13,000 अधिकारी प्रभावित हो सकते हैं.

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राम गोपाल यादव की खरी-खरी

राज्यसभा में सपा सांसद राम गोपाल यादव ने कहा कि दूसरे फोर्स की तरह पैरा मिलिट्री के जवान भी देश की सेवा में 24 घंटे लगे रहते है, चाहे बात करे औधोगिक सुरक्षा की हो, एयरपोर्ट की हो या फिर वीवीआईपी सुरक्षा की, इनकी जरूरत हर वक्त रहती है लेकिन इसके बावजूद भी इनकी अनदेखी की जाती है. इस वजह से पैरा मिलेट्री फोर्स में तनाव के साथ-साथ इनके आत्मसम्मान पर भी बड़ा असर हो रहा है.

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में 93,000 से ज्यादा पद खाली हैं. CRPF में सबसे ज्यादा 27,400, BSF में 14,531, एसएसबी में 6,784 और असम राइफल्स में 3,749 पद खाली हैं.

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सबसे ज्यादा CISF, ITBP और SSB में वीआरएस लिया जा रहा है. इन बलों में 2021 से 2025 के बीच आत्महत्या, तनाव के सबसे ज्यादा मामले देखे गए हैं.

रिटायर्ड असिस्टेंट कमांडेट सर्वेश त्रिपाठी ने बताया कि सेना की तरह उनका भी देश के प्रति शत प्रतिशत योगदान है लेकिन उसके बवाजूद दो तरह की नीति अपनाई जा रही है. इसका सीधा-सीधा असर फोर्स के मनोबल के साथ ही ड्यूटी के दौरान कई तरह के अवसाद से गुजरना पड़ता है. क्योंकि पैरा मिलिट्री सिर्फ नाम की ही फोर्स रह गई है, रिटायरमेंट के बाद पेंशन की भी सुविधा खत्म कर दी गई. हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने हमारे हक में फैसला दिया है लेकिन गृह मंत्रालय इस फैसले के खिलाफ अपील कर रहा है.

First published on: Mar 12, 2026 03:48 PM

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