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घर के काम से इनकार करे पत्नी तो क्या पति ले सकता है तलाक? बॉम्बे HC का बड़ा फैसला

Mumbai Family Court: बॉम्बे हाई कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा है कि पत्नी कोई 'नौकरानी' नहीं है और घर का काम या खाना न बनाना मानसिक क्रूरता नहीं है. कोर्ट ने फैमिली कोर्ट का तलाक का फैसला पलटते हुए सीए पति को हर महीने 20 हजार रुपये गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया.

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Mumbai Family Court: शादी और महिलाओं के अधिकारों को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. हाई कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि शादी बराबरी की साझेदारी है, कोई सर्विस कॉन्ट्रैक्ट (नौकरी का अनुबंध) नहीं है. अदालत ने टिप्पणी की कि पत्नियों को ‘नौकरानी’ नहीं समझा जा सकता. अगर कोई पत्नी घर का काम करने या खाना बनाने में असमर्थ है या मना करती है, तो इसे पति के प्रति ‘मानसिक क्रूरता’ नहीं माना जा सकता और इस आधार पर तलाक नहीं दिया जा सकता.

जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस मंजूषा देशपांडे की बेंच ने मुंबई की एक फैमिली कोर्ट के साल 2010 के फैसले को पूरी तरह पलट दिया. दरअसल, फैमिली कोर्ट ने चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) पति की याचिका पर इस आधार पर तलाक को मंजूरी दे दी थी कि उसकी पत्नी घर का काम नहीं करती, खाना नहीं बनाती और माता-पिता की बात नहीं मानती. हाई कोर्ट ने न सिर्फ इस तलाक की डिक्री को रद्द किया, बल्कि पति को आदेश दिया कि वह अपनी अलग रह रही पत्नी को हर महीने 20,000 रुपये का गुजारा भत्ता (भरण-पोषण और रहने का खर्च) दे.

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मामला साल 2002 का है, जब इस जोड़े की शादी हुई थी. शादी के कुछ ही महीनों बाद दोनों के बीच अनबन शुरू हो गई और पत्नी अपने मायके लौट गई. पति ने 2004 में क्रूरता का आरोप लगाते हुए तलाक की अर्जी दाखिल की थी. पति का कहना था कि पत्नी के इस व्यवहार से उसे मानसिक तनाव मिला. वहीं पत्नी ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उसे घर में प्रताड़ित किया जाता था और बासी खाना खाने को मजबूर किया जाता था.

हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि शादी के शुरुआती दिनों में छोटे-मोटे मनमुटाव और तालमेल की कमी होना आम बात है. इसे कानूनन ‘क्रूरता’ की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता. क्रूरता साबित करने के लिए गंभीर दुर्व्यवहार या लगातार अपमान होना जरूरी है, जिससे साथ रहना असंभव हो जाए.

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पति ने दलील दी थी कि उसकी पत्नी आर्ट एंड क्राफ्ट की क्लास चलाती है, इसलिए वह आत्मनिर्भर है. कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि किसी छोटे-मोटे हुनर या कभी-कभार की कमाई को स्थाई आमदनी नहीं माना जा सकता. चूंकि पति एक क्वालिफाइड सीए है, इसलिए उसकी वित्तीय क्षमता और आज की महंगाई को देखते हुए पत्नी को सम्मानजनक जीवन जीने के लिए 20 हजार रुपये प्रति माह गुजारा भत्ता मिलना पूरी तरह न्यायसंगत है.

First published on: May 27, 2026 07:23 AM

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About the Author

Vijay Kumar

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.

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