इबोला वायरस के खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार एक्शन मोड में है। केंद्र सरकार ने अलर्ट करते हुए एक हेल्थ एडवाइजरी जारी की है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इबोला वायरस फैलने के चलते ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दी है। इसके मद्देनजर भारत सरकार ने एहतियाती कदम उठाए हैं। देश के सभी एंट्री पॉइंट्स, एयरपोर्ट और बंदरगाहों पर विदेशों से आने वाले लोगों की स्क्रीनिंग करने के आदेश दिए गए हैं और आदेश का सख्ती से पालने के लिए निर्देश भी हैं।
130 से ज्यादा लोगों की हो चुकी मौत
इबोला वायरस वर्तमान में मध्य और पश्चिम अफ्रीका के देशों कांगो, युगांडा, सूडान, गिनी, लाइबेरिया और सिएरा लियोन में फैला है। इसकी चपेट में आने से अब तक 130 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 500 लोग संक्रमित हैं। इसलिए भारत सरकार ने एडवाइजरी जारी की है कि इन देशों से आने वाले या इन देशों से गुजरते हुए भारत पहुंचने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग की जाए। खासकर कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान से आने वाले लोग वायरस को साथ लेकर आ सकते हैं।
लक्षण दिखते ही एक्शन लेने के निर्देश
एडवाइजरी के अनुसार, अगर इन देशों से आने वाले लोगों में संक्रमण के लक्षण दिखते हैं तो इमिग्रेशन की चेकिंग से पहले एयरपोर्ट के हेल्प डेस्क पर बताएं या हेल्थ ऑफिसर को बुलाएं। लोगों की भी जिम्मेदारी है कि अगर वे किसी इबोला संक्रमित के संपर्क में किसी भी तरीके से आए तो स्वास्थ्य अधिकारियों को रिपोर्ट करें। स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपील की है कि अगर इबोला को लेकर लापरवाही बरती गई तो यह कोरोना महामारी की तरह फैलकर खतरनाक और जानलेवा साबित हो सकता है।
केंद्रीय सचिव ने बुलाई हाई लेवल मीटिंग
बता दें कि देश में अभी तक इबोला का कोई केस नहीं मिला है और यह राहत की बात है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चिंता जताई थी कि यह वायरस तेजी से फैल रहा है। लेकिन खतरे को भांपते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की हाई लेवल मीटिंग बुलाकर उसमें संक्रमण से निपटने को तैयार रहने का निर्देश दिया। साथ ही एक एडवाइजारी जारी करने का फैसला लिया। राज्य सरकारों को एक SOP भी केंद्र सरकार ने सौंपी है।
संक्रमण से ग्रस्त होने पर दिखते ये लक्षण
SOP में स्क्रीनिंग, क्वारेंटाइन प्रोटोकॉल, केस मैनेजमेंट, रेफरल सिस्टम और लैब टेस्टिंग शामिल है। बता दें कि यह वायरस ऑर्थोइबोलावायरस परिवार का जूनोटिक वायरस है, जो इंसानों के लिए बेहद घातक और जानलेवा है। बुखार, कमजोरी, थकान, सिरदर्द, गले में खराश, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द इसके लक्षण है। उल्टी और दस्त भी लग सकते हैं। शरीर के आंतरिक और बाहरी अंगों से बिना किसी वजह के खून बहना इस बीमारी का सबसे मुख्य और खतरनाक लक्षण है।
इबोला वायरस के खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार एक्शन मोड में है। केंद्र सरकार ने अलर्ट करते हुए एक हेल्थ एडवाइजरी जारी की है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इबोला वायरस फैलने के चलते ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दी है। इसके मद्देनजर भारत सरकार ने एहतियाती कदम उठाए हैं। देश के सभी एंट्री पॉइंट्स, एयरपोर्ट और बंदरगाहों पर विदेशों से आने वाले लोगों की स्क्रीनिंग करने के आदेश दिए गए हैं और आदेश का सख्ती से पालने के लिए निर्देश भी हैं।
130 से ज्यादा लोगों की हो चुकी मौत
इबोला वायरस वर्तमान में मध्य और पश्चिम अफ्रीका के देशों कांगो, युगांडा, सूडान, गिनी, लाइबेरिया और सिएरा लियोन में फैला है। इसकी चपेट में आने से अब तक 130 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 500 लोग संक्रमित हैं। इसलिए भारत सरकार ने एडवाइजरी जारी की है कि इन देशों से आने वाले या इन देशों से गुजरते हुए भारत पहुंचने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग की जाए। खासकर कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान से आने वाले लोग वायरस को साथ लेकर आ सकते हैं।
लक्षण दिखते ही एक्शन लेने के निर्देश
एडवाइजरी के अनुसार, अगर इन देशों से आने वाले लोगों में संक्रमण के लक्षण दिखते हैं तो इमिग्रेशन की चेकिंग से पहले एयरपोर्ट के हेल्प डेस्क पर बताएं या हेल्थ ऑफिसर को बुलाएं। लोगों की भी जिम्मेदारी है कि अगर वे किसी इबोला संक्रमित के संपर्क में किसी भी तरीके से आए तो स्वास्थ्य अधिकारियों को रिपोर्ट करें। स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपील की है कि अगर इबोला को लेकर लापरवाही बरती गई तो यह कोरोना महामारी की तरह फैलकर खतरनाक और जानलेवा साबित हो सकता है।
केंद्रीय सचिव ने बुलाई हाई लेवल मीटिंग
बता दें कि देश में अभी तक इबोला का कोई केस नहीं मिला है और यह राहत की बात है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चिंता जताई थी कि यह वायरस तेजी से फैल रहा है। लेकिन खतरे को भांपते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की हाई लेवल मीटिंग बुलाकर उसमें संक्रमण से निपटने को तैयार रहने का निर्देश दिया। साथ ही एक एडवाइजारी जारी करने का फैसला लिया। राज्य सरकारों को एक SOP भी केंद्र सरकार ने सौंपी है।
संक्रमण से ग्रस्त होने पर दिखते ये लक्षण
SOP में स्क्रीनिंग, क्वारेंटाइन प्रोटोकॉल, केस मैनेजमेंट, रेफरल सिस्टम और लैब टेस्टिंग शामिल है। बता दें कि यह वायरस ऑर्थोइबोलावायरस परिवार का जूनोटिक वायरस है, जो इंसानों के लिए बेहद घातक और जानलेवा है। बुखार, कमजोरी, थकान, सिरदर्द, गले में खराश, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द इसके लक्षण है। उल्टी और दस्त भी लग सकते हैं। शरीर के आंतरिक और बाहरी अंगों से बिना किसी वजह के खून बहना इस बीमारी का सबसे मुख्य और खतरनाक लक्षण है।