ममता के 'संकटमोचक' ने ही छोड़ा साथ! जिस IAS के लिए PM मोदी से भिड़ी थीं दीदी, TMC के हारते ही उन्होंने दिया इस्तीफा

नतीजों के तुरंत बाद बंगाल के प्रशासनिक और सलाहकार गलियारों में हड़कंप मच गया है. इस्तीफा देने वालों में वे लोग शामिल हैं जो पिछले एक दशक से ममता सरकार की नीतियों और रणनीति का मुख्य हिस्सा थे.

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की करारी शिकस्त के बाद ममता बनर्जी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. सत्ता से बाहर होते ही अब उनके बेहद करीबी रहे अधिकारियों, अर्थशास्त्रियों और पत्रकारों ने साथ छोड़ना शुरू कर दिया है. जहां एक तरफ ममता बनर्जी अपने रुख पर अडिग हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके सलाहकार और खास सहयोगियों ने एक-एक कर अपने पदों से इस्तीफा डालना शुरू कर दिया है.

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इस्तीफों की झड़ी

नतीजों के तुरंत बाद बंगाल के प्रशासनिक और सलाहकार गलियारों में हड़कंप मच गया है. इस्तीफा देने वालों में वे लोग शामिल हैं जो पिछले एक दशक से ममता सरकार की नीतियों और रणनीति का मुख्य हिस्सा थे. कई रिटायर्ड आईएएस अधिकारी, जो मुख्यमंत्री के साथ सलाहकार के तौर पर जुड़े थे, उन्होंने अपने पदों से त्यागपत्र दे दिया है.

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इनके अलावा बंगाल की आर्थिक नीतियों को दिशा देने वाले कई विशेषज्ञों ने भी अब टीएमसी के साथ अपनी पारी को समाप्त करने का फैसला किया है. चुनाव के दौरान ममता बनर्जी के पक्ष में नैरेटिव बनाने वाले कई वरिष्ठ पत्रकारों और मीडिया सलाहकारों ने भी पाला बदल लिया है या इस्तीफा सौंप दिया है.

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रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस लिस्ट में पूर्व मुख्य सचिव अलापन बंद्योपाध्याय, एचके द्विवेदी, मनोज पंत और अभिरूप सरकार जैसे शामिल हैं.

कौन हैं अलापन बंद्योपाध्याय?

अलापन बंद्योपाध्याय पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव थे. मई 2021 में चक्रवात ‘यास’ के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बुलाई गई समीक्षा बैठक में बंद्योपाध्याय के शामिल न होने पर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें दिल्ली वापस बुलाने (सेंट्रल डेप्यूटेशन) का आदेश जारी किया था. केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह अलापन बंद्योपाध्याय को तत्काल कार्यमुक्त करे और उन्हें दिल्ली स्थित नॉर्थ ब्लॉक में रिपोर्ट करने के लिए कहे. हालांकि, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस फैसले के सख्त खिलाफ थीं. उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इस आदेश को वापस लेने का अनुरोध किया, जिसे केंद्र ने स्वीकार नहीं किया.जब विवाद बढ़ा, तो ममता सरकार ने केंद्र को सूचित किया कि बंद्योपाध्याय रिटायर हो गए हैं, इसलिए वे दिल्ली में कार्यभार ग्रहण नहीं करेंगे. हालांकि, इसके बाद ममता ने बंद्योपाध्याय को अपना मुख्य सलाहकार नियुक्त कर दिया. 31 मई 2021 को वह रिटायर हो गए.

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ममता का सख्त रुख

हार के बावजूद ममता बनर्जी ने सार्वजनिक रूप से झुकने से इनकार कर दिया है. ममता बनर्जी ने कहा है कि वह इस्तीफा नहीं देंगी. हालांकि, जानकारों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में सलाहकारों का साथ छोड़ना यह संकेत देता है कि पार्टी के भीतर भविष्य की रणनीति को लेकर भारी अनिश्चितता है.

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सत्ता परिवर्तन का असर

पश्चिम बंगाल में नई सरकार के आने की सुगबुगाहट के बीच, नौकरशाही और बौद्धिक वर्ग में मची यह भगदड़ दिखाती है कि ममता बनर्जी के ‘पावर स्ट्रक्चर’ का आधार हिल गया है.

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लेखक के बारे में

Arif Khan

Arif Khan

आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.
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