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Safest Airlines In India: 12 जून 2025 को अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरने वाली एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171, एक बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर, टेकऑफ के कुछ ही सेकंड बाद मेघानी नगर के रिहायशी इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस हादसे में चालक दल के सदस्यों के साथ मौजूद 242 यात्रियों में से केवल एक यात्री रमेश विश्वास कुमार , जीवित बचा है। यह भारत में हाल के वर्षों का सबसे भीषण विमान हादसा है, जिसने डीजीसीए (नागर विमानन महानिदेशालय) के दिशानिर्देशों, एयर इंडिया की सुरक्षा, बोइंग 787 की तकनीकी खामियों, और रिहायशी इलाकों के पास हवाई अड्डों की स्थिति पर सवाल खड़े किए हैं।
विमानन विशेषज्ञों के अनुसार, टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान हादसों का जोखिम सबसे ज्यादा होता है। 2023 में एविएशन सेफ्टी नेटवर्क के आंकड़ों के अनुसार, विश्व भर में कुल 104 विमान हादसे हुए, जिनमें 37 टेकऑफ के दौरान थे। अहमदाबाद हादसे में, विमान ने 1:38 बजे टेकऑफ किया और मात्र 51 सेकंड बाद क्रैश हो गया, जिससे पायलटों को स्थिति संभालने का समय नहीं मिला। इस घटना से साफ होता है कि टेकऑफ के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया और तकनीकी विश्वसनीयता कितनी महत्वपूर्ण है।
हादसे ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। पायलट ने हादसे से ठीक पहले मेडे कॉल दी थी, लेकिन ATC से उनका संपर्क ही टूट गया। विशेषज्ञों का कहना है कि बेहतर कम्युनिकेशन सिस्टम और इमरजेंसी प्रोटोकॉल हादसों को कम करने में मदद कर सकते हैं। इसके लिए ATC को वास्तविक समय में डेटा विश्लेषण और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता है।
एयर इंडिया का सुरक्षा रिकॉर्ड मिश्रित रहा है। 2022 में टाटा समूह के अधिग्रहण के बाद, एयरलाइन ने बेड़े के आधुनिकीकरण और रखरखाव में सुधार की कोशिश की है। टाटा ने रखरखाव प्रक्रियाओं को मजबूत करने और प्रशिक्षण पर ध्यान दिया। AirlineRatings.com ने 2025 में एयर इंडिया को 7/7 सुरक्षा रेटिंग दी, लेकिन Simple Flying ने बताया कि 2023 में डीजीसीए ने एयर इंडिया के 13 फर्जी सुरक्षा ऑडिट पकड़े, और 2013-2022 के बीच इसके छह विमान हादसों में शामिल थे। अहमदाबाद हादसे में 11 साल पुराने बोइंग 787 की मरम्मत पर सवाल उठे हैं, जिसकी जांच चल रही है।
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एयर इंडिया का इतिहास विमान हादसों से भरा रहा है। 1978 में मुंबई के पास बोइंग 747 का हादसा (फ्लाइट AI-855, 213 मृत), 1985 में खालिस्तान आतंकी हमले में फ्लाइट 182 का विस्फोट (329 मृत), और 2020 में कोझीकोड में बोइंग 737 का हादसा (फ्लाइट AI-1344, 21 मृत) इसके उदाहरण हैं। अहमदाबाद हादसे में विशेषज्ञों का मानना है कि हाल की मरम्मत में तकनीकी चूक हो सकती है।
एक्सपर्ट्स के अनुसार, सभी एयरलाइंस को अपने विमानों के रखरखाव प्रोटोकॉल को और सख्त करना चाहिए। विमान उड़ान से पहले इंजन, लैंडिंग गियर, और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की त्रि-स्तरीय जांच अनिवार्य होनी चाहिए। इसके साथ ही, रखरखाव रिकॉर्ड को सार्वजनिक रूप से पारदर्शी करना चाहिए ताकि विश्वास बना रहे। हालांकि, इसके लिए डीजीसीए को भी नियमित ऑडिट और सख्त दिशानिर्देश लागू करने की आवश्यकता है।
मेघानी नगर में हादसे ने रिहायशी इलाकों के पास हवाई अड्डों की सुरक्षा पर बहस छेड़ दी है। अहमदाबाद हादसे में विमान एक मेडिकल हॉस्टल से टकराया, जिसमें 40 से अधिक लोग घायल हुए। डॉक्टर्स के अनुसार, हवाई अड्डों के पास रहने से शोर प्रदूषण, वायु गुणवत्ता में कमी, और श्वसन रोगों का जोखिम बढ़ता है। इसके साथ ही, रिहायशी इलाकों में प्लेन क्रैश होने जैसी घटनाएं प्लेन के यात्रियों के साथ ही वहां रहने वाले लोगों के लिए भी खतरनाक हो सकती हैं। ऐसे में खतरा दोगुना हो जाता है।
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वैसे तो बोइंग 787 ड्रीमलाइनर को आधुनिक और सुरक्षित विमान माना जाता है, लेकिन अहमदाबाद हादसे ने इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया पर कुछ विशेषज्ञों ने बताया कि बोइंग 787 के पुर्जों में क्वालिटी कंट्रोल की कमी रही है। एक वेबसाइट के अनुसार, 2000 के बाद बोइंग के 90 विमान हादसों का शिकार हुए, जिनमें 4,500 से अधिक मौतें हुईं। प्रारंभिक जांच में AI-171 के इंजन में तकनीकी खराबी की बात सामने आई है, हालांकि कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर और फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर में कोई स्पष्ट गड़बड़ी नहीं मिली है।
बोइंग की डिजाइन प्रक्रिया और उत्पादन में सख्ती की जरूरत है। विशेषज्ञों का कहना है कि बोइंग को अपने क्वालिटी कंट्रोल प्रोटोकॉल को मजबूत करना होगा और पुर्जों की जांच को और पारदर्शी करना होगा। इसके अलावा, पक्षी टकराव से निपटने के लिए इंजन डिजाइन में सुधार करना होगा।
नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) भारत में विमानन सुरक्षा को नियंत्रित करता है। www.dgca.gov.in के अनुसार, इसके प्रमुख दिशानिर्देश हैं।
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