गैंगस्टर अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने गुरुवार को उसकी याचिका को कर दिया. इस याचिक में उसने भारत की जेल में 25 साल पूरे होने की बात कहते हुए तत्काल रिहाई मांगी थी. सलेम का कहना था कि तय शर्तों के मुताबिक पुर्तगाल से उसके प्रत्यर्पण (Extradition) की 25 साल की सजा वह पूरी कर चुका है. न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने अप्रैल में मुंबई हाईकोर्ट द्वारा दिए गए फैसले को बरकरार रखा है.

विस्तृत आदेश अभी जारी नहीं हुए

अप्रैल में मुंबई हाईकोर्ट ने सलेम की याचिका को ‘समय से पहले’ बताया था. फिर अबू सलेम ने हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने भी इस याचिका को खारिज कर दिया. हालांकि, कोर्ट के फैसले का अभी विस्तृत आदेश जारी नहीं हुआ है. विस्तृत आदेश आने के बाद ही पता चल सकेगा कि कोर्ट ने किन-किन आधारों पर याचिका खारिज की है.

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1993 में मुंबई सीरीअल ब्लास्ट का आरोपी अबू सलेम

मुंबई में हुए 1993 के सीरीअल बम धमाकों ने पूरे देश को हिला दिया था और अबू सलेम इन धमाकों का दोषी है. सलेम को पुर्तगाल से भारत लाने के लिए बहुत लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया चली. आखिरकार उसे 11 नवंबर 2005 को भारत लाया गया. सलेम ने जो याचिका दाखिल की है और उसके आधार पर कोर्ट से रिहाई की मांग की है, इसका मुख्य कारण पुर्तगाल और भारत के बीच हुआ प्रत्यर्पण समझौता है.

मृत्यु दंड एवं 25 साल से ज्यादा सजा नहीं

प्रत्यर्पण समझौते की शर्तोंके तहत, सलेम को भारत में मृत्युदंड नहीं दिया जा सकता. इसके अलावा उसकी जेल की सजा 25 साल से ज्यादा नहीं हो सकती. सलेम ने इन्हीं शर्तों का हवाला देते हुए दावा किया कि भारत में 25 साल का समय पूरा होने के बाद उसे जेल से रिहा किया जाना चाहिए. हालांकि, उसे किसी भी कोर्ट तत्काल रिहाई नहीं मिली है. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अबू सलेम की रिहाई फिलहाल रुकी हुई है. विस्तृत आदेश आने के बाद आगे की स्थिति साफ होगी.

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