आज के वक्त में कई कपल्स को पेरेंट्स बनने में परेशानी होती है. इसके लिए कपल्स नई-नई तकनीकों का इस्तेमाल करने लगे हैं. इसमें से आईवीएफ यानी टेस्ट ट्यूब बेबी तकनीक भी शामिल है. यह एक तरह की उम्मीद है, जिसे बेहतर ऑप्शन की तरह देखा जा रहा है. पिछले कुछ सालों में इस तरह के इलाज के तरीके में कई बदलाव हुए हैं, लेकिन क्या इन बदलावों से हर कपल्स के लिए बच्चा पैदा करना आसान हो गया है? इस बारे में ICMR यानी भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद की जानकारी और डॉक्टरों की सलाह को समझना जरूरी है. फर्टिलिटी की एक्सपर्ट डॉक्टर सुश्री स्मरणिका का कहना है कि IVF में नई तकनीकों के आने से इलाज के ऑप्शन जरूर बढ़े हैं, लेकिन हर कपल्स के लिए एक जैसा इलाज सही नहीं हो सकता. इलाज शुरू करने से पहले दोनों की मेडिकल कंडीशन को समझना भी जरूरी है.

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क्या है IVF?

IVF एक ऐसा इलाज है, जिसकी मदद से जिन कपल्स को बच्चा होने में परेशानी होती है, उन्हें प्रेग्नेंट करने में मदद मिलती है. इसमें महिला के अंडे और पुरुष के शुक्राणु को लैब में मिलाया जाता है. कुछ समय बाद इस सेल्स को महिला के गर्भ में रखा जाता है, ताकि प्रेगनेंसी हो सके. IVF में बच्चे के बनने की शुरुआत लैब में की जाती है और फिर भ्रूण के गर्भ में रखा जाता है.

कपल्स को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

IVF कराने का फैसला लेने से पहले कपल्स को डॉक्टर से खुलकर बार करनी चाहिए. आप उनसे नीचे बताए गए सवालों को पूछ सकते हैं.

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  • क्या हम दोनों की जांच हो चुकी है?
  • क्या हमें सीधे IVF की जरूरत है या कोई दूसरा ऑप्शन भी है?
  • IVF/ICSI की सलाह क्यों दी जा रही है?
  • हमारी उम्र और मेडिकल हिस्ट्री का इलाज पर क्या असर पड़ेगा?
  • इलाज में इस्तेमाल होने वाली किसी नई तकनीक का हमारे मामले में क्या फायदा है?

कपल्स के लिए अलग हो सकता है इलाज

IVF में अब सभी महिलाओं के लिए एक ही तरह का इलाज नहीं किया जाता. महिला की उम्र, अंडाणुओं की संख्या, पहले की प्रेगनेंसी और पहले कराए गए इलाज जैसी कई बातों को ध्यान में रखा जाता है. इसी तरह पुरुष के शुक्राणुओं की संख्या और क्वालिटी भी देखी जाती है. ICMR के मुताबिक, बांझपन की वजह जानने के बाद ही इलाज का तरीका तय किया जाना चाहिए.

पति पर भी करता है डिपेंड

जब कोई महिला मां नहीं बन पाती तो इसका सारा ध्यान सिर्फ उन्हीं पर जाता है, लेकिन ऐसा करना सही नहीं है. कई मामलों में परेशानी पुरुष से जुड़ी भी हो सकती है. ICMR की जानकारी में भी पति और पत्नी दोनों का टेस्ट कराने पर जोर दिया गया है. इसलिए IVF शुरू करने से पहले दोनों का टेस्ट कराने से समस्या की सही वजह समझने में मदद मिल सकती है.

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IVF में सेल्स की देखभाल हुई बेहतर

IVF में अंडाणु और शुक्राणु को मिलाने के बाद बनने वाले सेल्स का खास ध्यान रखना जरूरी है. पिछले कुछ सालों में इसके कई तरीके बदले हैं और कंप्यूटर की मदद से सेल्स को समझने वाली तकनीक का इस्तेमाल भी किया जा रहा है. हालांकि, डॉ. सुश्री स्मरणिका का कहना है कि इन तकनीकों को सिर्फ मदद करने वाली चीजों के आधार पर देखा जाना चाहिए.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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Source- Crysta Ivf, ICMR