Rajesh Bharti
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Dengue Virus : डेंगू में मरीज को बुखार आता है और उसकी प्लेटलेट्स कम होने लगती हैं। अगर इलाज और देखभाल सही न हो तो मरीज को अस्पताल में भी भर्ती कराना पड़ जाता है। हालांकि स्थिति इस बात पर निर्भर करती है कि मरीज में डेंगू के वायरस का टाइप कौन सा है। डेंगू का वायरस मूल रूप से चार तरह का होता है। डेन1, डेन2, डेन3 और डेन4 सेरोटाइप।

मच्छरों से बचकर रहें
डेंगू होने के बाद मरीज की प्लेटलेट्स कम होने लगती हैं। इससे मरीज के परिजन घबरा जाते हैं। ऐसा न करें। अगर किसी का सामान्य रूप से प्लेट्सलेट्स काउंट 2 लाख हो और डेंगू की वजह से यह कम होकर पहले 1 लाख और उसके बाद 50 हजार से नीचे आ जाए, पर कोई गंभीर परेशानी न हो, मसलन: नाक, यूरिन, स्टूल आदि से खून न आता हो तो घबराने की स्थिति नहीं है। जो प्लेटलेट्स की संख्या कम हुई है, वह खुद ब खुद बढ़कर सामान्य हो जाएगी।
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1. सामान्य डेंगू : जिस दिन मरीज को बुखार आता है उसके 4 दिन तक प्लेटलेट्स सामान्य ही रहते हैं। बुखार में कोई आराम नहीं मिलता। बुखार के अलावा कोई दूसरे लक्षण नहीं दिखते। 5वें दिन से प्लेटलेट्स की संख्या कम होनी शुरू हो जाती है।
2. डेंगू हेमरैजिक: प्लेटलेट्स अचानक कम होने की वजह से मुंह, नाक आदि से खून निकलने लगता है। कई लोगों को इससे पहले भी ऐसा हो सकता है। ठंड के साथ तेज बुखार आता है और बीपी भी कम हो जाता है। प्लेटलेट्स चढ़ाने की स्थिति बन जाती है।
3. डेंगू शॉक सिंड्रोम: यह बहुत ज्यादा खतरनाक स्टेज है। बीपी कम होकर 70/40 तक या इससे भी कम हो सकता है। ऐसी स्थिति में लिवर, किडनी, हार्ट आदि के फेल होने की आशंका बढ़ जाती है।
Disclaimer: इस लेख में बताई गई जानकारी और सुझाव को पाठक अमल करने से पहले डॉक्टर या संबंधित एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। News24 की ओर से किसी जानकारी और सूचना को लेकर कोई दावा नहीं किया जा रहा है।
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