रील्स और शॉर्ट वीडियो स्क्रॉल करते रहने से दिमाग में क्या होता है? साइंस जर्नल में छपी चीन की नई स्टडी ने दिया जवाब

Reel Scrolling Effects: चीन की झेजियांग यूनिवर्सिटी के यूजेंग हू के नेतृत्व में NeuroImage साइंस जर्नल में स्टडी छपी है जिसमें इस बात का जिक्र किया गया है कि लगातार रील्स स्क्रॉल करते रहने पर दिमाग के अंदर क्या होता है.

Reel scrolling Effects

दिमाग पर कैसे असर डालता है रील्स स्क्रॉल करते रहना. AI Generated Image

Scrolling Short Video: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जो लंबे वीडियोज देखने के लिए बनाए गए थे या जिन्हें फोटो अपलोड करने के लिए तैयार किया गया था, उनके एल्गोरिथम और डिजाइन को पूरी तरह बदल दिया गया है. ये प्लेटफॉर्म्स अब शॉर्ट वीडियो (Short Video) और रील्स वाले हो गए हैं. यूजर्स इन ऐप्स को खोलते ही रील्स सेक्शन में जाते हैं और घंटों तक रील्स स्क्रॉल (Reels Scroll) करते रहते हैं. लेकिन, क्या आप जानते हैं इस तरह से घंटों तक रील्स स्क्रॉल करते रहने से क्या होता है? नई चाइनीज स्टडी के पास इसका जवाब है. स्टडी में टिकटॉक और इंस्टाग्राम पर घंटों तक शॉर्ट वीडियोज स्क्रॉल करते रहने से दिमाग के कॉग्निटिव कंट्रोल और सेल्फ रेग्यूलेशन एक्टिविटी कम होने समेत कई दिक्कतों का जिक्र किया गया है. यहां जानिए क्या कहती है यह स्टडी.

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रील्स स्क्रॉल करते रहने पर दिमाग में क्या होता है

चीन की झेजियांग यूनिवर्सिटी के यूजेंग हू के नेतृत्व में NeuroImage साइंस जर्नल में स्टडी छपी है. इस स्टडी में 56 युवाओं के दिमाग को फंक्शनल मैग्नेटिक रेजोनेन्स (MRI) से स्कैन किया गया. स्कैनिंग के दौरान प्रतिभागियों को शॉर्ट वीडियोज देखने के लिए कहा गया था. रिसर्चर्स ने दिमाग के अगले हिस्से, डॉर्सल एंटीरियर सिंगुलेट कॉर्टेक्स (dACC) में ग्लूटामेट और γ-अमीनोब्यूटिरिक एसिड (GABA) के रेस्टिंग लेवल को मापने के लिए प्रोटॉन मैग्नेटिक रेजोनेंस स्पेक्ट्रोस्कोपी (H-MRS) का इस्तेमाल किया.

जब प्रतिभागियों ने अपने पसंद की वीडियो देख ली तो दोनों dACC Qj डोर्सोलेटरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स (dIPFC) में एक्टिविटी गिरती हुई नॉटिस की गई. जिन वीडियो को तुरंत स्किप कर दिया गया उनसे और भी कम इफेक्ट देखने को मिला.

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फ्लो में आ जाता है दिमाग

स्टडी में इस बात का जिक्र किया गया कि शॉर्ट वीडियोज देखने पर कॉग्निटिव कंट्रोल फेलियर नहीं होता है लेकिन इससे यह समझ आता है कि अगर व्यक्ति अगर बिना किसी सक्रिय प्रयास के कुछ लगातार देखता जाता है तो दिमाग ऑटोमैटिक हो जाता है और पूरी तरह मग्न हो जाता है. यह एक फ्लो जैसी अवस्था है. जब कोई बहुत ही एंगेजिंग वीडियो देखा जा रहा हो तो दिमाग का मोनिटरिंग सिस्टम ढीला पड़ने लगता है जिससे दिमाग के लिए वीडियो देखना आसान हो जाता है. ऐसे में ग्लूटामेट के स्तर में व्यक्तिगत अंतर से यह समझने में मदद मिलती है कि कुछ लोगों के लिए खुद को स्क्रॉल करने से रोकना मुश्किल होता है.

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स्टडी से क्या नतीजा निकलता है

स्टडी के नतीजे इस बात को और मजबूत करते हैं कि बहुत ज्यादा आकर्षक डिजिटल मीडिया, रिवॉर्ड ड्रिवन और कंट्रोल रिलेटेड ब्रेन सिस्टम के बीच के संतुलन को बदल सकता है. ये नतीजे ज्यादा वीडियो देखने की लत लगने के संभावित न्यूरोकेमिकल कारक को उजागर करते हैं.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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Source - ScienceDirect 

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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