आजकल वॉशिंग मशीन ने कपड़े कपड़े धोने का काम काफी आसान कर दिया है. कपड़े डालिए, डिटर्जेंट डालिए और बटन दबाते ही मशीन अपना काम शुरू कर देती है. लेकिन इसी दौरान कई लोग एक ऐसी गलती करते हैं,जो धीरे-धीरे कपड़ों और मशीन दोनों को नुकसान पहुंचा सकती है. दरअसल, जरूरत से ज्यादा डिटर्जेंट डालने से कपड़े ज्यादा साफ नहीं होते. उल्टा इससे मशीन की सफाई और काम करने की क्षमता पर असर पड़ सकता है.
ज्यादा डिटर्जेंट डालने से क्या होता है?
वाशिंग मशीन में जरूरत से ज्यादा डिटर्जेंट डालने पर बहुत ज्यादा झाग बनता है. ये झाग कपड़ो के रेशों में फंस सकता है और वो पूरी तरह साफ नहीं हो पाता. इसके कारण कपड़े धोने के बाद कड़क महसूस हो सकते हैं. कई बार कपड़ों पर सफेद निशान और अजीब गंध भी आने लगती है.
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मशीन के अंदर भी जमा हो सकता है डिटर्जेंट
एक्स्ट्रा डिटर्जेंट सिर्फ कोही प्रभावित नहीं करता. इसका कुछ हिस्सा मशीन के ड्रम, पाइप, फिल्टर और दूसरे हिस्सों में जमा हो सकता है. इससे पानी की निकासी यानी ड्रेनेज प्रभावित हो सकती है और मशीन को सामान्य तरीके से काम करने में परेशानी हो सकती है.
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लंबे समय में मशीन को हो सकता है नुकसान
अगर लगातार ज्यादा डिटर्जेंट का इस्तेमाल किया जाए तो मशीन के अंदर अवशेष जमा होने लगते हैं. इससे ड्रेनेड सिस्टम जाम होने और धुलाई की क्षमता कम होने जैसी दिक्कतें आ सकती हैं. ज्यादा नमी और अवशेष के कारण रबर गैसकेट के आसपास फफूंद, काई और बैक्टीरिया भी पनप सकते हैं, जिससे मशीन से बदबू आने लगती है.
कितना डिटर्जेंट डालना सही है?
डिजर्टेंज की मात्रा मशीन के प्रकार,कपड़ों की संख्या, पानी और कपड़ों की गंदगी पर निर्भर करती है. फ्रंट-लोड वॉशिंग मशीन कम पानी इस्तेमाल करती हैं, इसलिए इनमें आमतौर पर कम डिटर्जेंट की जरूरत होती है. टॉप-लोड मशीन में मात्रा अलग हो सकती है. बहुत गंदे कपड़ों को पहले कुछ देर सादे पानी में भिगोने से भी कम डिटर्जेंट में अच्छी सफाई मिल सकती है.
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