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मोबाइल फोन का दिमाग पर कब्जा, टेक्नोलॉजी की लत या सुविधा की आदत?

मोबाइल फोन अब सिर्फ एक उपकरण नहीं, बल्कि हमारी आदतों और सोचने के तरीके को भी बदल रहा है। लगातार फोन चेक करने से ध्यान भटकता है और याददाश्त पर असर पड़ता है। रिसर्च कहती है कि फोन का सिर्फ पास में होना भी मानसिक क्षमता को कम कर देता है। लेकिन अगर हम खुद पर नियंत्रण रखें, तो हमारा दिमाग और भी मजबूत बन सकता है।

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Edited By : News24 हिंदी Updated: Apr 5, 2025 19:59
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आज मोबाइल फोन हमारी जिंदगी का ऐसा हिस्सा बन चुका है जिससे कुछ देर के लिए भी दूर रहना मुश्किल लगता है। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक हम किसी न किसी काम के लिए फोन का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस डिजिटल साथी ने सिर्फ हमारी आदतें ही नहीं, बल्कि हमारे दिमाग की काम करने की क्षमता को भी बदल दिया है? नई रिसर्च बता रही हैं कि मोबाइल की मौजूदगी ही हमारी कंसंट्रेशन, मेमोरी और सोचने की शक्ति पर असर डाल सकती है।

पहले सहूलियत, अब आदत

50 साल पहले जब पहली बार मोबाइल से कॉल की गई थी तब किसी ने नहीं सोचा था कि एक दिन यह हमारी जिंदगी का हिस्सा बन जाएगा। आज फोन सिर्फ बात करने का जरिया नहीं, बल्कि कैमरा, अलार्म, बैंक, डायरी, लाइट और इंटरनेट सब कुछ बन चुका है। हर छोटा-बड़ा काम हम फोन से करते हैं फिर चाहे वह मौसम देखना हो या किसी दोस्त से मिलना तय करना हो। धीरे-धीरे यह सहूलियत इतनी आदत बन गई कि हम दिन में सैकड़ों बार फोन उठाते हैं, चाहे काम हो या न हो।

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दिमाग पर पड़ने लगा असर

रिसर्च बताती हैं कि एक आम व्यक्ति दिन में औसतन 344 बार अपना फोन चेक करता है और लगभग 3 घंटे फोन पर बिताता है। बार-बार फोन चेक करना सिर्फ वक्त की बर्बादी नहीं, बल्कि हमारी कंसंट्रेशन और मेमोरी को भी नुकसान पहुंचा रहा है। एक रिसर्च के मुताबिक, सिर्फ फोन का ‘डिंग’ सुनना भी हमारे ध्यान को भटका देता है और हम जिस काम में लगे होते हैं उसमें गलतियां बढ़ जाती हैं। इसका मतलब है कि फोन हमारे दिमाग पर उस वक्त भी असर डालता है, जब हम उसे चला नहीं रहे होते।

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फोन की मौजूदगी भी खतरनाक

चौंकाने वाली बात यह है कि फोन का सिर्फ आसपास होना भी हमारे सोचने और समझने की क्षमता को कम कर सकता है। एक स्टडी में जब लोगों को तीन समूहों में बांटा गया जिसमें एक में फोन सामने रखा गया, दूसरे में जेब में और तीसरे में दूसरे कमरे में तो पाया गया कि जिनके फोन दूर थे, उन्होंने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। इसका मतलब है कि हमारा दिमाग बार-बार यह सोचता रहता है कि कहीं कोई नोटिफिकेशन न आया हो और इससे हमारी फोकस करने की ताकत घट जाती है।

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दिमाग को दोबारा ट्रेन करने की जरूरत

हालांकि इस स्थिति का हल भी हमारे ही हाथ में है। एक्सपर्ट कहते हैं कि अगर हम मान लें कि हमारा दिमाग सीमित नहीं है तो हम खुद को ज्यादा बेहतर तरीके से कंट्रोल कर सकते हैं। हर बार जब हम बिना वजह फोन उठाने से खुद को रोकते हैं तो हम नई सोच और आदतें विकसित कर रहे होते हैं। इसलिए जरूरी है कि हम फोन को कभी-कभी खुद से दूर रखें जैसे किसी और कमरे में या बैग में ताकि हमारा दिमाग बिना रुकावट के सोच सके और हम अपनी असली क्षमता को पहचान सकें।

First published on: Apr 05, 2025 07:59 PM

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