ईरान और अमेरिका के बीच छिड़ी जंग का सबसे ज्यादा खामियाजा एशियाई देशों ने भुगता है. तेल और गैस की तंगी की वजह से कई देशों को आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ा. दरअसल, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल और गैस का बड़ी मात्रा में आयात-निर्यात होता है, लेकिन ईरानी हमलों और अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी की वजह से इसपर बेहद बुरा असर पड़ा है. इन वजहों से तेल और गैस की सप्लाई कम हुई और कीमतें आसमान छूने लगी और इसका सबसे ज्यादा बोझ आम आदमी की जेब पर पड़ा.

कैसे किया संकट का सामना?

तेल और गैस की कीमतें बढ़ने पर एशियाई देशों ने तुरंत फ्यूल बचाने के जुगाड़ लगाने शुरू कर दिए. कई तरह के उपाय लागू किए गए , जैसे कि प्राइवेट व्हीकल्स का इस्तेमाल ना करके पब्लिक ट्रांसपोर्ट से ट्रैवल करना और ज्यादा से ज्याद वर्क फ्रॉम होम करना. जैसे-जैसे तेल और गैस की तंगी बढ़ती गई, एशियाई देशों ने इनका स्टॉक अपने इलाके के करीब रखना शुरू कर दिया. ऑक्सफोर्ड इंस्टीट्यूट फॉर एनर्जी स्टडीज की विजिटिंग रिसर्च फेलो पारुल बख्शी ने कहा, ''इस संकट की वजह से दो तरह के निवेश हो रहे हैं- एक ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर जो जियोपॉलिटिकल जोखिम से बचाता है, और दूसरा ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर जो आयातित ईंधन पर निर्भरता को पूरी तरह खत्म कर देता है.''

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जापान सबसे आगे निकला

ऊर्जा संकट से निकले जापान ने दुनिया के सामने सबसे बड़ा उदाहरण सेट किया है. हालांकि जापान भी एनर्जी की आपूर्ति के लिए काफी हद तक मिडिल ईस्ट पर ही डिपेंड है, फिर भी उसने इस संकट का बेहतर ढंग से सामना किया है. दरअसल, जापान के पास दुनिया के सबसे बड़े रणनीतिक तेल भंडार में से एक है. टोक्यो चाहता है कि उसके पड़ोसी देश भी उससे प्रेरणा लें. अप्रैल 2026 में, जापान की सनाए तकाइची ने 10 अरब डॉलर की पावर एशिया मुहिम का ऐलान किया. इस योजना का मकसद दक्षिण-पूर्व एशिया की अर्थव्यवस्थाओं को तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स खरीदने में मदद करना और लंबे वक्त तक तेल और गैस का स्टोरेज करना है. सरकारी मीडिया के मुताबिक, फरवरी के आखिर में ईरान युद्ध शुरू होने के वक्त वियतनाम के भंडार में 5-7 महीनों की जरूरत पूरा करने जितना तेल मौजूद था. हालांकि कमर्शियल स्टॉक और दूसरे सोर्स से 65 दिन और कम चल सकता था. वहीं, मार्च की शुरुआत में थाईलैंड के पास पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर में लगभग 61 दिनों का रिजर्व था, जबकि नियम के मुताबिक उनके पास 25 दिनों का रिजर्व होना अनिवार्य था.

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क्या है प्लानिंग?

सभी आंकड़े इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के 90 दिनों के न्यूनतम बेंचमार्क से कम थे. बैंकॉक और मनीला में युद्ध की वजह से सरकार के कंट्रोल वाले व्यापक रणनीतिक तेल भंडार बनाने की कोशिशों को फिर से हवा मिली है. जानकारी के मुताबिक, फिलीपींस की एक पार्लियामेंट्री कमेटी ने सरकार के कंट्रोल में 90 दिनों का भंडार बनाने वाले एक बिल को मंजूरी दी. बैंकॉक की पब्लिक अफेयर्स कंसल्टेंसी 'मैवरिक कंसल्टिंग ग्रुप' के बेन कियातक्वानकुल ने कहा कि थाई अधिकारी नए ''क्रॉस-पेनिनसुला क्रूड पाइपलाइन और टैंक फार्म'' बनाने की योजना पर आगे बढ़ रहे हैं, ताकि गल्फ क्रूड स्टोरेज के मामले में थाईलैंड को सिंगापुर के मुकाबले खड़ा किया जा सके.

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