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आर्टिकल 19 और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के क्या नियम, क्या सच में मिला है शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार?

Article 19 Right To Protest: भारतीय संविधान का आर्टिकल 19 नागरिकों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन और अभिव्यक्ति की आजादी का मौलिक अधिकार देता है. जंतर-मंतर पर धरना देने के लिए दिल्ली पुलिस ने तय किए हैं समय, टेंट और आवेदन से जुड़े कई कड़े नियम. सीजेपी (CJP) की रिपोर्ट और अदालती फैसलों के बीच उठ रहे हैं सवाल कि क्या पाबंदियों से सिमट रहा है जनता का यह हक

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Article 19 Right To Protest: लोकतंत्र में जब आम जनता या किसी संगठन को सरकार की नीतियों से शिकायत होती है तो विरोध प्रदर्शन ही अपनी बात रखने का सबसे बड़ा जरिया बनता है. हमारा संविधान भी नागरिकों को यह ताकत देता है. लेकिन आज के दौर में यह सवाल लगातार बड़ा होता जा रहा है कि भारतीय नागरिक शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अपने इस अधिकार का इस्तेमाल करने के लिए असल में कितने स्वतंत्र हैं? सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) की रिपोर्ट और देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के कड़े नियम इसी गंभीर बहस को सामने लाते हैं.

संविधान का आर्टिकल 19 और जमीनी हकीकत

भारतीय संविधान का आर्टिकल 19(1)(a) और 19(1)(b) हर नागरिक को अभिव्यक्ति की आजादी और बिना किसी हथियार के, शांतिपूर्ण ढंग से इकट्ठा होने का मौलिक अधिकार (Fundamental Right) देता है. लोकतंत्र की बुनियाद ही इस हक पर टिकी है. लेकिन हाल के दिनों में सीजेपी (CJP) की रिपोर्ट बताती है कि अदालतों के बदलते रुख, धारा 144 (अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163) के लगातार इस्तेमाल और कड़े प्रशासनिक कदमों के कारण यह अधिकार जमीन पर कम और कागजों पर ज्यादा सिमटता जा रहा है.

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जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए क्या हैं नियम?

देश में प्रदर्शनों का सबसे प्रमुख केंद्र रहे दिल्ली के जंतर-मंतर को ही देख लीजिए. यहाँ अब अपनी आवाज उठाने के लिए दिल्ली पुलिस के इन बेहद कड़े नियमों और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ता है:

  • पहले से अनुमति: प्रदर्शन या धरने के लिए आयोजकों को करीब 7 से 10 दिन पहले ही पुलिस के पास आवेदन करना होता है. इसका फॉर्म दिल्ली पुलिस की वेबसाइट या लोकल थाने से मिलता है.
  • तय समय सीमा: यहाँ चौबीसों घंटे धरना नहीं दिया जा सकता. प्रदर्शन का समय सुबह 10:00 बजे से केवल शाम 05:00 बजे के बीच ही तय किया गया है.
  • मंच और टेंट पर पाबंदी: प्रदर्शन वाली जगह पर कोई भी अस्थायी टेंट लगाने या मंच बनाने के लिए पुलिस से अलग से स्पष्ट मंजूरी लेनी होती है.
  • वालंटियर्स की लिस्ट: कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आयोजकों को अपने सभी वालंटियर्स (स्वयंसेवकों) की पूरी लिस्ट पुलिस को सौंपनी पड़ती है.

अधिकार और पाबंदियों के बीच का संतुलन

सुप्रीम कोर्ट ने शाहीन बाग मामले में माना था कि भारत की नींव ही विरोध प्रदर्शनों पर टिकी है और सरकार को इसका सम्मान करना चाहिए. हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ किया था कि ये अधिकार असीमित नहीं हैं और कानून-व्यवस्था के लिए इन पर तार्किक पाबंदियां लगाई जा सकती हैं. सीजेपी (CJP) जैसी संस्थाएं इसी बात पर चिंता जताती हैं कि इन कड़े नियमों, प्रदर्शन स्थलों के छोटे होते दायरे और प्रशासनिक पाबंदियों के कारण कहीं आम जनता के विरोध करने की बुनियादी आजादी ही खत्म न हो जाए.

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First published on: Jun 06, 2026 10:40 AM

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About the Author

Vijay Jain

सीनियर न्यूज एडिटर विजय जैन को पत्रकारिता में 23 साल से अधिक का अनुभव है.  न्यूज 24 से पहले विजय दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे प्रतिष्ठित अखबारों में अलग-अलग जगहों पर रिपोर्टिंग और टीम लीड कर चुके हैं, हर बीट की गहरी समझ है। खासकर शहर राज्यों की खबरें, देश विदेश, यूटिलिटी और राजनीति के साथ करेंट अफेयर्स और मनोरंजन बीट पर मजबूत पकड़ है. नोएडा के अलावा दिल्ली, गाजियाबाद, गोरखपुर, जयपुर, चंडीगढ़, पंचकूला, पटियाला और जालंधर में काम कर चुके हैं इसलिए वहां के कल्चर, खानपान, व्यवहार, जरूरत आदि की समझ रखते हैं. प्रिंट के कार्यकाल के दौरान इन्हें कई मीडिया अवार्ड और डिजिटल मीडिया में दो नेशनल अवार्ड भी मिले हैं. शिकायत और सुझाव के लिए स्वागत है- Vijay.kumar@bagconvergence.in

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