परिसीमन बिल पर सुप्रिया सुले के संकेत ने संसद के नंबर गेम को और दिलचस्प बना दिया है. सुप्रिया सुले ने संकेत दिए हैं कि हर राज्य में 50 फीसदी सीट बढ़ाने की सीमा पर चर्चा की शर्त के साथ शरद पवार वाली एनसीपी समर्थन पर विचार कर सकती है. सरकार की नजर झारखंड मुक्ति मोर्चा, आम आदमी पार्टी और नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसदों पर भी है. परिसीमन बिल पास कराने में पूरा खेल 36 वोट का है, जिसकी सबसे बड़ी चाबी डीएमके के हाथ में है.
सुप्रिया सुले ने क्या बोला?
एनसीपी- शरदचंद्र पवार की सांसद सुप्रिया सुले ने संकेत दिया है कि उनकी पार्टी परिसीमन बिल पर समर्थन के लिए सरकार से स्पष्टता चाहती है. उन्होंने कहा कि लोकसभा सीटें 50 फीसदी बढ़ाने पर 50 अगर सरकार चर्चा के लिए तैयार होती है, एनसीपी-शरदचंद्र पवार परिसीमन बिल के समर्थन पर विचार कर सकती है.
20 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र में सरकार 130वें और 131वें संविधान संशोधन विधेयक को पास कराने की कोशिश में है. लेकिन संविधान संशोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत चाहिए. यह आंकड़ा सरकार के पास है नहीं.
क्या है नंबरों का खेल?
लोकसभा में एनडीए के पास 324 सांसद हैं. दो-तिहाई बहुमत के लिए 360 वोट चाहिए. यानी सरकार के सामने 36 अतिरिक्त वोट जुटाने की चुनौती है. अब सरकार की नजर विपक्षी खेमे के कई सांसदों पर है. इनमें समाजवादी पार्टी के 37 सांसद, आरजेडी के 4 सांसद और एनसीपी शरदचंद्र पवार के 8 सांसद हैं. सूत्रों के मुताबिक, JMM के तीन, AAP के तीन और NC के 2 सांसद भी सत्ता पक्ष के संपर्क में बताए जा रहे हैं. शरद पवार की पार्टी के 8 सांसद इस पूरे गणित में बड़ा फैक्टर हैं.
बताया यह भी जा रहा है कि सरकार समर्थन जुटाने के साथ-साथ वोटिंग से दूरी के विकल्प पर भी काम कर रही है.
अगर सभी राज्यों में 50 फीसदी तक सीटें बढ़ाने के फॉर्मूले पर सहमति बनती है तो एनसीपी-शरदचंद्र पवार के रुख में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा. 8 सांसद सरकार के साथ आते हैं तो एनडीए का आंकड़ा 324 से बढ़कर 332 हो जाएगा. लेकिन फिर भी 28 वोट की जरूरत रहेगी.
डीएमके फैक्टर क्या है?
डीएमके के पास लोकसभा में 22 सांसद और राज्यसभा में 8 सांसद हैं. अगर डीएमके सरकार के समर्थन में वोट करती है, तो सरकार का आंकड़ा 354 तक पहुंच जाएगा, यानी 360 के बहुमत से सिर्फ 6 वोट दूर. अगर डीएमके समर्थन के बजाय एब्सटेन करती है तो सदन में मौजूद सांसदों की संख्या घटेगी और बहुमत का आंकड़ा भी नीचे आएगा. डीएमके चाहे समर्थन करे या दूरी बनाए दोनों ही स्थिति में उसका फैसला अहम है.
राज्यसभा में सरकार का नंबर गेम
राज्यसभा में सरकार का नंबर गेम लोकसभा के मुकाबले आसान दिखाई दे रहा है. राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा 164 है. सरकार के पास 155 सांसद हैं. बंगाल उपचुनाव के बाद यह संख्या 158 हो जाएगी. ऐसे में या तो 6 सांसदों का समर्थन मिले या फिर 12 सांसद एब्सटेन करें, तो सरकार के लिए गणित और आसान हो सकता है. राज्यसभा में डीएमके के 8 सांसद हैं, ऐसे में उनके समर्थन मिल जाए तो सरकार का काम बन जाएगा.