Explainer: क्या है 'वंदे मातरम' बिल, पहले राज्यसभा में ही क्यों होगा पेश, कानून बना तो क्या-क्या बदलेगा?

वंदे मातरम् बिल 2026 को केंद्र सरकार मानसून सत्र में पेश करेगी, लेकिन यह बिल क्या है? इस बिल में क्या प्रावधान किया गया है? बिल को पहले राज्यसभा में ही क्यों पेश किया जाएगा? इस बिल को लेकर भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने क्यों हैं? आइए इन सभी सवालों के जवाब जानते हैं…

Explainer Vande Mataram Bill 2026

Credit- News 24 GFX

संसद का मानसून सत्र चल रहा है और इसमें केंद्र सरकार वंदे मातरम् बिल 2026 (राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण संशोधन विधेयक,2026) पेश करेगी. केद्र सरकार का मकसद इस बिल को कानून बनाना है, ताकि राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् को राष्ट्रीय गान की तरह कानूनी सुरक्षा मिले. वंदे मातरम् का अपमान करने वालों को सजा मिले. वर्तमान में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है, इसलिए केंद्र सरकार ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम 1971’ में संशोधन करके राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को भी राष्ट्रीय प्रतीक बनाकर कानूनी दर्जा देना चाहती है. अब तक अधिनियम में राष्ट्रीय ध्वज (धारा 2), राष्ट्रगान (धारा 3) और संविधान (धारा 1A) का अपमान करने पर सजा का प्रावधान है, लेकिन बिल पारित होने के बाद इस सूची में वंदे मातरम् भी शामिल हो जाएगा.

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पहले राज्यसभा में ही क्यों पेश होगा बिल?

बता दें कि आमतौर पर संसद में धन विधेयकों को छोड़कर कोई भी बिल पहले लोकसभा में पेश किया जाता है और यहां पारित होने के बाद राज्यसभा में पेश किया जाता है, लेकिन केंद्र सरकार वंदे मातरम् बिल को पहले राज्यसभा में पेश करेगी. हालांकि बिल को पहले राज्यसभा में पेश करने के पीछे कोई नियम या संवैधानिक कानून नहीं है, बल्कि कोई भी बिल किसी भी सदन में पहले पेश किया जा सकता है. लेकिन वंदे मातरम् बिल को पहले राज्यसभा में पेश करने का कारण विशेष रणनीति, ज्यादा कार्यभार, बिल का विवादित होना और बिल पर चर्चा के लिए ज्यादा समय की जरूरत है.

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अपमान पर सजा के लिए क्या है प्रावधान?

वंदे मातरम् कानून लागू होने के बाद इसका अपमान करने पर या इसके गायन में रुकावट डालना दंडनीय अपराध होगा. प्रस्तावित बिल की धारा 3 के तहत दोषी को 3 साल तक की जेल या जुर्माना या जेल-जुर्माना दोना हो सकता है. ऐसे मामले में एक बार दोषी साबित होने के बाद दोबारा वही गलती करने पर कम से कम एक साल की सजा का प्रावधान बिल में किया गया है. इसी तरह की सजा वर्तमान में राष्ट्रगान के अपमान पर दी जाती है.

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अपमान का दोषी-सजा कैसे साबित होगी?

वंदे मातरम् बिल में प्रावधान किया गया है कि गलती से या अनजाने में हुए अपमाने के लिए सजा नहीं दी जाएगी, बल्कि अपमान जानबूझकर किया गया है, यह साबित करना होगा. वंदे मातरम् के गायन में बाधा डालना, खलल डालना या अन्य किसी रूप में उसक अपमान करना दंडनीय अपराध होगा और पुलिस इन मामलों में सीधे FIR दर्ज कर सकेगी. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 3 महीने पहले एक मामले में फैसला दिया था कि वंदे मातरम नहीं गाना दंडात्मक अपराध नहीं है. इस फैसले के बाद और वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने के मौके पर केंद्र सरकार यह बिल लेकर आई है.

वंदे मातरम् के गायन के कुछ नियम भी होंगे

वंदे मातरम् बिल में इसके गायल को लेकर कुछ नियमों का प्रावधान भी किया गया है, यानी वंदे मातरम् गाते समय कुछ नियमों का पालन करना होगा. जैसे वंदे मातरम् के 6 अंतरे ही गाए जाएंगे. सरकारी कार्यक्रमों में इसका गायन अनिवार्य होगा. स्कूलों में प्रार्थना से पहले और सरकारी कार्यक्रम की शुरुआत में गया जाएगा. 3 मिनट 10 सेकंड में गाया जाएगा और गायन के दौरान सावधान मुद्रा में रहना होगा.

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वंदे मातरम् को लेकर क्यों हो रही सियासत?

वंदे मातरम् बिल को लेकर विवाद भी जारी है, क्योंकि BJP जहां इस बिल को राष्ट्रीय सम्मान बता रही है, वहीं कांग्रेस ने इस बिल को मोदी सरकार की जेल भरो नीति बताया है. कांग्रेस सांसद मणिक्कम टैगोर ने बिल को RSS से प्रेरित शक्ति का दुरुपयोग बताया है. प्रियंका गांधी ने PM मोदी पर वंदे मातरम् से जुड़े तथ्यों को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाया है. वहीं भाजपा का कहना है कि कांग्रेस को वंदे मातरम् से नफरत है. कांग्रेस ने इसे छोटा करके इसका अपमान किया है. मुस्लिम लीग और मोहम्मद अली जिन्ना को खुश करने की कोशिश की थी. इसलिए कांग्रेस नहीं चाहती कि भाजपा इसे कानूनी दर्ज दिलाए.

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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