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फिल्म Ghooskhor Pandit विवाद पर आया ‘सुप्रीम कोर्ट’ का फैसला, नीरज पांडे को करने पड़ेंगे ये जरूरी बदलाव

Supreme Court on Ghooskhor Pandit: पिछले दिनों नीरज पांडे की फिल्म Ghooskhor Pandit से जुड़ा विवाद इतना आगे बढ़ गया कि उसे सुप्रीम कोर्ट तक जाना पड़ा. इस पर उच्च न्यायालय ने फिल्म में उचित बदलाव करने के निर्देश दिए गए हैं. तभी नीरज पांडे ने याचिका दायक की, जिसको SC ने खारिज कर दिया है.

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Edited By : Archi Tiwari Updated: Feb 19, 2026 14:38
Neeraj Pandey Ghooskhor Pandit
Neeraj Pandey Ghooskhor Pandit

Neeraj Pandey Ghooskhor Pandit Controversy: नीरज पांडे की नई फिल्म घूसखोर पंडित (या घूसखोर पंडत) काफी चर्चा में थी. यह फिल्म नेटफ्लिक्स पर आने वाली है और इसमें मनोज बाजपेयी मुख्य भूमिका में हैं. लेकिन फिल्म रिलीज होने से पहले ही विवाद ने सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा तक खटखटा दिया. यह विवाद फिल्म के टाइटल को लेकर था. फिल्म के नाम से देश का ब्राह्मण समाज आहत था. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म का टाइटल बदलने को कहा, जिस पर नीरज पांडे ने याचिका डाली. हालांकि, आज 19 फरवरी की सुनवाई में उस याचिका को खारिज कर दिया गया है.

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विवाद कैसे शुरू हुआ?

फिल्म का नाम Ghooskhor Pandit सुनकर कुछ लोगों को लगा कि यह पंडितों को रिश्वतखोर बताता है. एक जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई. याचिका में कहा गया कि यह नाम जाति और धर्म के आधार पर गलत सोच फैलाता है. यह ब्राह्मण समुदाय की इज्जत को चोट पहुंचाता है. इस तरह यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा.

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मामले पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई

फिल्म के खिलाफ जनहित याचिका में Ghooskhor Pandit को बैन करने की मांग की गई थी. इसकी सुनवाई 12 फरवरी, 2026 को हुई, जहां पर फिल्ममेकर नीरज पांडे को कड़ी फटकार लगाई गई. जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने कहा, “समाज के किसी वर्ग को इस तरह बदनाम नहीं किया जा सकता. अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब किसी को अपमानित करना नहीं है.” कोर्ट ने साफ कहा कि टाइटल बदले बिना फिल्म रिलीज नहीं होगी. नीरज पांडे को हलफनामा दाखिल करने को कहा गया कि फिल्म किसी समुदाय को नहीं ठेस पहुंचाती.

नीरज पांडे का हलफनामा

इस जजमेंट के बाद फिल्ममेकर नीरज ने 19 फरवरी, 2026 को कोर्ट में हलफनामा दिया कि उन्होंने घूसखोर पंडित टाइटल पूरी तरह हटा दिया है. पुराने ट्रेलर, पोस्टर और प्रमोशनल सामग्री भी हटा दी गई है. उन्होंने कहा कि फिल्म किसी धर्म या समुदाय का अपमान नहीं करती. कोर्ट ने इस कदम को सकारात्मक माना. याचिका को खारिज कर दिया और मामले को खत्म कर दिया. कोर्ट ने कहा कि अब इस विवाद को पूरी तरह बंद माना जाए.

जरूरी बदलाव क्या हैं?

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, फिल्ममेकर्स को अब नया टाइटल चुनना होगा. पुराना नाम कहीं भी इस्तेमाल नहीं हो सकता. फिल्म में अगर कोई बदलाव जरूरी हो तो CBFC और OTT प्लेटफॉर्म के नियमों का पालन करना होगा. यह फैसला दिखाता है कि फिल्में बनाते समय समाज की भावनाओं का ध्यान रखना जरूरी है.

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First published on: Feb 19, 2026 02:38 PM

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