Haiwaan Movie Review: प्रियदर्शन की साइकोलॉजिकल थ्रिलर की दुनिया में अक्षय कुमार-सैफ अली खान का है खतरनाक आमना सामना

Haiwaan Movie Review: अक्षय कुमार और सैफ अली खान की ‘हैवान’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है. फिल्म की रिलीज का फैंस को लंबे समय से इंतजार था. वहीं अब फिल्म का पहला रिव्यू भी सामने आ गया है. चलिए जानते हैं फिल्म की कहानी कैसी है?

haiwaan movie review

अक्षय कुमार की 'हैवान' हुई रिलीज (Pic Credit- Instagram)

Movie name: हैवान

Director: प्रियदर्शन

Movie Casts: सैफ अली खान, अक्षय कुमार, बोमन ईरानी, ​​श्रिया पिलगांवकर, सैयामी खेर, मोहनलाल, असरानी, ​​शारिब हाशमी

★★★★★

Haiwaan Movie Review: ‘अंधाधुन’, ‘रात अकेली है’ और ‘फ्रेडी’ जैसी भारतीय साइकोलॉजिकल थ्रिलर्स ने दिखाया है कि डर और रोमांच के लिए सिर्फ बड़े एक्शन सीक्वेंस की जरूरत नहीं होती, कई बार असली खेल किरदारों के दिमाग और उनकी सोच में चलता है. ‘हैवान’ भी इसी स्पेस में कदम रखती है, लेकिन इसका सेटअप इसे बाकी फिल्मों से अलग बनाता है. यहां एक तरफ अक्षय कुमार का परशुराम है, जो शांत रहते हुए भी लगातार खतरे का एहसास कराता है, तो दूसरी तरफ सैफ अली खान का श्याम है, जो देख नहीं सकता, लेकिन आवाजों और आहटों के जरिए अपने आसपास की दुनिया को महसूस करता है. जब इन दोनों के रास्ते टकराते हैं, तो मुकाबला सिर्फ शिकारी और शिकार का नहीं रह जाता, बल्कि दिमाग, इंस्टिंक्ट और सर्वाइवल का खेल बन जाता है. प्रियदर्शन इस कहानी के बड़े पत्ते जल्दी खोलने के बजाय धीरे-धीरे सामने लाते हैं, जिससे फिल्म की जिज्ञासा बनी रहती है. अब सवाल यही है कि क्या ‘हैवान’ इस दिलचस्प सेटअप को 2 घंटे 44 मिनट तक उतने ही असरदार तरीके से संभाल पाती है? तो चलिए, जानते हैं फिल्म का रिव्यू.

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फिल्म की कहानी

‘हैवान’ की कहानी को जितना जानते हैं, उतनी ही दिलचस्पी बढ़ती है. फिल्म एक ऐसे खेल में ले जाती है जहां हर किरदार के बारे में पहली राय जल्द ही बदल सकती है. परशुराम की मौजूदगी शुरू से ही बेचैनी पैदा करती है, लेकिन उसके इरादों को पूरी तरह समझ पाना आसान नहीं। दूसरी तरफ श्याम है, जो दुनिया को आंखों से नहीं, बल्कि आवाजों और आहटों के जरिए महसूस करता है. दोनों के रास्ते जब टकराते हैं, तो कहानी सीधे जवाब देने के बजाय सवाल खड़े करती है. खास बात यही है कि फिल्म अपने बड़े पत्ते जल्दी नहीं खोलती और इसी वजह से इसकी जिज्ञासा बनी रहती है. श्याम की अपने करीबियों को बचाने की कोशिश कहानी में इमोशन जरूर लाती है, लेकिन उसके पीछे क्या-क्या दांव पर लगा है, इसे जानने के लिए फिल्म देखना बेहतर है.

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फिल्म के सितारों की कमाल एक्टिंग

अक्षय कुमार का परशुराम उनके लिए एकदम अलग स्पेस है. यहां उनका चेहरा जितना शांत है, किरदार उतना ही खतरनाक महसूस होता है. वह कम बोलकर भी स्क्रीन पर खतरे की मौजूदगी बनाए रखते हैं. उनके एक्सप्रेशंस और बॉडी लैंग्वेज में एक ऐसी अनिश्चितता है कि आप उनके अगले कदम का अंदाजा लगाते रह जाते हैं. परशुराम को लेकर फिल्म जितना दिखाती है, उससे कहीं ज्यादा छिपाकर रखती है और अक्षय इसी रहस्य को अपने परफॉर्मेंस से बनाए रखते हैं.

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सैफ अली खान का श्याम इस पूरे खेल का दूसरा पहलू है. एक ऐसा किरदार जिसके पास देखने की क्षमता नहीं है, लेकिन आसपास की दुनिया को महसूस करने का अपना तरीका है. सैफ ने इसे किसी बड़े ड्रामे में बदलने के बजाय बेहद सहज रखा है. आवाज और आहट पर उनकी निर्भरता कई सीन्स में तनाव पैदा करती है, क्योंकि दर्शक भी उसी तरह इंतजार करता है कि श्याम को अगली आहट में क्या महसूस होने वाला है. अक्षय और सैफ की स्क्रीन प्रेजेंस का फर्क इस टकराव को और खास बनाता है.

पहल चौधरी के बारे में ज्यादा बताना कहानी का मजा खराब कर सकता है. इतना जरूर कहा जा सकता है कि उनका किरदार फिल्म के आगे बढ़ने के साथ ज्यादा दिलचस्प होता जाता है. पहल ने मासूमियत और इमोशन को अच्छी तरह संभाला है. सैयामी खेर, श्रिया पिलगांवकर और बोमन ईरानी कहानी को जरूरी सपोर्ट देते हैं. शारिब हाशमी पुलिस ऑफिसर के रूप में जांच वाले हिस्से को आगे बढ़ाते हैं, जबकि असरानी की मौजूदगी फिल्म में एक भावुक पल लेकर आती है.

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फिल्म में छुपे रहस्य

प्रियदर्शन फिल्म में लगातार कुछ छिपाकर रखने का फायदा उठाते हैं. वह हर मोड़ पर ट्विस्ट डालने की कोशिश नहीं करते, बल्कि सही समय तक जानकारी रोककर रखते हैं. यही वजह है कि कई सीन्स में असली रोमांच इस बात में है कि अभी जो दिख रहा है, उसके पीछे क्या छिपा है. एक्शन मौजूद है, लेकिन फिल्म का असली खेल किरदारों की सोच में चलता है. 2 घंटे 44 मिनट की लंबाई के बावजूद यह रहस्य कई हिस्सों में कहानी को आगे खींचता है.

बैकग्राउंड म्यूजिक

प्रीतम का बैकग्राउंड स्कोर इस बेचैनी को और मजबूत करता है. कई जगह संगीत खुद किसी अनदेखे खतरे का संकेत देने लगता है. ‘मेरे हीरो हैं’ इमोशनल हिस्सों में जगह बनाता है, वहीं ‘रंगियारा’ फिल्म के सफर वाले पलों को हल्का टच देता है. म्यूजिक कहानी पर हावी नहीं होता, लेकिन माहौल को महसूस कराने में अपनी भूमिका निभाता है.

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मलयालम फिल्म का रीमेक

‘हैवान’ की कहानी प्रियदर्शन की मलयालम फिल्म ‘ओप्पम’ से जुड़ी है, लेकिन हिंदी वर्जन को सिर्फ उसका रीमेक कहकर छोड़ना सही नहीं होगा. असल कहानी के सस्पेंस को रखते हुए इसे हिंदी दर्शकों के हिसाब से ट्रीट किया गया है. अक्षय कुमार और सैफ अली खान की मौजूदगी फिल्म को अपना अलग रंग देती है. मोहनलाल की खास मौजूदगी ओरिजिनल फिल्म से एक दिलचस्प कनेक्शन बनाती है, जिसे बिना ज्यादा बताए ही महसूस करना बेहतर है.

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फाइनल वर्डिक्ट

‘हैवान’ की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह आपको हर चीज पहले से समझने नहीं देती. परशुराम कितना खतरनाक है, श्याम कितना तैयार है और दोनों के बीच असल में कौन किसका पीछा कर रहा है, इन सवालों के जवाब फिल्म धीरे-धीरे सामने लाती है. अक्षय का डार्क अवतार, सैफ का कंट्रोल्ड परफॉर्मेंस, पहल चौधरी का रहस्यमयी ट्रैक और प्रियदर्शन की कहानी को संभालकर आगे बढ़ाने की शैली इसे एक इंगेजिंग थ्रिलर बनाती है. अगर आपको ऐसी फिल्में पसंद हैं जिनके बारे में देखने से पहले कम जानना और स्क्रीन पर खुद रहस्य खोलना ज्यादा मजेदार लगता है, तो ‘हैवान’ को मौका दिया जा सकता है.

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लेख समाप्त
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