Diljit Dosanjh About Life Truth: दिलजीत दोसांझ (Diljit Dosanjh) का यह वायरल बयान काशी (वाराणसी) के महाश्मशान मणिकर्णिका घाट के उनके एक बेहद व्यक्तिगत और आध्यात्मिक अनुभव से जुड़ा हुआ है. हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने इस बात का खुलासा किया कि कैसे बनारस की एक रात ने जिंदगी को लेकर उनका पूरा नजरिया बदल दिया.
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मणिकर्णिका घाट पर बिताई वो रात
दिलजीत दोसांझ ने अपने अनुभव को साझा करते हुए बताया कि वे एक बार काशी के मणिकर्णिका घाट गए थे. वहां वे किसी शूटिंग के लिए नहीं, बल्कि एक आम इंसान की तरह पहुंचे थे. दिलजीत ने कहा, "मैं पूरी रात वहीं घाट पर चुपचाप बैठा रहा. लोग आते-जाते रहे और मेरी आंखों के सामने लगातार लाशें जलती रहीं." मणिकर्णिका घाट दुनिया का इकलौता ऐसा श्मशान है जहां चौबीसों घंटे चिताएं जलती हैं. उस माहौल की खामोशी और जलती आग ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया.
"इंसान की कोई औकात नहीं है…"
दिलजीत ने बताया कि "पूरी रात जलती चिताओं और घाट का दृश्य देखने के बाद मुझे एहसास हुआ कि इंसान की कोई औकात नहीं है. हम जिंदगी भर पैसे, घमंड, नाम, ताकत और पहचान के पीछे भागते रहते हैं और 'मैं-मैं' करते हैं, लेकिन अंत में सब कुछ यहीं राख और मिट्टी में मिल जाता है."
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दिलजीत की आध्यात्मिक यात्रा
दिलजीत ने बताया कि इस आध्यात्मिक अनुभव के बाद वे समझ गए कि जीवन बेहद अस्थाई है. यही वजह है कि आज एक ग्लोबल आइकन और सुपरस्टार बनने के बाद भी दिलजीत बेहद डाउन-टू-अर्थ रहते हैं और अपने फैंस से पूरी विनम्रता के साथ मिलते हैं. दिलजीत अक्सर अपनी आध्यात्मिक यात्रा को लेकर सुर्खियों में बने रहते हैं.
दिलजीत से जुड़ी कंट्रोवर्सी
दिलजीत दोसांझ इन दिनों अपनी नई फिल्म 'सतलज' (Satluj) को लेकर भी चर्चा में हैं, जो मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा की जिंदगी पर आधारित है और ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज के बाद से विवादों में घिरी हुई है.
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Diljit Dosanjh About Life Truth: दिलजीत दोसांझ (Diljit Dosanjh) का यह वायरल बयान काशी (वाराणसी) के महाश्मशान मणिकर्णिका घाट के उनके एक बेहद व्यक्तिगत और आध्यात्मिक अनुभव से जुड़ा हुआ है. हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने इस बात का खुलासा किया कि कैसे बनारस की एक रात ने जिंदगी को लेकर उनका पूरा नजरिया बदल दिया.
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मणिकर्णिका घाट पर बिताई वो रात
दिलजीत दोसांझ ने अपने अनुभव को साझा करते हुए बताया कि वे एक बार काशी के मणिकर्णिका घाट गए थे. वहां वे किसी शूटिंग के लिए नहीं, बल्कि एक आम इंसान की तरह पहुंचे थे. दिलजीत ने कहा, “मैं पूरी रात वहीं घाट पर चुपचाप बैठा रहा. लोग आते-जाते रहे और मेरी आंखों के सामने लगातार लाशें जलती रहीं.” मणिकर्णिका घाट दुनिया का इकलौता ऐसा श्मशान है जहां चौबीसों घंटे चिताएं जलती हैं. उस माहौल की खामोशी और जलती आग ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया.
“इंसान की कोई औकात नहीं है…”
दिलजीत ने बताया कि “पूरी रात जलती चिताओं और घाट का दृश्य देखने के बाद मुझे एहसास हुआ कि इंसान की कोई औकात नहीं है. हम जिंदगी भर पैसे, घमंड, नाम, ताकत और पहचान के पीछे भागते रहते हैं और ‘मैं-मैं’ करते हैं, लेकिन अंत में सब कुछ यहीं राख और मिट्टी में मिल जाता है.”
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दिलजीत की आध्यात्मिक यात्रा
दिलजीत ने बताया कि इस आध्यात्मिक अनुभव के बाद वे समझ गए कि जीवन बेहद अस्थाई है. यही वजह है कि आज एक ग्लोबल आइकन और सुपरस्टार बनने के बाद भी दिलजीत बेहद डाउन-टू-अर्थ रहते हैं और अपने फैंस से पूरी विनम्रता के साथ मिलते हैं. दिलजीत अक्सर अपनी आध्यात्मिक यात्रा को लेकर सुर्खियों में बने रहते हैं.
दिलजीत से जुड़ी कंट्रोवर्सी
दिलजीत दोसांझ इन दिनों अपनी नई फिल्म ‘सतलज’ (Satluj) को लेकर भी चर्चा में हैं, जो मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा की जिंदगी पर आधारित है और ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज के बाद से विवादों में घिरी हुई है.
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