CBSE: 4 दिन की देरी के बाद लाइव हुआ पोर्टल, लेकिन शुरू होते ही हुआ क्रैश; लॉगिन एरर से छात्र परेशान

पोर्टल शुरू होते ही देशभर से छात्रों ने लॉगिन से जुड़ी गंभीर समस्याओं और एरर की शिकायतें दर्ज करानी शुरू कर दी हैं। कई छात्रों का कहना है कि अपनी सभी लॉगिन डिटेल्स और रोल नंबर डालने के बाद स्क्रीन पूरी तरह फ्रीज (Frozen) हो जा रही है और पेज आगे लोड नहीं हो रहा है।

CBSE

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के कक्षा 12वीं के नतीजों के बाद अंकों के सत्यापन (Verification) और पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) की आस लगाए बैठे लाखों छात्रों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। चार दिनों की लंबी देरी और बार-बार बदले गए शेड्यूल के बाद, आज यानी 2 जून को आखिरकार सीबीएसई का री-इवैल्यूएशन पोर्टल लाइव तो हुआ, लेकिन तकनीकी खामियों के कारण तुरंत क्रैश हो गया।

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पोर्टल शुरू होते ही देशभर से छात्रों ने लॉगिन से जुड़ी गंभीर समस्याओं और एरर की शिकायतें दर्ज करानी शुरू कर दी हैं। कई छात्रों का कहना है कि अपनी सभी लॉगिन डिटेल्स और रोल नंबर डालने के बाद स्क्रीन पूरी तरह फ्रीज (Frozen) हो जा रही है और पेज आगे लोड नहीं हो रहा है। सोशल मीडिया पर छात्रों ने आ रहे एरर के स्क्रीनशॉट और वीडियो शेयर कर अपनी नाराजगी जाहिर की है।

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तारीखों पर तारीख: क्या सीबीएसई कुछ भी ठीक नहीं कर सकता?

छात्रों और अभिभावकों का गुस्सा इस बात पर है कि सीबीएसई ने सोशल मीडिया पर इस प्लेटफॉर्म के लाइव होने की कई बार घोषणा की और बार-बार आश्वासन दिए। मूल कार्यक्रम के अनुसार, इस पोस्ट-रिजल्ट सर्विस प्लेटफॉर्म को 29 मई, 2026 को लाइव होना था।

इसके बाद तारीख बदलकर 1 जून की गई, और फिर देरी करते हुए इसे आज 2 जून को लाइव किया गया। लेकिन इतनी तैयारियों और देरी के बावजूद पोर्टल का सर्वर छात्रों का लोड नहीं संभाल सका।

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4 लाख से अधिक छात्र प्रभावित, 80000 आवेदनों की उम्मीद

इस तकनीकी गड़बड़ी का सीधा असर उन 4,04,319 छात्रों पर पड़ रहा है, जो इस साल मार्क्स वेरिफिकेशन, कॉपियों की फोटोकॉपी प्राप्त करने और री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन करने की कतार में हैं।

सीबीएसई के नए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर पहले ही काफी विवाद चल रहा है। इस बीच, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इंडिया टुडे को दिए एक विशेष साक्षात्कार में अनुमान जताया था कि जिन छात्रों ने अपनी मूल्यांकित उत्तर पुस्तिकाएं देखी हैं, उनमें से लगभग 15 से 20 प्रतिशत छात्र (यानी हर 5 में से 1 छात्र) अंक सत्यापन या पुनर्मूल्यांकन के लिए औपचारिक चुनौती दे सकते हैं। अगर यह अनुमान सही साबित होता है, तो सीबीएसई को 60,000 से 80,000 फॉर्मल एप्लिकेशन मिल सकते हैं, जो बोर्ड के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा पोस्ट-रिजल्ट रिव्यू अभ्यास होगा।

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पेमेंट फेलियर से लेकर धुंधली कॉपियों तक, शिकायतों की लंबी लिस्ट

री-इवैल्यूएशन पोर्टल को लेकर तकनीकी दिक्कतें केवल लॉगिन तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि पिछले कई हफ्तों से शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। छात्रों और अभिभावकों ने निम्नलिखित गंभीर आरोप लगाए हैं:

पेमेंट गेटवे फेलियर: फीस भरते समय पेमेंट गेटवे क्रैश हो रहे हैं, जिससे कई बार पैसे कट जा रहे हैं लेकिन रसीद (Missing Receipts) नहीं मिल रही है।

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धुंधली और अधूरी कॉपियां: कुछ छात्रों का दावा है कि जो स्कैन की गई आंसर-शीट अपलोड की गई हैं, वे बेहद धुंधली (Blurred) और अधूरी हैं, और कुछ कॉपियां तो उनके मूल जवाबों से मेल ही नहीं खा रही हैं।

एडमिशन सीजन शुरू, छात्रों की बढ़ी धड़कनें

पोर्टल में आ रही इस लगातार खराबी ने कॉलेज एडमिशन और काउंसलिंग राउंड की तैयारी कर रहे छात्रों की चिंता को चरम पर पहुंचा दिया है। छात्र इस उम्मीद में हैं कि री-इवैल्यूएशन के बाद उनके मार्क्स सुधरेंगे ताकि उन्हें मनपसंद कॉलेज में दाखिला मिल सके, लेकिन तकनीकी रुकावटों के कारण वे आवेदन ही नहीं कर पा रहे हैं।

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फिलहाल, बार-बार री-शेड्यूल करने के बाद आज आई इस नई तकनीकी आफत पर सीबीएसई ने अभी तक किसी नई समयसीमा (Fresh Timeline) या तारीख आगे बढ़ाने का आधिकारिक एलान नहीं किया है।

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लेखक के बारे में

Vandana Bharti

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.
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