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NCERT New Syllabus: NCERT का बड़ा कदम, अब 9वीं के छात्र पढ़ेंगे चुनाव आयोग और SIR की सफलता की कहानी

NCERT Class 9 New Book: एनसीईआरटी ने कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की किताब में चुनाव आयोग की निष्पक्षता और SIR (Special Intensive Revision) को शामिल किया है। जानें क्या है विवाद।

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देश में चुनावी प्रक्रियाओं और पारदर्शिता को लेकर जारी सियासी बहस के बीच, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने एक बड़ा बदलाव किया है। कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान (Social Science) की नई किताब में भारत की चुनाव प्रक्रिया, निर्वाचन आयोग (ECI) और विवादों में रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को शामिल किया गया है। किताब में भारतीय चुनाव प्रणाली की जमकर सराहना की गई है और इसे दुनिया में “अद्वितीय” बताया गया है। विपक्ष द्वारा लगातार उठाए जा रहे सवालों के बीच पाठ्यक्रम में किया गया यह बदलाव एक नए राजनीतिक विवाद को जन्म दे सकता है।

किताब में क्या है खास? चुनाव आयोग और SIR को मिला सर्टिफिकेट

NCERT के नए चैप्टर में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उसकी निष्पक्षता को लेकर कई अहम बातें रेखांकित की गई हैं:

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  1. निष्पक्षता का पाठ: किताब में छात्रों को बताया गया है कि चुनाव आयोग देश में पूरी तरह से स्वतंत्र, पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए किस तरह काम करता है। वोटर लिस्ट तैयार करने से लेकर चुनाव संपन्न कराने तक इसकी भूमिका को सराहा गया है।
  2. SIR का बचाव और महत्व: स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (वोटर लिस्ट का विशेष पुनरीक्षण) को चुनावी प्रक्रिया का एक अनिवार्य हिस्सा बताया गया है। किताब के अनुसार, SIR यह सुनिश्चित करता है कि मतदाता सूची पूरी तरह अपडेटेड और वेरिफाइड हो, ताकि कोई भी पात्र नागरिक वोट देने से न छूटे और किसी भी फर्जी नाम को हटाया जा सके।
  3. चुनावी टूल्स की जानकारी: नए पाठ्यक्रम में ईवीएम (EVM), वीवीपीएटी (VVPAT), आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) और मतदाता जागरूकता अभियानों (SVEEP) को लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी कदम बताया गया है।

प्रैक्टिकल एक्टिविटी से छात्र समझेंगे गठबंधन की राजनीति
भारतीय राजनीति में गठबंधनों (Alliances) के बढ़ते प्रभाव को समझाने के लिए किताब में एक विशेष एक्टिविटी सेक्शन जोड़ा गया है। इसके जरिए छात्रों की राजनीतिक समझ बढ़ाने की कोशिश की गई है। छात्रों को देश के राजनीतिक इतिहास को खंगालने का काम दिया गया है। उन्हें 1977, 1999, 2004, 2009, 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद केंद्र में सरकार बनाने वाले प्रमुख राजनीतिक गठबंधनों की पहचान करने और उनके काम करने के तरीके को समझने के लिए कहा गया है।

टाइमिंग पर उठ रहे सवाल: विपक्ष के हमलों के बीच नया चैप्टर
यह नया चैप्टर ऐसे समय में सामने आया है जब विपक्षी दल चुनाव आयोग की भूमिका, ईवीएम की विश्वसनीयता और हालिया वोटर लिस्ट संशोधनों (SIR) को लेकर लगातार सरकार और आयोग पर हमलावर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि इन प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी है। ऐसे में स्कूली पाठ्यक्रम के जरिए आयोग और उसकी नीतियों को सही ठहराने के इस कदम पर आने वाले दिनों में संसद से लेकर सड़क तक सियासी घमासान मचना तय माना जा रहा है।

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First published on: Jun 26, 2026 10:43 AM

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