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Union Budget 2025: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2025 पेश कर दिया है। आर्थिक सर्वेक्षण में वित्त वर्ष 2026 में GDP ग्रोथ को लेकर अनुमान जाहिर किया गया है। इसके अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में देश की जीडीपी 6.3 से 6.8% की रफ्तार से आगे बढ़ सकती है। बता दें कि देश का बजट कल यानी 1 फरवरी को पेश किया जाएगा।
आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि सभी क्षेत्र अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। कृषि क्षेत्र मजबूत बना हुआ है और लगातार ट्रेंड लेवल से ऊपर चल रहा है। औद्योगिक क्षेत्र भी महामारी से पहले की स्थिति से और आगे बढ़ गया है। हाल के वर्षों में विकास की मजबूत दर ने सेवा क्षेत्र को उसके ट्रेंड लेवल के करीब पहुंचा दिया है। इसके निर्यात में उछाल देखने को मिला है. अंतर्राष्ट्रीय स्तर की चुनौतियों के बावजूद वित्त वर्ष 2025 के पहले नौ महीनों में इसमें 11.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
#WATCH | Delhi | Chief Economic Advisor, Dr. V. Anantha Nageswaran speaks about the Economic Survey 2024-25 pic.twitter.com/V3BjPPcASS
— ANI (@ANI) January 31, 2025
आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, खुदरा मुद्रास्फीति वित्त वर्ष 24 में 5.4% से घटकर अप्रैल-दिसंबर 2024 में 4.9% हो गई है। वहीं, रोजगार के मोर्चे पर स्थिति कुछ बेहतर हुई है। पिछले सात वर्षों में श्रम बाजार में सुधार हुआ है, बेरोजगारी दर 2017-18 (जुलाई-जून) में 6.0% से घटकर 2023-24 (जुलाई-जून) में 3.2% हो गई है। सरकार ने रोजगार, स्व-रोजगार, और श्रमिक कल्याण को बढ़ावा देने के लिए कई उपाय लागू किए हैं। हाल ही में शुरू की गई पीएम-इंटर्नशिप योजना इस दिशा में बड़ा कदम है।
आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि ग्लोबल लेवल पर IPO लिस्टिंग में भारत की हिस्सेदारी 2024 में बढ़कर 30 प्रतिशत हो गई, जो 2023 में 17% थी। लंबे समय में भारतीय बाजार ने दुनिया के कई बाजारों की तरह शानदार प्रदर्शन किया है। देश के बढ़ते डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेशकों की बढ़ती संख्या ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सरकार द्वारा किए गए सुधारों ने भी मार्केट को नई ऊंचाई पर ले जाने में मदद की है। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, वित्त वर्ष 24 के पहले आठ महीनों में कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) 47.2 अरब डॉलर था, जो वित्त वर्ष 25 की समान अवधि में बढ़कर 55.6 अरब डॉलर हो गया।
सर्वेक्षण के अनुसार, वाणिज्यिक बैंकों ने अपनी सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (GNPA) अनुपात में लगातार गिरावट दर्ज की है, जो वित्त वर्ष 18 में अपने चरम से सितंबर 2024 के अंत में 2.6 प्रतिशत के निचले स्तर पर आ गया है। यह बैंकों की सुधरती स्थिति को दर्शाता है। इसके साथ ही सर्वेक्षण में कहा गया है कि भारत को AI नियामक ढांचे पर फिर से विचार करने की जरूरत है।
हर साल देश का बजट पेश किए जाने से पहले सरकार संसद के पटल पर आर्थिक सर्वेक्षण रखती है। 1950-51 में पहली बार देश का इकोनॉमिक सर्वे पेश किया गया था, तब से अब तक यह परंपरा जारी है। चलिए जानते हैं कि आखिर आर्थिक सर्वेक्षण क्या होता है और यह क्यों जरूरी है।
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आर्थिक सर्वेक्षण या इकोनॉमिक सर्वे को आप सरकार का रिपोर्ट कार्ड मान सकते हैं। इसमें पिछले वित्त वर्ष के कामकाज की समीक्षा के साथ-साथ भविष्य में ग्रोथ की संभावनाओं पर आधिकारिक नजरिया दिया जाता है। इसके जरिए सरकार देश की अर्थव्यवस्था की ताजा स्थिति के बारे में बताती है। आर्थिक सर्वेक्षण में बताया जाता है कि किस सेक्टर से कितनी कमाई हुई, क्या चुनौतियां हैं। ऐसे कौन से फैक्टर हैं, जो आर्थिक तरक्की में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं और उन्हें कैसे दूर किया जा सकता है।
यह सर्वेक्षण इस बात पर भी प्रकाश डालता है कि अर्थव्यवस्था के फुल स्पीड में दौड़ने के लिए क्या कदम उठाए जाने की जरूरत है। आर्थिक सर्वेक्षण को बजट का मुख्य आधार भी कहा जाता है। आम आदमी के लिहाज से बात करें, तो इकोनॉमिक सर्वे से उसे महंगाई और बेरोजगारी जैसे महत्वपूर्ण आंकड़ों की जानकारी मिल जाती है। साथ ही निवेश, बचत और खर्च को लेकर एक आइडिया मिल जाता है।
निवेशकों के लिहाज से देखें, तो यह सर्वेक्षण काफी फायदेमंद है। इससे उन्हें यह समझने में मदद मिलती है कि किन क्षेत्रों में निवेश के अच्छे मौके हैं। उदाहरण के तौर पर यदि सर्वेक्षण में इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार के फोकस का जिक्र है, तो इस सेक्टर में भविष्य में अच्छी संभावनाएं बन सकती हैं। कुल मिलकर देखें तो आर्थिक सर्वेक्षण देश की एक ऐसी तस्वीर पेश करता है, जिससे सभी को परिचित होना जरूरी है।
आर्थिक सर्वेक्षण को मुख्य आर्थिक सलाहकार के मार्गदर्शन में तैयार किया जाता है। वित्त वर्ष 1950-51 में पहली बार देश का आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया गया था। शुरुआत में यह बजट वाले दिन ही पेश होता था, लेकिन 1964 से इसे बजट से एक दिन पहले पेश किया जाने लगा।
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