नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने पेट्रोल पर 13 रुपये से घटाकर 3 रुपये और डीजल पर 10 रुपये से घटाकर शून्य (Zero) एक्साइज ड्यूटी करने का जो फैसला लिया है, वह पूरी तरह से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के लिए एक ‘राहत पैकेज’ की तरह है। पेट्रोलियम मंत्रालय और वित्त विभाग के सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि पेट्रोल और डीजल के खुदरा दामों में कोई कटौती नहीं की गई है। जो भाव कल थे, वही आज भी लागू रहेंगे। यह कटौती आम उपभोक्ताओं को सस्ता तेल देने के लिए नहीं, बल्कि कंपनियों के बढ़ते घाटे को रोकने के लिए की गई है।
अंडर-रिकवरी को कम करने का लक्ष्य
ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल (Brent Crude) $107 प्रति बैरल के पार निकल चुका है। इतनी महंगी दर पर तेल खरीदकर पुरानी कीमतों पर बेचने से सरकारी तेल कंपनियों को भारी नुकसान (Under-recovery) हो रहा था। एक्साइज ड्यूटी कम होने से कंपनियों की लागत (Input Cost) कम हो जाएगी। अब कंपनियां घाटे की भरपाई कर सकेंगी और उन्हें भविष्य में कीमतें बढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
पैनिक बाइंग और महंगाई पर लगाम
भले ही पेट्रोल सस्ता न हुआ हो, लेकिन इस फैसले से एक बड़ी राहत यह मिली है कि अब कीमतें बढ़ेंगी भी नहीं। पिछले कुछ दिनों से पैनिक बाइंग के कारण मांग 50 लाख से बढ़कर 89 लाख सिलेंडर/लीटर तक पहुंच गई थी। सरकार के इस बफर से अब तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद घरेलू कीमतों को स्थिर रख पाएंगी, जिससे महंगाई पर लगाम लगेगी।
यानी पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी जरूर घटी है, लेकिन पेट्रोल पंप पर रेट्स वही रहेंगे। सरकार ने यह कदम तेल कंपनियों के घाटे (Under-recovery) को कम करने के लिए उठाया है ताकि भविष्य में कीमतें न बढ़ानी पड़ें। यानी सस्ता तो नहीं, पर अब तेल महंगा भी नहीं होगा।










