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Rupee at All time Low: इतिहास के सबसे निचले स्तर पर रुपया! पहली बार 94 रुपये के पार पहुंचा डॉलर; ईरान युद्ध और कच्चे तेल ने बढ़ाई टेंशन

पश्विम एशिया (ईरान-अमेरिका तनाव) में जारी युद्ध और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों ने भारतीय रुपये की कमर तोड़ दी है। 27 मार्च 2026 को विदेशी मुद्रा बाजार खुलते ही रुपया 30 पैसे टूटकर 94.28 के अब तक के सबसे निचले स्तर (All-time Low) पर जा गिरा। 26 मार्च को रामनवमी की छुट्टी के बाद जब आज बाजार खुला, तो निवेशकों में ईरान युद्ध के लंबे खिंचने का डर साफ दिखाई दिया।

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Written By: Vandana Bharti Updated: Mar 27, 2026 10:23
डॉलर के ख‍िलाफ रुपया ग‍िरा

नई दिल्ली: भारतीय रुपया शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.28 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर खुला। यह पहली बार है जब भारतीय मुद्रा ने ₹94 प्रति डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार किया है। इससे पहले 25 मार्च को रुपया ₹93 पर बंद हुआ था (26 मार्च को बाजार बंद था)। 28 फरवरी को ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक रुपया 3% से अधिक टूट चुका है।

कच्चे तेल की आग में झुलसा रुपया

रुपये की इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतों का $107 प्रति बैरल के ऊपर बने रहना है। भारत अपनी जरूरत का 88% कच्चा तेल आयात करता है। तेल महंगा होने से भारत का आयात बिल (Import Bill) बढ़ जाता है और चालू खाता घाटा (CAD) चौड़ा होता है, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ता है।

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शांति वार्ता की उम्मीदें धुंधली
हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के बिजली संयंत्रों पर हमले को 10 दिनों के लिए टाल दिया है, लेकिन ईरान ने अमेरिका के शांति प्रस्ताव को “एकतरफा” बताते हुए खारिज कर दिया है। युद्ध खत्म होने के कोई ठोस संकेत न मिलने से निवेशकों का भरोसा डगमगा गया है और वे सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के तौर पर डॉलर की ओर भाग रहे हैं।

RBI की दखल पर टिकी नजरें
बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) रुपये को फ्री-फॉल (तेजी से गिरने) से बचाने के लिए बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है। पिछले सत्र में भी केंद्रीय बैंक ने डॉलर बेचकर रुपये को सहारा देने की कोशिश की थी।

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क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
एक्‍सपर्ट का मानना है क‍ि जब तक युद्ध की स्थिति स्पष्ट नहीं होती, बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी। यदि तनाव कम होता है, तो रुपया Rs 1 से Rs 1.5 तक रिकवर कर सकता है, लेकिन फिलहाल दबाव काफी अधिक है।

First published on: Mar 27, 2026 10:23 AM

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