Repo Rate Cut Impact on EMI: 5 साल के लंबे इंतजार के बाद भारतीय रिजर्व बैंक ने रैपो रेट में कटौती कर दी है। मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय बैंक के नए गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि रेपो रेट में 0.25% की कटौती की गई है। अब रेपो रेट की दर 6.50% से कम होकर 6.25% कर दी गई है। तो आइए जानते हैं इसका आम आदमी पर क्या असर पड़ सकता है?
2020 में हुई थी कटौती
बता दें कि RBI ने पांच साल के लंबे इंतजार के बाद लोगों को यह राहत की खबर सुनाई है। इससे पहले 2020 में कोरोना काल के दौरान रेपो रेट में 0.40% की कटौती की गई थी। वहीं फरवरी 2023 में रेपो रेट बढ़ाकर 6.50% कर दिया गया था। ऐसे में काफी समय से लोग रेपो रेट कम करने की आस लगाए बैठे थे। वहीं अब RBI ने लोगों को यह खुशखबरी दे दी है।
यह भी पढ़ें- Repo Rate Update: RBI ने दी बड़ी राहत, 5 साल बाद रेपो रेट में कटौती
रेपो रेट क्या है?
RBI कई बैंकों को पैसा उधार देता है और बैंकें इसी पैसे से आम जनता को लोन देती हैं। हालांकि बैंकों को पैसे उधार देने के बदले RBI एक ब्याज दर निर्धारित करता है, जिसे रेपो रेट कहा जाता है। RBI का रेपो रेट जितना ज्यादा होगा, बैंकें उतने अधिक ब्याज दर पर लोन देंगी। ऐसे में RBI ने रेपो रेट कम कर दिया है तो बैंकें भी लोन की ब्याज दर सस्ती कर सकती हैं।
रेपो रेट कम करने के 5 फायदे
1. रेपो रेट कम करने से मिडिल क्लास लोगों को काफी फायदा होने की उम्मीद है। इससे घर, कार समेत कई तरह के लोन पर EMI कम हो जाएगी।
2. रेपो रेट कम होने पर EMI की ब्याज दरें भी सस्ती हो जाती हैं। इससे मिडिल क्लास लोगों पर EMI का बोझ कम हो सकता है।
3. EMI कम होने पर लोगों के पास पैसों की बचत होगी, जिसे लोग बाजार में खर्च करेंगे। इससे मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ने की उम्मीद है।
4. रेपो रेट कम करने से बाजार में मनी सप्लाई बढ़ती है, जिससे लोगों के पास ज्यादा पैसा आता है और वो अधिक खर्च कर पाते हैं।
5. मार्केट में मनी फ्लो बढ़ने से चीजों की डिमांड भी बढ़ेगी और देश में रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है।
किसे होगा कितना फायदा?
| लोन |
साल |
वर्तमान ब्याज दर (Home Loan) |
EMI |
0.25% कटौती के बाद EMI |
हर महीने की बचत |
| 20 लाख |
20 साल |
8.50% |
17,356 |
17,041 |
315 |
| 30 लाख |
20 साल |
8.50% |
26,035 |
25,562 |
473 |
| 50 लाख |
20 साल |
8.50% |
43,391 |
42,603 |
788 |
यह भी पढ़ें- Repo Rate Update: फिंगर क्रॉस्ड, अब से कुछ देर में RBI सुनाएगा फैसला, इस एक बात का है डर
Repo Rate Cut Impact on EMI: 5 साल के लंबे इंतजार के बाद भारतीय रिजर्व बैंक ने रैपो रेट में कटौती कर दी है। मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय बैंक के नए गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि रेपो रेट में 0.25% की कटौती की गई है। अब रेपो रेट की दर 6.50% से कम होकर 6.25% कर दी गई है। तो आइए जानते हैं इसका आम आदमी पर क्या असर पड़ सकता है?
2020 में हुई थी कटौती
बता दें कि RBI ने पांच साल के लंबे इंतजार के बाद लोगों को यह राहत की खबर सुनाई है। इससे पहले 2020 में कोरोना काल के दौरान रेपो रेट में 0.40% की कटौती की गई थी। वहीं फरवरी 2023 में रेपो रेट बढ़ाकर 6.50% कर दिया गया था। ऐसे में काफी समय से लोग रेपो रेट कम करने की आस लगाए बैठे थे। वहीं अब RBI ने लोगों को यह खुशखबरी दे दी है।
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रेपो रेट क्या है?
RBI कई बैंकों को पैसा उधार देता है और बैंकें इसी पैसे से आम जनता को लोन देती हैं। हालांकि बैंकों को पैसे उधार देने के बदले RBI एक ब्याज दर निर्धारित करता है, जिसे रेपो रेट कहा जाता है। RBI का रेपो रेट जितना ज्यादा होगा, बैंकें उतने अधिक ब्याज दर पर लोन देंगी। ऐसे में RBI ने रेपो रेट कम कर दिया है तो बैंकें भी लोन की ब्याज दर सस्ती कर सकती हैं।
रेपो रेट कम करने के 5 फायदे
1. रेपो रेट कम करने से मिडिल क्लास लोगों को काफी फायदा होने की उम्मीद है। इससे घर, कार समेत कई तरह के लोन पर EMI कम हो जाएगी।
2. रेपो रेट कम होने पर EMI की ब्याज दरें भी सस्ती हो जाती हैं। इससे मिडिल क्लास लोगों पर EMI का बोझ कम हो सकता है।
3. EMI कम होने पर लोगों के पास पैसों की बचत होगी, जिसे लोग बाजार में खर्च करेंगे। इससे मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ने की उम्मीद है।
4. रेपो रेट कम करने से बाजार में मनी सप्लाई बढ़ती है, जिससे लोगों के पास ज्यादा पैसा आता है और वो अधिक खर्च कर पाते हैं।
5. मार्केट में मनी फ्लो बढ़ने से चीजों की डिमांड भी बढ़ेगी और देश में रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है।
किसे होगा कितना फायदा?
| लोन |
साल |
वर्तमान ब्याज दर (Home Loan) |
EMI |
0.25% कटौती के बाद EMI |
हर महीने की बचत |
| 20 लाख |
20 साल |
8.50% |
17,356 |
17,041 |
315 |
| 30 लाख |
20 साल |
8.50% |
26,035 |
25,562 |
473 |
| 50 लाख |
20 साल |
8.50% |
43,391 |
42,603 |
788 |
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