पड़ोसी देश पाकिस्तान इस वक्त अपने इतिहास के सबसे भीषण आर्थिक और ऊर्जा संकट (Pakistan Economic Crisis 2026) से जूझ रहा है। आलम यह है कि देश अब केवल महंगाई की मार नहीं झेल रहा, बल्कि पूरी तरह सिस्टम फेलियर की कगार पर खड़ा है। 27 मार्च की शाम तक के हालात बताते हैं कि पाकिस्तान के पास अब अपनी अर्थव्यवस्था चलाने के लिए तेल और विदेशी मुद्रा, दोनों ही खत्म होने को हैं।
बचाने की जद्दोजहद: 4 दिन काम, ऑनलाइन स्कूल
ईंधन और बिजली बचाने के लिए सरकार ने स्मार्ट लॉकडाउन और वर्किंग डेज में कटौती का सहारा लिया है। सरकारी दफ्तरों के लिए हफ्ते में केवल 4 दिन काम करने का प्रस्ताव मंजूर किया जा रहा है। वहीं ईंधन बचाने और ट्रैफिक कम करने के लिए बड़े शहरों के स्कूलों को ऑनलाइन मोड पर शिफ्ट करने का आदेश दिया गया है। मंत्रियों और बड़े नौकरशाहों के मुफ्त तेल कोटे में तत्काल प्रभाव से 50% की कटौती लागू कर दी गई है।
पेट्रोल पंपों पर सन्नाटा और रिकॉर्ड कीमतें
27 मार्च की रिपोर्ट के अनुसार, लाहौर और कराची जैसे प्रमुख शहरों के 40% पेट्रोल पंपों पर तेल खत्म हो चुका है। पिछले 10 दिनों में पेट्रोल की कीमतों में 62 रुपये प्रति लीटर की ऐतिहासिक वृद्धि की गई है, जिससे आम आदमी का जीना मुहाल हो गया है।
केवल 11 दिनों का तेल भंडार (Strategic Reserves)
हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी युद्ध और ब्रेंट क्रूड के 112 डॉलर के पार पहुँचने से पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ गई हैं। विदेशी मुद्रा भंडार की कमी के कारण पाकिस्तान नए तेल कार्गो बुक नहीं कर पा रहा है। देश के पास अब केवल 11 दिनों का रणनीतिक तेल भंडार बचा है।
उद्योग और खेती बेहाल
पाकिस्तान की आर्थिक रीढ़ माने जाने वाले दोनों क्षेत्र वेंटिलेटर पर हैं। बिजली की कमी और कच्चे माल के आयात पर पाबंदी से मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट 18% तक गिर गया है। वहीं किसानों पर भी दोहरी मार पड़ी है। गेहूं की कटाई के सीजन में डीजल की भारी कमी और खाद की कीमतों में 300% की बढ़ोतरी ने पंजाब के किसानों की कमर तोड़ दी है।










