सोचिए, आप सुबह उठकर अपनी दिनचर्या शुरू ही कर रहे हों और सुबह 6 बजे आपके फोन पर एक ईमेल आए – “भारी मन से सूचित करना पड़ रहा है कि आज आपकी नौकरी का आखिरी दिन है.”
आईटी और टेक जायंट ओरैकल (Oracle) के कई कर्मचारियों के साथ हाल ही में कुछ ऐसा ही हुआ. बिना किसी पूर्व चेतावनी के दर्जनों कर्मचारियों के एक्सेस बंद कर दिए गए और उनसे उनका पर्सनल ईमेल एड्रेस मांग लिया गया ताकि सेवरेंस यानी छंटनी का मुआवजा के कागजात भेजे जा सकें.
लेकिन सवाल यह है कि आखिर ओरैकल जैसी दिग्गज टेक कंपनी में अचानक यह सब क्यों हो रहा है? और क्या इसके पीछे सिर्फ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का हाथ है या कहानी कुछ और है? आइए समझते हैं.
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AI का भारी भरकम खर्च और तंग बजट
ओरैकल इस समय एआई डेटा सेंटर्स और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने पर अंधाधुंध पैसा पानी की तरह बहा रही है. वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में ही ओरैकल ने 28.5 बिलियन डॉलर कैपिटल एक्सपेंडिचर पर खर्च किए हैं, जो पिछले साल इसी दौरान केवल 8.5 बिलियन डॉलर थे. ओरैकल का लक्ष्य इस साल एआई पर 90 से 95 बिलियन डॉलर खर्च करने का है.
हालांकि, कंपनी को एआई के नए कॉन्ट्रैक्ट्स मिल तो रहे हैं, लेकिन भारी पूंजी लगाने की वजह से उसका फ्री कैश फ्लो नेगेटिव (5.4 बिलियन डॉलर) चला गया है. आसान भाषा में कहें तो एआई की दौड़ में आगे रहने के लिए कंपनी को पैसों की जरूरत है और इसकी भरपाई कर्मचारियों की छंटनी और लागत में कटौती (Cost Cutting) के जरिए की जा रही है.
21000 लोग पहले ही निकाल दिए गए
यह कोई एक दिन की बात नहीं है. वित्त वर्ष 2026 में ओरैकल ने अपने कुल वर्कफोर्स का 13 फीसदी हिस्सा करीब 21000 कर्मचारी कम कर दिया. मई के अंत में कंपनी के पास 1.41 लाख कर्मचारी ही बचे थे. कंपनी का मानना है कि एआई और ऑटोमेशन के आने से कई भूमिकाएं अब बेफिजूल हो गई हैं.
सिर्फ ओरैकल नहीं, पूरी आईटी इंडस्ट्री का यही हाल
अगर आपको लगता है कि सिर्फ ओरैकल ही ऐसा कर रही है, तो आप गलत हैं. Layoffs.fyi के आंकड़ों के मुताबिक अकेले सितंबर के शुरुआती 10 दिनों में ही 6000 से ज्यादा टेक नौकरियां चली गईं, जिनमें Uber, PayPal, Apple, Zomato शामिल हैं. साल 2026 में 10 सितंबर तक 299 कंपनियों के 128,536 टेक एम्प्लॉइज को नौकरी से निकाला जा चुका है.
गोलडमैन सैक्स की मानें तो एआई के चलते सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, कस्टमर सर्विस और एडमिनिस्ट्रेटिव जॉब्स पर सबसे ज्यादा खतरा मंडरा रहा है.
क्या वाकई एआई इंसानों की नौकरी खा रहा है?
एक्सपेर्ट्स का कहना है कि मामला सिर्फ इंसान को एआई से रिप्लेस करने का नहीं है. इस छंटनी में केवल एक-चौथाई से एक-तिहाई हिस्सा ही एआई और ऑटोमेशन के कारण है. बाकी का बड़ा हिस्सा कंपनियों के बजट को रीसेट करना (Cost Reset) और टीम स्ट्रक्चर को फिर से व्यवस्थित करना है. कंपनियां एआई के दौर का फायदा उठाकर अपनी गैर-जरूरी लागत कम कर रही हैं.
गार्टनर (Gartner) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जो कंपनियां सिर्फ कर्मचारियों को निकालकर पैसे बचा रही हैं, वे लंबे समय में पिछड़ सकती हैं. असली फायदा उन्हीं कंपनियों को होगा जो एआई की बचत को अपने कर्मचारियों की स्किलिंग और इनोवेशन में दोबारा इन्वेस्ट करेंगी.
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