Daily, Weekly या Monthly SIP: जानिए किस SIP में बनेगा ज्यादा पैसा? 30 साल की स्टडी से खुलासा

Daily SIP vs Monthly SIP: क्या रोज SIP करने से ज्यादा रिटर्न मिलता है? जानिए वाइटओक कैपिटल की 30 साल की रिसर्च और एसआईपी से जुड़ी पूरी सच्चाई आसान भाषा में.

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Daily, Weekly या Monthly SIP: जानिए किसमें बनेगा सबसे ज्यादा पैसा?

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म्यूचुअल फंड में एसआईपी (SIP) शुरू करते समय लगभग हर निवेशक के मन में यह सवाल जरूर आता है- क्या मुझे रोज (Daily SIP) थोड़ा-थोड़ा पैसा लगाना चाहिए या महीने में एक बार (Monthly SIP) निवेश करना बेहतर रहेगा? बहुत से लोगों को लगता है कि रोज पैसे लगाने से बाजार के उतार-चढ़ाव (Volatility) का ज्यादा फायदा मिलेगा और रिटर्न भी भारी-भरकम बनेगा. इसी वजह से आजकल Daily SIP का ट्रेंड काफी बढ़ गया है.

लेकिन ठहरिए! एक नई स्टडी ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि असलियत क्या है.

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30 साल की स्टडी में खुला चौंकाने वाला राज!

वाइटओक कैपिटल (WhiteOak Capital) म्यूचुअल फंड ने बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) के पिछले 30 सालों (अगस्त 1996 से जून 2026) के आंकड़ों का विश्लेषण किया. इसमें उन्होंने देखा कि अगर कोई व्यक्ति बराबर रकम को रोज, हर हफ्ते या हर महीने SIP के जरिए लगाता, तो 30 साल बाद उसके पास कितना पैसा बनता.

नतीजे बेहद हैरान करने वाले थे:

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Daily और Weekly SIP: 30 साल में कुल फंड बढ़कर लगभग 12.33 करोड़ रुपये हुआ.

Monthly SIP: 30 साल में कुल फंड बढ़कर लगभग 12.45 करोड़ रुपये हुआ.

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वार्षिक रिटर्न (XIRR): तीनों ही तरीकों में रिटर्न बिल्कुल बराबर यानी 13.47% रहा.

इसका सीधा मतलब ये है क‍ि रोज-रोज SIP करने से 30 साल में कोई जादू नहीं हो जाता. महीने में एक बार SIP करने वाले ने भी उतना ही (बल्कि थोड़ा सा ज्यादा) पैसा बनाया!

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ऐसा क्यों होता है?
सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है क्योंकि रोज पैसा लगाने से तो अलग-अलग कीमतों पर यूनिट्स (Cost Averaging) मिलती हैं. लेकिन लंबी अवधि (10, 20 या 30 साल) में शेयर बाजार का रुझान हमेशा ऊपर की तरफ ही होता है. इसलिए लंबे समय के निवेश में इस बात से कोई खास फर्क नहीं पड़ता कि आप महीने की 1 तारीख को पैसा लगा रहे हैं या रोज थोड़ा-थोड़ा.

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तो आपको कौन सी SIP चुननी चाहिए?
स्टडी का सबसे बड़ा संदेश यह है कि आप कब और कितनी बार निवेश करते हैं, उससे फर्क नहीं पड़ता. फर्क इस बात से पड़ता है कि आप कितने नियम से (Regularly) निवेश करते हैं.अगर आप सैलरी वाले लोग (Salaried Class) है तो आपके लिए Monthly SIP सबसे बेस्ट है. जैसे ही महीने की शुरुआत में सैलरी आए, ऑटो-डेबिट के जरिए SIP कट जाए.

अगर बिजनेसमैन या फ्रीलांसर्स हैं, जिनकी कमाई रोज या हफ्ते के हिसाब से होती है, तो वे अपने हिसाब से Daily या Weekly SIP चुन सकते हैं.

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अमीर बनने का असली फॉर्मूला क्या है?
SIP की तारीख या फ्रीक्वेंसी की चिंता छोड़कर इन 4 बातों पर ध्यान दें:

  1. जितनी जल्दी हो सके निवेश शुरू करें: देर करने से कंपाउंडिंग का फायदा कम मिलता है.
  2. बाजार गिरे तो SIP बंद न करें: गिरावट के समय ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं.
  3. सैलरी बढ़ते ही SIP की रकम बढ़ाएं: हर साल अपनी SIP में 5-10% का इजाफा जरूर करें.
  4. लंबे समय तक बने रहें: धैर्य ही बाजार में असली दौलत बनाता है.

निवेश में फ्रीक्वेंसी (Frequency) नहीं, बल्कि अनुशासन (Consistency) मायने रखता है. रोज एसआईपी करने का तनाव लेने के बजाय अपनी सहूलियत के हिसाब से Monthly SIP चुनें और शांति से अपने पैसे को कंपाउंड होने दें.

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लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Vandana Bharti

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.
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