सरकार का सीक्रेट मिशन! 31500 करोड़ रुपये में बिकी LIC की हिस्सेदारी, जानिए पर्दे के पीछे की पूरी कहानी

LIC Share Sale Details: सरकार ने बिना किसी पूर्व सूचना के LIC की 6.5% हिस्सेदारी 31,500 करोड़ रुपये में कैसे बेची? जानिए इस सीक्रेट मिशन और बैंकरों के रोल की पूरी कहानी.

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सरकार का सीक्रेट मिशन! 31500 करोड़ रुपये में बिकी LIC की हिस्सेदारी, जानिए पर्दे के पीछे की पूरी कहानी

सोचिए, एक बैंकर को बिना वजह बताए अचानक दिल्ली के सरकारी दफ्तर में बुलाया जाता है. वहां पहुंचते ही उससे कहा जाता है- “आज शाम को ही एलआईसी (LIC) की 31,500 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी बेची जा रही है, तुरंत फॉर्मेलिटी पूरी करो!”

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जी हां, भारत के इतिहास में सेकेंडरी मार्केट के सबसे बड़े शेयर सेल (OFS) को इतने गुप्त तरीके से अंजाम दिया गया कि एडवाइजरी देने वाले बैंकों और मार्केट के बड़े-बड़े ट्रेडर्स को भी इसकी भनक आखिरी समय तक नहीं लगी. आइए, जानते हैं कि सरकार ने LIC के शेयर बेचने में इतना सस्पेंस क्यों रखा और यह सीक्रेट प्लान कैसे कामयाब हुआ.

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इतनी गोपनीयता (Secrecy) क्यों रखी गई?

सरकार के दीपम (DIPAM) विभाग ने इस बिक्री की खबर को बेहद गुप्त रखा. इसके पीछे सबसे बड़ा कारण था:

ट्रेडर्स का खेल रोकना: अगर शेयर बाजार में पहले से पता चल जाता कि सरकार LIC के इतने सारे शेयर एक साथ बेचने वाली है, तो ट्रेडर्स शेयर का भाव गिराने के लिए दांव लगाना शुरू कर देते (Short Selling).

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अचानक सरप्राइज देना: बाजार को लग रहा था कि LIC के तिमाही नतीजों के बाद ही शेयर बेचे जाएंगे. लेकिन सरकार ने नतीजों से पहले ही सेल लॉन्च करके सबको चौंका दिया.

बैंकरों ने मुफ्त (Free) में किया इतना बड़ा काम!
इस डील की सबसे अनोखी बात यह रही कि सरकार को सलाह दे रहे 4 बड़े इन्वेस्टमेंट बैंकों ने इस 31500 करोड़ रुपये की डील के लिए एक भी रुपया फीस नहीं ली.

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क्यों किया ऐसा? दरअसल, एक बैंक ने बिना फीस के काम करने का ऑफर दिया, जिसके बाद बाकी बैंकों को भी बिना फीस काम करना पड़ा. हालांकि, इतने बड़े सरकारी सौदे से जुड़ने पर बैंकों को रैंकिंग और मार्केट में साख का बड़ा फायदा मिलता है.

2.5% से 6.5% कैसे हो गई हिस्सेदारी?
सरकार ने बहुत समझदारी से अपना दांव खेला. सरकार ने पहले सिर्फ 2.5% हिस्सेदारी बेचने का ऑफर रखा. जैसे ही बड़े संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) ने इसमें बढ़-चढ़कर पैसा लगाया, सरकार ने अतिरिक्त 4% हिस्सेदारी बेचने का ऑप्शन भी चुन लिया. कुल मिलाकर सरकार ने पूरे 6.5% शेयर बेचकर 31,500 करोड़ रुपये जुटा लिए.

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SEBI का बड़ा नियम हुआ पूरा
इस शेयर बिक्री के साथ ही LIC के लिए एक बड़ा कानूनी रास्ता साफ हो गया है. अब LIC में जनता (Public) की हिस्सेदारी 10% तक पहुंच गई है. इससे सेबी (SEBI) का मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग नियम मई 2027 की डेडलाइन से बहुत पहले ही पूरा हो गया.

बिना किसी शोर-शराबे के, सटीक टाइमिंग और मास्टर प्लान के साथ सरकार ने देश की सबसे बड़ी शेयर सेल को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया. जब तक शेयर बाजार को खबर हुई, तब तक 31500 करोड़ रुपये की यह मेगा डील पटरी पर दौड़ चुकी थी.

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लेखक के बारे में

Vandana Bharti

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.
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