Rupee Vs Dollar: रुपये में ऐतिहासिक गिरावट, डॉलर के मुकाबले ₹96.60 के ऑल-टाइम लो पर पहुंचा रुपया, जानिए कारण

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया रिकॉर्ड तोड़ ₹96.60 के निचले स्तर पर फिसल गया है। जानिए कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों (FPI) की बिकवाली और मजबूत डॉलर समेत वे 3 बड़े कारण जो रुपये को नीचे खींच रहे हैं।

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भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार से इस वक्त की एक बेहद महत्वपूर्ण और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। वैश्विक बाजारों में जारी उथल-पुथल के बीच अमेरिकी डॉलर (US Dollar) के सामने भारतीय रुपया (Indian Rupee) पूरी तरह पस्त नजर आ रहा है। ताजा कारोबारी सत्र में भारतीय रुपया इतिहास के सबसे निचले स्तर यानी रिकॉर्ड तोड़ ₹96.60 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। इस भारी गिरावट के चलते रुपया साल 2026 में अब तक एशिया का सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला करेंसी (Worst-performing Currency) बन गया है।

क्‍यों ग‍िर रहा है रुपया?

आइए बेहद आसान भाषा में समझते हैं कि अचानक रुपये की सेहत इतनी क्यों बिगड़ गई और इसके पीछे कौन से 3 मुख्य कारण जिम्मेदार हैं।

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वजह 1: पश्चिम एशिया (मिड-ईस्ट) संकट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें


रुपये की इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में जारी तनाव (Iran Conflict) है। इस तनाव की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल (Crude Oil) लंबे समय से $100 प्रति बैरल के पार बना हुआ है (जो हाल ही में $110 तक भी गया था)। दूसरी ओर भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। जब तेल महंगा होता है, तो भारतीय तेल कंपनियों को भुगतान करने के लिए बहुत ज्यादा मात्रा में अमेरिकी डॉलर खरीदने पड़ते हैं। बाजार में डॉलर की मांग बहुत ज्यादा बढ़ने से रुपया लगातार कमजोर होता चला गया।

वजह 2: विदेशी निवेशकों की भारी मुनाफावसूली (FPI Outflows)
भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) का लगातार पैसा निकालना रुपये पर भारी पड़ रहा है। वैश्विक अनिश्चितता को देखते हुए विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से अपना निवेश निकालकर वापस अमेरिका या सुरक्षित ठिकानों पर ले जा रहे हैं। साल 2026 में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय इक्विटी मार्केट से करीब $23.2 बिलियन (अरब) से ज्यादा निकाल चुके हैं, जो पिछले पूरे साल के मुकाबले काफी अधिक है। जब विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकालते हैं, तो वे रुपयों को डॉलर में बदलकर ले जाते हैं, जिससे रुपये की वैल्यू गिरती है।

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वजह 3: मजबूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ता व्यापार घाटा (Trade Deficit)

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दुनिया भर में चल रहे युद्ध और भू-राजनीतिक संकट के कारण निवेशक दुनिया की सबसे सुरक्षित करेंसी यानी अमेरिकी डॉलर को खरीदकर अपने पास रख रहे हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) के सख्त रुख और मजबूत अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों की वजह से डॉलर इंडेक्स इस समय अपने शिखर पर है। कच्चे तेल के साथ-साथ भारत में सोने (Gold) का आयात भी तेजी से बढ़ा है। एक्सपोर्ट (निर्यात) कम होने और इम्पोर्ट (आयात) बढ़ने से भारत का व्यापार घाटा चौड़ा हो गया है। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि बाहरी दबावों के कारण इस साल भारत का भुगतान संतुलन (Balance of Payments) $65 से $70 बिलियन के घाटे में जा सकता है।

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आम जनता और अर्थव्यवस्था पर क्या होगा इसका असर?
जब रुपया कमजोर होता है, तो विदेशों से आयात होने वाली हर चीज महंगी हो जाती है। इसके चलते आने वाले दिनों मेंइलेक्ट्रॉनिक्स (मोबाइल, लैपटॉप), कच्चा तेल और विदेशी गाड़ियां महंगी हो सकती हैं। इसके अलावा विदेशों में पढ़ाई करना या घूमना काफी खर्चीला हो जाएगा।

हालांकि, जो भारतीय कंपनियां विदेशों में अपनी सेवाएं निर्यात करती हैं (जैसे आईटी और सॉफ्टवेयर सेक्टर्स) या विदेशों से भारत पैसे भेजने वाले प्रवासी भारतीयों (Remittances) को इस स्थिति से फायदा होता है।

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लेखक के बारे में

Vandana Bharti

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.
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