Property Transfer Rules After Death: बिना वसीयत पिता की मृत्यु? ऐसे कराएं संपत्ति अपने नाम

Property Transfer Rules After Death: प‍िता का अचानक देहांत हो गया हो और उन्‍होंने वसीयत भी नहीं बनाई हो, तो ऐसी स्‍थ‍ित‍ि में बेटा अपने प‍िता की प्रॉपर्टी को अपने नाम कैसे करा सकता है? लीगल न‍ियम से लेकर पूरी प्रक्रिया, यहां जानें.

Property Transfer Rules After Death Legal Heir Mutation

अगर आपके परिवार में भी किसी सदस्य के नाम कोई संपत्ति है, तो उनके जाने के बाद कागजी कार्रवाई में देरी न करें. शुरुआत में ही कानूनी सलाह लेकर इसे अपने नाम दर्ज करा लें. अगर आपके नाम कोई संपत्ति है, तो भविष्य में अपने परिवार को किसी भी तरह की परेशानी से बचाने के लिए एक रजिस्टर्ड वसीयत जरूर बनवाकर रखें.

Property Transfer Rules : परिवार में किसी सदस्य का चले जाना एक गहरा सदमा देता है. खास तौर से अगर प‍िता का देहांत हो जाए, तो ऐसा लगता है क‍ि दुखों का पहाड़ ही टूट पड़ा है. लेकिन उनके जाने के बाद अक्सर उनके नाम की जमीन, मकान या प्रॉपर्टी को कानूनी तौर पर वारिसों के नाम ट्रांसफर कराने की लंबी प्रक्रिया सामने खड़ी हो जाती है. कई लोग डर या जानकारी न होने की वजह से सालों तक जमीन मृतक के नाम पर ही छोड़ देते हैं. इससे आगे चलकर परिवार में ही कानूनी विवाद शुरू हो जाते हैं.

विज्ञापन

अगर आप आसान तरीका समझ लें, तो प्रॉपर्टी अपने नाम कराना ज्यादा मुश्किल काम नहीं है. आइए समझते हैं कि वसीयत (Will) होने और न होने पर यह काम कैसे होता है.

विज्ञापन

अगर मृतक ने वसीयत (Will) छोड़ी है

स‍िव‍िल और प्रॉपर्टी वकील रेणु अग्रवाल ने News 24 को बताया क‍ि सबसे पहले आप ये समझें क‍ि अगर आपके परिवार के सदस्य ने अपनी जिंदगी में ही एक कानूनी और रजिस्टर्ड वसीयत बनवा दी थी, जिसमें लिखा है कि उनके बाद संपत्ति किसे मिलेगी, तो प्रक्रिया थोड़ी आसान हो जाती है. वसीयत मिलने के बाद आपको सबसे पहले कोर्ट जाकर प्रोबेट लेना होता है. प्रोबेट कोर्ट का एक आदेश होता है, जो यह साबित करता है कि वसीयत पूरी तरह सही है और इसमें लिखे निर्देशों के अनुसार ही संपत्ति का बंटवारा किया जाए. कोर्ट के आदेश के बाद प्रॉपर्टी आसानी से वसीयत में तय किए गए व्यक्ति के नाम पर ट्रांसफर हो जाती है.

विज्ञापन

अगर कोई वसीयत (Will) नहीं बनाई गई है
अगर प्रॉपर्टी के मालिक ने कोई वसीयत नहीं लिखी थी, तो कानून के हिसाब से संपत्ति परिवार के कानूनी वारिसों (Legal Heirs) में बराबर बांटी जाती है. हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम (Hindu Succession Act) के तहत पहली पसंद (Class-I Heirs) में पत्‍नी, बच्चे और मां आती हैं. इन सभी का संपत्ति पर बराबर का हक होता है. इसके लिए सबसे पहले आपको अपने स्थानीय तहसील या राजस्व दफ्तर (Tehsildar Office) से लीगल हीयर सर्टिफिकेट यानी कानूनी वारिस प्रमाण पत्र बनवाना होगा.

अगर बाकी वारिस अपने हिस्से की जमीन या मकान किसी एक व्यक्ति के नाम करना चाहते हैं, तो उन्हें हक त्याग पत्र पर दस्तखत करने होंगे और रजिस्ट्रार दफ्तर में जाकर इसे जमा करना होगा.

विज्ञापन

म्यूटेशन (Mutation / नामांतरण) क्यों जरूरी है?
प्रॉपर्टी का कब्जा मिलने के बाद सबसे जरूरी काम होता है म्यूटेशन (दाखिल-खारिज या नामांतरण) कराना. म्यूटेशन का मतलब है कि नगर निगम या तहसील के सरकारी कागजों में पुरानी मालिक का नाम हटाकर आपका नाम नए मालिक के रूप में दर्ज कराना. इसके लिए आप अपनी स्थानीय तहसील या नगर निगम दफ्तर में अर्जी दे सकते हैं. इसके साथ में पुराना बिक्री पत्र (Sale Deed), संपत्ति कर (Property Tax) की रसीदें और अपने पहचान पत्र लगाने होते हैं.

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Vandana Bharti

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.
... और पढ़ें
विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ