Property Transfer Rules : परिवार में किसी सदस्य का चले जाना एक गहरा सदमा देता है. खास तौर से अगर पिता का देहांत हो जाए, तो ऐसा लगता है कि दुखों का पहाड़ ही टूट पड़ा है. लेकिन उनके जाने के बाद अक्सर उनके नाम की जमीन, मकान या प्रॉपर्टी को कानूनी तौर पर वारिसों के नाम ट्रांसफर कराने की लंबी प्रक्रिया सामने खड़ी हो जाती है. कई लोग डर या जानकारी न होने की वजह से सालों तक जमीन मृतक के नाम पर ही छोड़ देते हैं. इससे आगे चलकर परिवार में ही कानूनी विवाद शुरू हो जाते हैं.
अगर आप आसान तरीका समझ लें, तो प्रॉपर्टी अपने नाम कराना ज्यादा मुश्किल काम नहीं है. आइए समझते हैं कि वसीयत (Will) होने और न होने पर यह काम कैसे होता है.
अगर मृतक ने वसीयत (Will) छोड़ी है
सिविल और प्रॉपर्टी वकील रेणु अग्रवाल ने News 24 को बताया कि सबसे पहले आप ये समझें कि अगर आपके परिवार के सदस्य ने अपनी जिंदगी में ही एक कानूनी और रजिस्टर्ड वसीयत बनवा दी थी, जिसमें लिखा है कि उनके बाद संपत्ति किसे मिलेगी, तो प्रक्रिया थोड़ी आसान हो जाती है. वसीयत मिलने के बाद आपको सबसे पहले कोर्ट जाकर प्रोबेट लेना होता है. प्रोबेट कोर्ट का एक आदेश होता है, जो यह साबित करता है कि वसीयत पूरी तरह सही है और इसमें लिखे निर्देशों के अनुसार ही संपत्ति का बंटवारा किया जाए. कोर्ट के आदेश के बाद प्रॉपर्टी आसानी से वसीयत में तय किए गए व्यक्ति के नाम पर ट्रांसफर हो जाती है.
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अगर कोई वसीयत (Will) नहीं बनाई गई है
अगर प्रॉपर्टी के मालिक ने कोई वसीयत नहीं लिखी थी, तो कानून के हिसाब से संपत्ति परिवार के कानूनी वारिसों (Legal Heirs) में बराबर बांटी जाती है. हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम (Hindu Succession Act) के तहत पहली पसंद (Class-I Heirs) में पत्नी, बच्चे और मां आती हैं. इन सभी का संपत्ति पर बराबर का हक होता है. इसके लिए सबसे पहले आपको अपने स्थानीय तहसील या राजस्व दफ्तर (Tehsildar Office) से लीगल हीयर सर्टिफिकेट यानी कानूनी वारिस प्रमाण पत्र बनवाना होगा.
अगर बाकी वारिस अपने हिस्से की जमीन या मकान किसी एक व्यक्ति के नाम करना चाहते हैं, तो उन्हें हक त्याग पत्र पर दस्तखत करने होंगे और रजिस्ट्रार दफ्तर में जाकर इसे जमा करना होगा.
म्यूटेशन (Mutation / नामांतरण) क्यों जरूरी है?
प्रॉपर्टी का कब्जा मिलने के बाद सबसे जरूरी काम होता है म्यूटेशन (दाखिल-खारिज या नामांतरण) कराना. म्यूटेशन का मतलब है कि नगर निगम या तहसील के सरकारी कागजों में पुरानी मालिक का नाम हटाकर आपका नाम नए मालिक के रूप में दर्ज कराना. इसके लिए आप अपनी स्थानीय तहसील या नगर निगम दफ्तर में अर्जी दे सकते हैं. इसके साथ में पुराना बिक्री पत्र (Sale Deed), संपत्ति कर (Property Tax) की रसीदें और अपने पहचान पत्र लगाने होते हैं.