ईरान-अमेरिका युद्ध लंबा चला तो भारतीय अर्थव्यवस्था को क‍ितना होगा नुकसान

अगर युद्ध लंबा चला, तो सरकार को राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) बढ़ने और विकास दर (GDP Growth) घटने की चुनौती का सामना करना पड़ेगा।

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ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब सिर्फ दो देशों की जंग नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरी दुनिया और खासकर भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्था के लिए एक आर्थिक सुनामी का संकेत दे रहा है। अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो भारतीय अर्थव्यवस्था को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत पर इसके 4 सबसे घातक असर पड़ सकते हैं:

कच्चे तेल में आग और महंगाई का विस्फोट

भारत अपनी जरूरत का 85% कच्चा तेल आयात करता है। युद्ध लंबा चलने से वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बाधित होगी। यदि कच्चा तेल $110-$120 प्रति बैरल के पार जाता है, तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी। परिवहन महंगा होने से फल, सब्जियां और रोजमर्रा की हर चीज महंगी हो जाएगी, जिससे आम आदमी की थाली पर सीधा प्रहार होगा।

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रुपया होगा पस्त, व्यापार घाटा होगा मस्त
जब कच्चा तेल महंगा होता है, तो भारत को उसे खरीदने के लिए ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। इससे डॉलर की मांग बढ़ेगी और भारतीय रुपया (INR) रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिर सकता है। रुपया कमजोर होने से मोबाइल, लैपटॉप और अन्य विदेशी सामान भी महंगे हो जाएंगे। भारत का चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) बढ़ने से देश की क्रेडिट रेटिंग पर बुरा असर पड़ सकता है।

शेयर बाजार में खून-खराबा
शेयर बाजार अनिश्चितता से नफरत करता है। युद्ध की खबरें विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) को डराती हैं। विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से अपना पैसा निकालकर सुरक्षित ठिकानों (जैसे सोना या अमेरिकी ट्रेजरी) में ले जाएंगे। सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट आएगी, जिससे आम निवेशकों की मेहनत की कमाई डूब सकती है। आज (14 अप्रैल) की गिरावट इसी का एक ट्रेलर है।

सप्लाई चेन का संकट और एक्सपोर्ट को झटका
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का मतलब है, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बाधा। दुनिया का एक-तिहाई समुद्री तेल व्यापार इसी रास्ते से होता है। अगर यह रास्ता बंद या असुरक्षित होता है, तो भारत के लिए माल भेजना (Export) और मंगवाना (Import) दोनों महंगा और समय लेने वाला हो जाएगा। भारत के चाय, बासमती चावल और फार्मास्यूटिकल एक्सपोर्ट को भारी नुकसान पहुंचेगा।

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अगर युद्ध लंबा चला, तो सरकार को राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) बढ़ने और विकास दर (GDP Growth) घटने की चुनौती का सामना करना पड़ेगा। वर्तमान परिस्थितियों में भारत को अपने सामरिक तेल भंडार (Strategic Petroleum Reserves) और वैकल्पिक व्यापार मार्गों पर गंभीरता से विचार करना होगा।

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लेखक के बारे में

Vandana Bharti

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.
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