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US Congressman Lance Gooden: अमेरिका से गौतम अदाणी मामले को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। रिपब्लिकन सांसद लैंस गुडेन ने भारतीय अरबपति कारोबारी गौतम अदाणी की गतिविधियों की जांच करने के बाइडेन प्रशासन के फैसले को चुनौती दी है। उन्होंने कहा है कि इस तरह की चयनात्मक कार्रवाइयों से भारत जैसे प्रमुख सहयोगी देशों के साथ गठबंधन कमजोर हो सकते हैं।
रिपब्लिकन सांसद लैंस गुडेन ने अमेरिकी अटॉर्नी जनरल मेरिक गारलैंड को 7 जनवरी 2025 को लिखे पत्र में पूछा है कि अगर भारत प्रत्यर्पण अनुरोध का पालन करने से इनकार कर देता है तो अमेरिका क्या करेगा? गुडेन ने अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा विदेशी इकाइयों के विरुद्ध चयनित अभियोजन के बारे में भी जवाब मांगा है।
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सांसद लैंस गुडेन का कहना है कि इस तरह की कार्रवाइयों से अमेरिका के वैश्विक गठबंधनों और आर्थिक वृद्धि को होने वाले संभावित नुकसान का आकलन किया जाना चाहिए। उन्होंने पत्र में यह भी पूछा कि क्या इस पूरे मामले का जॉर्ज सोरोस से कोई संबंध है। गुडेन ने सात जनवरी को अपने पत्र में आगे लिखा है, न्याय विभाग की चयनित कार्रवाइयों से एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका के सबसे मजबूत सहयोगियों में से एक भारत जैसे प्रमुख साझेदारों के साथ महत्वपूर्ण गठबंधनों को नुकसान पहुंचने का खतरा है।
लैंस गुडेन ने यह भी कहा कि न्याय विभाग को चाहिए कि वह विदेशियों को लेकर फैलने वाली अफवाहों पर ध्यान देने के बजाए ऐसे स्थानीय लोगों पर कार्रवाई करे, जिनसे अमेरिका को खतरा है। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्रवाइयां उन इकाइयों को निशाना बनाती हैं, जो अमेरिका में अरबों डॉलर का निवेश करती हैं और हजारों नौकरियां पैदा करती हैं। इससे केवल अमेरिका को ही नुकसान है।
उन्होंने कहा कि जब अमेरिका हिंसक अपराध, आर्थिक जासूसी और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) से उत्पन्न खतरों की अनदेखी करता है, तो वह निवेशकों को अमेरिका में निवेश करने से हतोत्साहित करता है। लैंस गुडेन ने कहा कि देशवासियों को उम्मीद है कि डोनाल्ड ट्रंप के शासन में हालात बदलेंगे।
अमेरिकी सांसद ने कहा कि कथित रिश्वतखोरी से अमेरिकी पक्ष का सीधा कोई संबंध नहीं था। यदि संबंध था, तो न्याय विभाग ने एक भी अमेरिकी पर आरोप क्यों नहीं लगाया। उन्होंने आगे कहा कि न्याय विभाग ने गौतम अदाणी के खिलाफ यह मामला क्यों चलाया, जबकि कथित रिश्वतखोरी का मामला भारत का है?
रिपब्लिकन सांसद लैंस गुडेन ने पत्र में पूछा है कि क्या न्याय विभाग इस मामले में शामिल भारतीय अधिकारियों के प्रत्यर्पण की मांग करेगा? अगर भारत प्रत्यर्पण अनुरोध का पालन करने से इनकार कर देता है और न्याय विभाग की क्या रणनीति होगी? बता दें कि अमेरिकी अभियोजकों ने आरोप लगाया था कि अदाणी समूह प्रबंधन ने सौर ऊर्जा अनुबंध के संबंध में भारतीय अधिकारियों को रिश्वत दी थी। हालांकि, अडानी समूह ने इन आरोपों से इनकार किया था।
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