फॉरेन इन्वेस्टर्स को मोदी सरकार का बड़ा तोहफा! गवर्नमेंट बॉन्ड्स पर कैपिटल गेन्स टैक्स पूरी तरह खत्म; रुपये को मिलेगी मजबूती

FPI Tax Relief 2026: कैबिनेट ने सरकारी बॉन्ड्स (G-Secs) पर FPIs के लिए कैपिटल गेन्स टैक्स हटाने के अध्यादेश को दी मंजूरी। विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने की बड़ी कोशिश।

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ईरान युद्ध और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों (High Crude Oil Prices) के कारण पैदा हुए वैश्विक आर्थिक संकट के बीच केंद्र सरकार ने विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए एक बेहद ऐतिहासिक और बड़ा फैसला लिया है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने भारतीय सरकारी बॉन्ड्स (Government Bonds / G-Secs) में निवेश पर लगने वाले कैपिटल गेन्स टैक्स (Capital Gains Tax) को पूरी तरह से हटाने का फैसला किया है।

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इंडिया टुडे को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य देश में विदेशी पूंजी के प्रवाह (Capital Inflows) को बढ़ाना, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होते रुपये को संभालना और पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) के संकट से भारतीय अर्थव्यवस्था को सुरक्षा कवच देना है।

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अध्यादेश (Ordinance) को मंजूरी, राष्ट्रपति की मुहर के बाद होगा लागू

केंद्रीय कैबिनेट ने इस बदलाव को तुरंत प्रभावी बनाने के लिए आयकर अधिनियम (Income Tax Act) में संशोधन के अध्यादेश को भी मंजूरी दे दी है। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर (Assent) मिलते ही यह नया नियम देश में लागू हो जाएगा। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारत रिकॉर्ड विदेशी फंड आउटफ्लो (पूंजी का बाहर जाना), रुपये पर दबाव और बढ़ती ऊर्जा लागत जैसी चौतरफा चुनौतियों का सामना कर रहा है।

विदेशी निवेशकों के लिए अब क्या बदलेगा?

लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स (LTCG): 12 महीने से अधिक समय तक होल्ड किए गए बॉन्ड्स पर 12.5% लगता है, ज‍िसे अब 0% (पूरी तरह खत्म) खत्‍म कर द‍िया गया है।
इंटरेस्ट इनकम पर टैक्स (Withholding Tax) : सरकारी प्रतिभूतियों से अर्जित ब्याज पर 20% लगता है, सरकार इस टैक्स के बोझ को भी कम करने पर विचार कर रही है।

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बता दें क‍ि साल 2023 में विदेशी निवेशकों को मिलने वाली 5% की रियायती टैक्स दर को वापस ले लिया गया था, जिसके बाद से उन पर 20% का विदहोल्डिंग टैक्स लग रहा है। बाजार विशेषज्ञों का लंबे समय से मानना था कि इस कड़े टैक्स स्ट्रक्चर के कारण अन्य उभरते बाजारों (Emerging Markets) की तुलना में भारत के सरकारी बॉन्ड्स कम आकर्षक रह गए थे।

क्यों जरूरी था यह फैसला? 2026 में विदेशी निवेशकों ने बेचे ₹2.5 लाख करोड़ के शेयर

भारतीय शेयर बाजार (Equity Market) के लिए साल 2026 विदेशी फंड्स की निकासी के लिहाज से इतिहास के सबसे खराब सालों में से एक साबित हो रहा है।

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₹2.5 लाख करोड़ की बिकवाली: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने इस साल अब तक भारतीय शेयरों में से लगभग ₹2.5 लाख करोड़ मूल्य की भारी-भरकम बिकवाली की है।

रुपये और लिक्विडिटी पर असर: इस चौतरफा बिकवाली के कारण भारतीय मुद्रा (रुपये) पर भारी दबाव आ गया था. सरकार को उम्मीद है कि अब टैक्स हटने से बॉन्ड मार्केट में नए डॉलर्स की एंट्री होगी, जिससे रुपये को सीधा सपोर्ट मिलेगा और कर्ज बाजार (Debt Market) में लिक्विडिटी में सुधार होगा।

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आने वाले दिनों में मिल सकते हैं और भी आर्थिक रिफॉर्म्स

सूत्रों के संकेत के मुताबिक, विदेशी निवेशकों को दी गई यह टैक्स राहत केवल शुरुआत है. आने वाले दिनों में सरकार भारतीय वित्तीय बाजारों को विदेशी निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बनाने के लिए कई और बड़े कदमों का ऐलान कर सकती है। अब बाजार के दिग्गजों की नजरें इस अध्यादेश की औपचारिक अधिसूचना (Formal Notification) और रिजर्व बैंक (RBI) की आगामी घोषणाओं पर टिकी हैं।

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लेखक के बारे में

Vandana Bharti

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.
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