दिग्गज एफएमसीजी कंपनी नेस्ले इंडिया (Nestle India) एक बार फिर खाद्य सुरक्षा नियामक FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) के निशाने पर आ गई है. FSSAI ने कंपनी के बेबी फूड (Infant Nutrition Products) में क्वालिटी की कमी और नियमों के खिलाफ जाकर प्रचार करने को लेकर कानूनी कार्रवाई (Legal Action) शुरू कर दी है.
खबर सामने आते ही शेयर बाजार में नेस्ले इंडिया के शेयर करीब 3% तक गिर गए, हालांकि बाद में इनमें थोड़ा सुधार देखा गया. आइए, समझते हैं कि FSSAI को नेस्ले के किन प्रोडक्ट्स में खामी मिली है और कंपनी का इस पर क्या पक्ष है.
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FSSAI की जांच में क्या-क्या कमियां पाई गईं?
FSSAI ने नेस्ले इंडिया के खिलाफ कुल तीन अलग-अलग मामले (Adjudication Cases) दर्ज किए हैं. लैब टेस्ट के दौरान नेस्ले के एक फॉलो-अप फॉर्मूला (बेबी फूड) सैंपल में बायोटिन (विटामिन B7) की मात्रा तय मानकों से कम पाई गई. दोबारा जांच में भी यह सैंपल फेल हो गया.
FSSAI का आरोप है कि नेस्ले ने अपने दो लोकप्रिय बेबी फूड प्रोडक्ट्स- NAN Excella Pro Stage 1 और Lactogen Pro 1 के प्रमोशन में नियमों का उल्लंघन किया है. इसके अलावा FSSAI के मुताबिक, यह फूड सेफ्टी रेगुलेशन्स 2020 और IMS (Infant Milk Substitutes) एक्ट 1992 का उल्लंघन है, जो शिशुओं के आहार के ऐसे विज्ञापनों और दावों पर रोक लगाता है जो उनकी बिक्री बढ़ाने के लिए किए जाते हैं.
नेस्ले इंडिया का क्या कहना है?
नेस्ले इंडिया के प्रवक्ता ने कंपनी का पक्ष रखते हुए कहा कि उनके सभी प्रोडक्ट्स पूरी तरह से भारतीय नियमों और मानकों का पालन करते हैं. कंपनी का कहना है कि जिन दो प्रोडक्ट्स पर प्रमोशन के उल्लंघन का आरोप लगा है, उनके लेबल FSSAI की एक्सपर्ट कमेटी से स्वीकृत (Approved) हैं. कंपनी ने इस संबंध में वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ अपना विस्तृत जवाब अथॉरिटी को सौंप दिया है.
हालांकि, बायोटिन की कमी वाले तीसरे प्रोडक्ट पर कंपनी ने कोई सीधा बयान नहीं दिया है.
2015 का मैगी विवाद याद आया?
यह पहली बार नहीं है जब नेस्ले कानूनी घेरे में आई हो. इससे पहले 2015 में भी सीसा (Lead) की मात्रा अधिक होने और लेबलिंग में गड़बड़ी के चलते मैगी (Maggi) पर बैन लगा दिया गया था, जिसे बाद में री-टेस्टिंग के बाद वापस बाजार में उतारा गया था.
नेस्ले के लिए क्यों बेहद अहम है यह बिजनेस?
नेस्ले इंडिया के कुल बिजनेस में दूध और न्यूट्रिशन प्रोडक्ट्स (बेबी फूड्स) का सबसे बड़ा योगदान है. वित्त वर्ष 2026 में कंपनी की कुल $2.4 बिलियन (करीब 23000 करोड़ रुपये) की बिक्री में से एक-तिहाई कमाई इसी सेगमेंट से हुई है. ऐसे में FSSAI की यह कार्रवाई कंपनी के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है.