Swiggy, Zomato, Amazon से Flipkart तक डिलीवरी वर्कर्स हड़ताल पर, नहीं मंगा पाएंगे आज Online सामान

आज शाम अगर आप पार्टी शाटी का प्रोग्राम बना रहे हैं और ऑनलाइन खाना मंगाना चाहते हैं तो संभवत: आपके इस प्‍लान पर पानी फ‍िर सकता है. क्‍योंक‍ि देशभर में आज ड‍िलीवरी वर्कर्स छुट्टी पर हैं. जानें ड‍िलीवरी वर्कर्स ने ये कदम क्‍यों उठाया है?

delivery boys on strike

आज ड‍िलीवरी बॉय की स्‍ट्राइक

अगर आज आप पार्टी करने के मूड में हैं और ऑनलाइन खाने पीने की चीजें मंगाने का प्‍लान कर रहे हैं तो आपके ल‍िए ये जरूरी खबर है. आपके इस प्‍लान पर ड‍िलीवरी वर्कर्स पानी फेर सकते हैं. स्‍व‍िगी, जोमैटो से लेकर फ्ल‍िपकार्ट तक, आज ड‍िलीवरी वर्कर्स हड़ताल पर हैं. बता दें क‍ि साल के आख‍िरी द‍िन, जब लोग न्‍यू ईयर सेलीब्रेशन करते हैं, तब ऑनलाइन सर्व‍िस की मांग बढ़ जाती है.

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इस हड़ताल की अगुवाई तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) और इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स (IFAT) कर रहे हैं और इसे महाराष्ट्र, कर्नाटक, दिल्ली-NCR, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों के प्लेटफॉर्म वर्कर यूनियनों सहित कई क्षेत्रीय संगठनों का समर्थन म‍िल गया है. यूनियन नेताओं का दावा है कि फूड डिलीवरी, क्विक कॉमर्स और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर एक लाख से ज्‍यादा डिलीवरी वर्कर नए साल की पूर्व संध्या पर या तो ऐप से लॉग आउट करेंगे या काम काफी कम कर देंगे.

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क्‍यों कर रहे हैं स्‍ट्राइक

यूनियनों का कहना है कि फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स के तेजी से बढ़ रहे हैं, लेक‍िन डिलीवरी का काम करने वालों को बेहतर सैलरी, नौकरी की सुरक्षा या सुरक्षित काम करने की स्थिति नहीं मिली है. यूनियन नेताओं के अनुसार, ये प्लेटफॉर्म स्पीड और कस्टमर की सुविधा को प्राथमिकता देते रहते हैं, जबकि कर्मचारियों को बढ़ते वर्कलोड और घटती कमाई का खामियाजा भुगतना पड़ता है.

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टाइम्स ऑफ इंडिया की एक र‍िपोर्ट के अनुसार TGPWU के फाउंडर और IFAT के नेशनल जनरल सेक्रेटरी शेख सलाउद्दीन ने कहा क‍ि हमारी देशव्यापी हड़ताल ने भारत की गिग इकॉनमी की सच्चाई को सामने ला दिया है. उनका कहना है कि जब भी डिलीवरी वर्कर्स ने अपनी आवाज उठाई है, तो इन प्लेटफॉर्म कंपनियों ने उनकी ID ब्लॉक करके, धमकियां देकर, पुलिस कंप्लेंट की धमकी देकर और एल्गोरिदम के जरिए सजा देकर जवाब दिया है. सलाउद्दीन के अनुसार यह और कुछ नहीं, बल्कि नए जमाने का शोषण है. गिग इकॉनमी मजदूरों के टूटे हुए शरीर और दबी हुई आवाजों पर नहीं बनाई जा सकती.

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लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Vandana Bharti

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.
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