---विज्ञापन---

बिजनेस angle-right

कर्मचारियों को बड़ी राहत! इस राज्य में 2.5 करोड़ रुपये की EPFO रिकवरी नोटिस को HC ने किया खारिज

यह कानूनी विवाद पेनार इंडस्ट्रीज (Pennar Industries) के पूर्व चेयरमैन जेवी नृपेंद्र राव से जुड़ा है. स्वास्थ्य कारणों से पद छोड़ने के बाद, राव ने कंपनी के छूट प्राप्त (एग्जेंप्टेड) पीएफ ट्रस्ट से अपने भविष्य निधि के निपटान के लिए आवेदन किया था.

---खबर नीचे जारी है---

तेलंगाना हाई कोर्ट ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) को एक बड़ा झटका देते हुए एक सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) अधिकारी को जारी किए गए 2.5 करोड़ रुपये के रिकवरी नोटिस को पूरी तरह खारिज कर दिया है. अदालत ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि नियोक्ता या कंपनी के पीएफ ट्रस्ट द्वारा की गई किसी भी कथित अनियमितता या चूक के लिए किसी कर्मचारी को उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता.

क्या है पूरा मामला?


यह कानूनी विवाद पेनार इंडस्ट्रीज (Pennar Industries) के पूर्व चेयरमैन जेवी नृपेंद्र राव से जुड़ा है. स्वास्थ्य कारणों से पद छोड़ने के बाद, राव ने कंपनी के छूट प्राप्त (एग्जेंप्टेड) पीएफ ट्रस्ट से अपने भविष्य निधि के निपटान के लिए आवेदन किया था. ट्रस्ट ने उनके दावे को मंजूरी देते हुए जुलाई 2023 में उन्हें 2.50 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया, जबकि उनकी करीब 70 लाख रुपये की शेष राशि नियामक अधिकारियों द्वारा यस बैंक के बांड में फ्रीज कर दी गई थी.

---खबर नीचे जारी है---

यह भी पढ़ें: चीन को बड़ा झटका देने की तैयारी! रूस के इस ‘सीक्रेट खजाने’ पर टिकी भारत की नजर

हालांकि, इस भुगतान के कुछ महीनों बाद EPFO ने एक आक्रामक रुख अपनाते हुए राव को नोटिस थमा दिया. इस नोटिस में EPFO ने राव से 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ पूरी 2.50 करोड़ रुपये की राशि महज सात दिनों के भीतर वापस करने की मांग की थी.

---खबर नीचे जारी है---

EPFO ने क्या दिया तर्क?

ईपीएफओ का तर्क था कि पेनार इंडस्ट्रीज ने 1 मार्च, 2023 से अपनी पीएफ छूट सरेंडर कर दी थी. ऐसे में नियमों के अनुसार पीएफ की सभी संचित राशि ईपीएफओ को ट्रांसफर की जानी चाहिए थी, न कि सीधे कर्मचारी को दी जानी थी. इस नोटिस को राव ने हाई कोर्ट में चुनौती दी और कहा कि यह राशि उनके दशकों की सेवा की वैध और गाढ़ी कमाई है, और इसमें उनकी कोई गलती नहीं है.

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस नागेश भीमापाका ने कहा कि अगर पीएफ नियमों का कोई उल्लंघन हुआ भी था, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी नियोक्ता (कंपनी) और ट्रस्ट की थी, न कि रिटायर्ड लाभ प्राप्त करने वाले कर्मचारी की. अदालत ने बेहद सख्त लहजे में कहा, ‘कानूनी ढांचा प्रथम दृष्टया इस दायित्व को उस कर्मचारी पर नहीं डालता जो इस फंड का लाभार्थी है.’

---खबर नीचे जारी है---

यह भी पढ़ें: शेयर बाजार में आज भी रौनक: सेंसेक्स 350 अंक उछला, निफ्टी 24,000 के करीब; क्‍या है वजह?

First published on: Jun 16, 2026 09:14 PM

End of Article

About the Author

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला (Akarsh Shukla) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्तमान में वो News 24 Digital टीम को शिफ्ट हेड के तौर पर लीड कर रहे हैं। आकर्ष शुक्ला की विशेषज्ञता प्रिंट, डिजिटल मीडिया (वेबसाइट) और मोबाइल ऐप्स के माध्यम से खबरों को सजीव और प्रभावी रूप में पेश करने में है। देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों के साथ-साथ आकर्ष को मनोरंजन, लाइफस्टाइल, ट्रेंडिंग और खेल जगत की खबरों का भी बखूबी ज्ञान है। आकर्ष शुक्ला, पत्रकारिता को सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि समाज की आवाज और जनसंवाद का एक सशक्त माध्यम मानते हैं।

Read More

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला (Akarsh Shukla) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्तमान में वो News 24 Digital टीम को शिफ्ट हेड के तौर पर लीड कर रहे हैं। आकर्ष शुक्ला की विशेषज्ञता प्रिंट, डिजिटल मीडिया (वेबसाइट) और मोबाइल ऐप्स के माध्यम से खबरों को सजीव और प्रभावी रूप में पेश करने में है। देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों के साथ-साथ आकर्ष को मनोरंजन, लाइफस्टाइल, ट्रेंडिंग और खेल जगत की खबरों का भी बखूबी ज्ञान है। आकर्ष शुक्ला, पत्रकारिता को सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि समाज की आवाज और जनसंवाद का एक सशक्त माध्यम मानते हैं।

Read More
---विज्ञापन---
संबंधित खबरें
Sponsored Links by Taboola