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100 करोड़ रुपये से ज्‍यादा कमाते हैं 570 भारतीय; 5 साल में अरबपतियों की संख्या 300% बढ़ी

वित्त मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार भारत में 100 करोड़ रुपये से अधिक कमाने वाले टैक्सपेयर्स की संख्या 5 साल में 300% बढ़कर 576 हो गई है. जानिए देश के सुपर-रिच क्लब और आर्थिक असमानता पर सरकार का क्या कहना है.

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सोचिए, अगर हर साल 100 करोड़ रुपये या उससे ज्‍यादा कमाने वालों की गिनती अचानक से तीन गुना से ज्‍यादा बढ़ जाए, तो आप इसे क्या कहेंगे? जी हां, भारत में अमीर और ज्‍यादा अमीर हो रहे हैं और यह हम नहीं, बल्कि खुद भारत सरकार के आंकड़े बता रहे हैं.

संसद में वित्त मंत्रालय द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक, देश में सालाना 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक की कमाई (Taxable Income) दिखाने वाले लोगों की संख्या में जबरदस्त उछाल आया है. आइए, इस दिलचस्प आंकड़े और इसके पीछे की पूरी कहानी को एकदम आसान भाषा में समझते हैं.

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142 से 576 तक का सफर: सुपर-रिच क्लब का धमाका

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने संसद में एक लिखित सवाल के जवाब में टैक्स रिटर्न (ITR) से जुड़े ये हैरान करने वाले आंकड़े पेश किए. सिर्फ 142 लोग ऐसे थे, जिनकी सालाना कमाई 100 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा थी. यह संख्या बढ़कर 576 हो गई है. यानी पिछले 5 सालों में इस क्लब में 300% से भी ज्यादा का उछाल आया है.

अगर पिछले सालों का ट्रेंड देखें तो:

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  • AY 2021-22: 142
  • AY 2022-23: 301
  • AY 2023-24: 284 (हल्की गिरावट)
  • AY 2024-25: 415
  • AY 2025-26: 576

क्या सरकार के पास है अरबपतियों का पूरा हिसाब?
अक्सर जब हम मीडिया में अरबपति (Billionaires) शब्द सुनते हैं, तो लगता है कि सरकार के पास इनकी पूरी लिस्ट होगी. लेकिन वित्त राज्य मंत्री ने साफ किया कि इनकम टैक्स कानून के तहत अरबपति (Billionaire) नाम की कोई आधिकारिक परिभाषा नहीं है. सरकार यह ट्रैक नहीं करती कि किस व्यक्ति के पास कुल कितनी संपत्ति (Wealth) है. ऐसा इसलिए क्योंकि साल 2016 (1 अप्रैल) से वेल्थ टैक्स एक्ट, 1957 खत्म कर दिया गया था.

इसीलिए सरकार सालाना 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की टैक्स योग्य कमाई करने वालों को ही भारत के सबसे अमीर वर्ग का पैमाना मानती है.

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क्या देश में आर्थिक असमानता (Inequality) बढ़ रही है?
अमीरों की कमाई बढ़ने के साथ ही यह सवाल भी उठता है कि क्या आम जनता और अमीरों के बीच की खाई चौड़ी हो रही है? सरकार ने इस पर सफाई देते हुए कई आंकड़े पेश किए. घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण (HCES) के मुताबिक, ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में उपभोग के स्तर पर असमानता घटी है.

15 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए बेरोजगारी दर 2022 के 3.6% से घटकर 2025 में 3.1% पर आ गई है. नीति आयोग के मुताबिक, पिछले एक दशक (2013-14 से 2022-23) में लगभग 24.82 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं.

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सरकार क्या कदम उठा रही है?
अमीरों और गरीबों के बीच के अंतर को संतुलित करने के लिए सरकार दो तरह से काम कर रही है. बहुत अधिक कमाई करने वाले लोगों पर सामान्य इनकम टैक्स के अलावा भारी भरकम सरचार्ज (Surcharge) लगाया जाता है.

इस टैक्स से मिले पैसे को पीएम आवास योजना, पीएम-किसान, आयुष्मान भारत, जन धन योजना और जल जीवन मिशन जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं में लगाया जाता है.

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टैक्स रिटर्न के ये आंकड़े साफ बताते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था में बड़े स्तर पर वेल्थ (धन) का निर्माण हो रहा है. हालांकि, सरकार के पास कुल संपत्ति का आधिकारिक डेटा न होने के कारण अरबपतियों की असली कुल संपत्ति का अंदाजा लगाना मुश्किल है, लेकिन 100-करोड़ी क्लब में आया यह 300% का उछाल यह साबित करता है कि भारत के सुपर-रिच वर्ग का आकार बहुत तेजी से बढ़ रहा है.

First published on: Jul 29, 2026 10:57 AM

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