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Anand Mahindra के ट्वीट कौन लिखता है, क्यों सोशल मीडिया पर रहते इतने एक्टिव?

Anand Mahindra 90 Hour Working Debate: सप्ताह में 90 दिन काम करने की थ्योरी पर आनंद महिंद्रा का रिएक्शन आया है। उन्होंने अपनी सोशल, प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ पर भी खुलकर बात की। आइए जानते हैं कि उनके क्या विचार हैं‌?

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Anand Mahindra Reaction on 90 Hour Working Debate: महिंद्रा एंड महिंद्रा के चेयरमैन आनंद महिंद्रा सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं। सप्ताह में 90 घंटे काम करने की थ्योरी पर छिड़े विवाद में आनंद महिंद्रा भी कूद गए हैं। एक कार्यक्रम के दौरान जब उनसे इस थ्योरी पर बातचीत की गई तो उन्होंने इस थ्योरी को गलत बताया और इस पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने अपनी पर्सनल, प्रोफेशनल और सोशल मीडिया लाइफ पर भी खुलकर बात की। आइए जानते हैं कि 90 घंटे के वर्क वीक के बारे में वे क्या कहते हैं…

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आनंद महिंद्रा ने बताया कैसे यूज करते सोशल मीडिया?

आनंद महिंद्रा से जब पूछा गया कि वे इतनी बड़ी कंपनी के मालिक हैं। काफी काम होता होगा, रोजाना मीटिंग्स होती होंगी तो वे सोशल मीडिया पर इतने एक्टिव कैसे रहते हैं? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि कई लोग मुझसे यह सवाल पूछते हैं। वे कहते हैं कि मैंने अपना सोशल नेटवर्क एक्टिव रखने के लिए टीम लगा रखी है और ऑफिस बनाया हुआ है, जबकि ऐसा कुछ नहीं है।

उन्होंने कहा कि वे सोशल मीडिया पर इसलिए एक्टिव नहीं रहते कि वे अकेले हैं। उनकी भी बीवी है और वह बहुत खूबसूरत है। वे उसे बहुत प्यार करते हैं। उन्हें बीवी को निहारना अच्छा लगता है। देश की जनता से, अपने कस्टमर्स से जुड़ने का यह सबसे अच्छा मंच है। इसलिए जब भी फ्री होता हूं, मुझे जब मौका मिल जाता है, सोशल मीडिया पर एक्टिव हो जाता हूं और अपने ट्वीट खुद ही लिखता हूं।

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प्रोफेशनल वर्क लाइफ बैलेंस पर क्या बोले?

सप्ताह में 90 घंटे काम करने की थ्योरी पर छिड़े विवाद पर आनंद महिंद्रा ने रिएक्शन दिया कि इस मुद्दे पर चल रही बहस गलत दिशा में जा रही है। क्योंकि काम करने के घंटों पर ध्यान दिया जा रहा है, जबकि काम के घंटे बढ़ाने से कुछ नहीं होता। 40 घंटे, 48 घंटे, 70 घंटे, 90 घंटे काम करने से कुछ नहीं होगा। काम करने के घंटे नहीं, आउटपुट ज्यादा जरूरी है। मेहनत का रिजल्ट और काम की क्वालिटी मायने रखती है।

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जब उनसे पूछा गया कि वे कितने घंटे काम करते हैं तो उन्होंने जवाब दिया कि मुझसे यह मत पूछिए कि मैं कितने घंटे काम करता हूं? मुझसे यह पूछिए कि मेरे काम की क्वालिटी क्या है? इंफोसिस के फाउंडर नारायण मूर्ति की बहुत इज्जत करता हूं। उन्होंने सप्ताह में 70 घंटे काम करने का सुझाव दिया था, लेकिन उन्होंने सिर्फ घंटों-समय की बात की, मैं रिजल्ट की बात करता हूं।

First published on: Jan 12, 2025 08:55 AM

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About the Author

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल ने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन एवं एमफिल कोर्स किया है। 13 साल से डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री से जुड़ी हूं। वर्तमान में BAG Convergence Limited के माल‍िकाना हक वाले News 24 हिंदी डिजिटल विंग से बतौर चीफ सब एडिटर जुड़ी हूं। चीफ सब एडिटर की भूमिका निभाते हुए यहां की कोर टीम का हिस्सा हूं। नेशनल, इंटरनेशनल, राजनीति, क्राइम, फीचर आदि टॉपिक कवर करती हूं। घूमने, खाने और शॉपिंग की शौकीन खुशबू को नए ट्रेंड, नई जगह और ऐडवेंचर की तलाश रहती है।

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