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AGR on Telecom Company: जीएसटी के नोटिस ने इस समय कंपनियों को परेशान किया हुआ है। जहां एक तरफ गेमिंग ऐप के ऊपर हजारों करोड़ों रुपए के नोटिस जारी हो चुके हैं, वहीं टेलिकॉम सेक्टर में भी एयरटेल के साथ वोडाफोन-आइडिया परेशान हैं। हालांकि जियो इन सभी के उलट रिलेक्स में दिखाई दे रही है। दरअसल मामला जुड़ा है AGR यानी एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू से। साल 2019 से एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू ने टेलिकॉम में धूम मचाई हुई है।
दरअसल साल 2003 में एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू का मामला उठा था। एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू यानी रिवेन्यू में वो पॉर्शन जो कंपनी के सभी एक्टिविटी से इनकम को जोड़ा जाता है। सरकार और कंपनियों के बीच में इसी AGR को लेकर घमासान मच रहा है।
सरकार का कहना है कि एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू में सभी कंपनी की सभी एक्टिविटी को जोड़ा जाए, चाहे वो कंपनी के मेन बिजनेस से हो या, इनडायरेक्ट एक्टिविटी से। वहीं कंपनी का कहना है कि इसमें सिर्फ मेन बिजनेस की आय को ही जोड़ा जाए। पर साल 2019 में कोर्ट ने सरकार के पक्ष में फैसला सुना दिया।
अब बात करते हैं कि किस कंपनी पर कितना बकाया है? पहले बात करते हैं वोडाफोन की। वोडाफोन-आइडिया पर करीब 58,400 करोड़ का बकाया है। वहीं एयरटेल पर 43,980 करोड़ का AGR देना है। वहीं जियो अपने AGR का भुगतान कर चुका है। इसलिए उसके पास मार्केट शेयर को बढ़ाने का शानदार मौका है।
एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया ने एक बार फिर से कोर्ट का दरवाजा खट खटाया है। दोनों कंपनियों ने सुप्रीम कोर्ट में इस AGR के खिलाफ याचिका दर्ज की है। जिस पर सुनवाई के लिए कोर्ट तैयार हो गया है। ये कंपनियों के लिए अच्छी खबर है। पर अगर यहां केस हार जाते हैं तो फिर बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है।
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