Second Hand Vehicle Rule: पुरानी कार या बाइक खरीदने वाले लोगों के लिए जल्द ही बड़ा नियम लागू हो सकता है. केंद्र सरकार सेकेंड हैंड वाहनों के RC ट्रांसफर की प्रोसेस को सख्त बनाने की तैयारी में है. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की तरह जारी ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के मुताबिक अगर कोई खरीदार वाहन खरीदने के 6 महीने के अंदर उसके RC के अपने नाम पर ट्रांसफर नहीं करता तो उस वाहन का मालिकाना हक रिकॉर्ड में दोबारा संबंधित डीलर के नाम हो जाएगा. सरकार का कहना है कि इससे RC ट्रांसफर में होने वाली देरी, कानूनी विवाद और रिकॉर्ड से जुड़ी गड़बड़ियों को काफी हद तक रोका जा सकेगा.

क्या है सरकार का नया ड्राफ्ट प्रस्ताव?

सरकार के प्रस्ताव के मुताबिक, वाहन बिकने के बाद खरीदार के पास RC अपने नाम ट्रांसफर कराने के लिए ज्यादा से ज्यादा 180 दिन यानी 6 महीने का समय होगा. अगर इस दौरान जरूरी प्रक्रिया पूरी नहीं होती है तो RTO उस गाड़ी को उस डीलर के नाम पर दर्ज कर देगा जिससे वो गाड़ी खरीदी गई थी. फिलहाल यह केवल एक ड्राफ्ट प्रस्ताव है और अभी इसे अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है.

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क्या है मौजूदा व्यवस्था?

अभी देश में सेकेंड हैंड गाड़ी खरीदने के बाद कई लोग RC ट्रांसफर कराने में महीनों की देरी कर देते हैं. कई मामलों में खरीदार गाड़ी का इस्तेमाल तो करता रहता है और रिकॉर्ड में मालिक का नाम नहीं बदलता. ऐसी स्थिति में कानूनी और प्रशासनिक दोनों तरह की दिक्कतें सामने आती हैं.

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डीलर्स की जिम्मेदारी भी बढ़ेगी

नए प्रस्ताव के लागू होने के बाद डीलर्स की जिम्मेदारी भी पहले से ज्यादा बढ़ जाएगी. अगर 6 महीने के अंदर आरसी ट्रांसफर नहीं होता है और वाहन का रिकॉर्ड फिर से डीलर के नाम पर आ जाता है, तो भविष्य में वाहन से जुड़े किसी हादसे, विवाद या अन्य कानूनी मामले में डीलर की जवाबदेही भी तय हो सकती है.

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इन शर्तों के बिना नहीं होगा RC ट्रांसफर

सरकार ने आरसी ट्रांसफर की प्रोसेस को और ट्रांसपेरेंट बनाने के लिए कुछ जरूरी शर्तें तय की हैं. अगर वाहन का वैध आरसी, इंश्योरेंस या PUC उपलब्ध नहीं है तो, ट्रांसफर की परमिसन नहीं मिलेगी. इसके अलावा, यदि गाड़ी पर कोई चालान, जुर्माना या सरकारी टैक्स बकाया है, तब भी आरसी ट्रांसफर नहीं होगा.

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सरकार को नया नियम लाने की जरूरत क्यों पड़ी?

आरसी ट्रांसफर में देरी की वजह से अक्सर पुराने मालिक और डीलर को परेशानी होती है. अगर गाड़ी से कोई हादसा या उसका इस्तेमाल किसी अपरधा में होतो पुलिस सबसे पहले रिकॉर्ड में दर्ज मालिक तक पहुंचती है. इसके अलावा ट्रैफिक कैमरों से कटने वाले ई-चालान भी पुराने मालिक के पास ही पहुंचते रहते हैं. इन्हीं कमियों के सुधार के लिए ये ड्राफ्ट तैयार किया गया है.

अभी लागू नहीं हुआ है नियम

ध्यान दें, अभी ये केवल ड्राफ्टे नोटिफकेसन है. कोई कानून नहीं. सरकार ने इस प्रस्ताव पर आम लोगों और डीलर्स के भी सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं. इसे मंजूरी और समीक्षा के बाद ही लागू किया जाएगा.

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