नई कार खरीदते समय सिर्फ कीमत या डिजाइन देखाना ही काफी नहीं है. ये समझना भी जरुरी है कि आने वाले सालों में कौन-सी तकनीक आपके लिए ज्यादा फायदेमंद रहेगी. सही ऑप्शन इस बात पर निर्भर करता है कि आप हर महीने कितनी ड्राइविंग करते हैं, ज्यादातर शहर में चलते हैं या हाईवे पर. आइए इस बात को विस्तार से समझते हैं.
EV सबसे कम रनिंग कॉस्ट वाला विकल्प
इलेक्ट्रिन व्हीकल को फ्यूचर माना जा रहा है. अगर घर पर चार्जिंग की सुविधा है तो इसका प्रति किमी खर्च करीब 1 से 2 रुपये तक पड़ सकता है. इसमें एग्जॉस्ट गैस नहीं निकलती और मेंटेनेंस का खर्च भी कम होता है. हालांकि इसकी शुरुआती कीमत ज्यादा होती है. इसके अलावा लंबी यात्र पर निकलने से पहले चार्जिंग स्टेशन की प्लानिंग बनानी पड़ती है. जिन लोगों की रोजाना 50 से 60 किलोमीटर तक की सिटी ड्राइविंग है और घर पर चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध है, उनके लिए EV अच्छा विकल्प हो सकती है.
Hybrid कार माइलेज और सुविधा का बैलेंस
हाइब्रिड कारों में पेट्रोल इंजन और इलेक्टिक मोटर दोनों का इस्तेमाल होता है. यही वजह है कि ये पेट्रोल कारों के मुकबले बेहतर माइलेज देती हैं. आमतौर पर इनका माइलेज 25 से 30 किमी प्रति लीटर तक हो सकता है.
इन कारों का सबसे बड़ा फायदा ये है कि इनमें रेंज की चिंता नहीं रही, क्योंकि जरूरत पड़ने पर पेट्रोल पंप से तत्काल फ्यूल भरवाया जा सकता है. हालांकि इनकी शुरुआती कीमत काफी ज्यादा होती है. जो लोग शहर और हाईवे दोनों पर ज्यादा सफर करते हैं और बेहतर माइलेज चाहते हैं उनके लिए हाइब्रिड कार बेहतर विकल्प हो सकती है.
ये भी पढ़ें- E20 पेट्रोल पर पहली बार आया बड़ा फैसला, ग्राहक को नई कार देगी कंपनी, नहीं तो चुकाने होंगे 20.50 लाख रुपये
CNG कारम में कम खर्च में ज्यादा बचत
अगर आपका बजट लिमिटेड है और कम रनिंग कॉस्ट चाहते हैं, तो सीएनज कार अच्छा ऑप्शन मानी जाती है. सीएनजी का खर्च पेट्रोल के मुकाबले काफी कम होता है. अब ज्यादातर कंपनियां फैक्ट्री फिटेड सीएनजी भी बेहतर सेफ्टी फीचर्स के साथ उपलब्ध करा रही हैं.
हालांकि सीएनजी कारों में डिग्गी की जगह कम हो जाती है. इसके अलावा पिकअप थोड़ा कम महसूस हो सकता है और कई जगह सीएनजी स्टेशनों पर लंबी लाइन भी लगती है. जिन लोगों की ज्यादातर ड्राइविंग शहर में होती है और आसपास सीएनजी नेटवर्क अच्छा है, उनके लिए ये फिफायती ऑप्शन है.
Petrol कार कम इस्तेमाल करने वालों के लिए सही
पेट्रोल कारें आज भी सबसे भरोसेमंद और आसान ऑप्शन मानी जातकी है. इनकी शुरुआती कीमत भी बाकी तकनीकों के मुकाबले कम होती है. साथ ही मेंटेनेंस भी आसान रहता है और देशभर में पेट्रोल आसानी से उपलब्ध है.
लेकिन पेट्रोल कारों का रनिंग खर्च सबसे ज्यादा होता है. आने वाले समय में फ्यूल की कीमत बढ़ने का असर भी सीधे जेब पर पड़ सकता है. अगर आपकी मासिक ड्राइविंग 500 से 800 किमी से कम है और आप कभी कभार लंबी यात्रा करते हैं, तो पेट्रोल कार आपके लिए सही ऑप्शन है.
कौन-सा विकल्प रहेगा बेहतर?
कौन-सी कार खरीदनी चाहिए ये पूरी तरह से आपकी मर्जी और जरूरत पर निर्भर करता है. अगर आपर रोजाना 20-30 किमी तक शहर में ड्राइव करते हैं और घर या ऑफिस में चार्जिंग की सुविधा है, तो EV भविष्य के लिहाज से बेहतर विकल्प हो सकती है. अगर चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध नहीं है लेकिन आप बेहतर माइलेज चाहते हैं, तो Hybrid कार संतुलित विकल्प साबित होगी.
वहीं जिन लोगों की ड्राइविंग ज्यादा है और उनके शहर में सीएनजी नेटवर्क अच्छा है उनके लिए सीएनजी कार सबसे किफायती ऑप्श मानी जा सकती है. दूसरी ओर, कम इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए पेट्रोल कार आज भी एक व्यावहारिक और सुविधाजनक विकल्प बनी हुई है.
ये भी पढ़ें- इलेक्ट्रिक स्कूटर या कार में आग लगने पर बीमा मिलेगा या नहीं? जानिए कब मिलेगा क्लेम और किन गलतियों से हो सकता है रिजेक्ट
नई कार खरीदते समय सिर्फ कीमत या डिजाइन देखाना ही काफी नहीं है. ये समझना भी जरुरी है कि आने वाले सालों में कौन-सी तकनीक आपके लिए ज्यादा फायदेमंद रहेगी. सही ऑप्शन इस बात पर निर्भर करता है कि आप हर महीने कितनी ड्राइविंग करते हैं, ज्यादातर शहर में चलते हैं या हाईवे पर. आइए इस बात को विस्तार से समझते हैं.
EV सबसे कम रनिंग कॉस्ट वाला विकल्प
इलेक्ट्रिन व्हीकल को फ्यूचर माना जा रहा है. अगर घर पर चार्जिंग की सुविधा है तो इसका प्रति किमी खर्च करीब 1 से 2 रुपये तक पड़ सकता है. इसमें एग्जॉस्ट गैस नहीं निकलती और मेंटेनेंस का खर्च भी कम होता है. हालांकि इसकी शुरुआती कीमत ज्यादा होती है. इसके अलावा लंबी यात्र पर निकलने से पहले चार्जिंग स्टेशन की प्लानिंग बनानी पड़ती है. जिन लोगों की रोजाना 50 से 60 किलोमीटर तक की सिटी ड्राइविंग है और घर पर चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध है, उनके लिए EV अच्छा विकल्प हो सकती है.
Hybrid कार माइलेज और सुविधा का बैलेंस
हाइब्रिड कारों में पेट्रोल इंजन और इलेक्टिक मोटर दोनों का इस्तेमाल होता है. यही वजह है कि ये पेट्रोल कारों के मुकबले बेहतर माइलेज देती हैं. आमतौर पर इनका माइलेज 25 से 30 किमी प्रति लीटर तक हो सकता है.
इन कारों का सबसे बड़ा फायदा ये है कि इनमें रेंज की चिंता नहीं रही, क्योंकि जरूरत पड़ने पर पेट्रोल पंप से तत्काल फ्यूल भरवाया जा सकता है. हालांकि इनकी शुरुआती कीमत काफी ज्यादा होती है. जो लोग शहर और हाईवे दोनों पर ज्यादा सफर करते हैं और बेहतर माइलेज चाहते हैं उनके लिए हाइब्रिड कार बेहतर विकल्प हो सकती है.
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CNG कारम में कम खर्च में ज्यादा बचत
अगर आपका बजट लिमिटेड है और कम रनिंग कॉस्ट चाहते हैं, तो सीएनज कार अच्छा ऑप्शन मानी जाती है. सीएनजी का खर्च पेट्रोल के मुकाबले काफी कम होता है. अब ज्यादातर कंपनियां फैक्ट्री फिटेड सीएनजी भी बेहतर सेफ्टी फीचर्स के साथ उपलब्ध करा रही हैं.
हालांकि सीएनजी कारों में डिग्गी की जगह कम हो जाती है. इसके अलावा पिकअप थोड़ा कम महसूस हो सकता है और कई जगह सीएनजी स्टेशनों पर लंबी लाइन भी लगती है. जिन लोगों की ज्यादातर ड्राइविंग शहर में होती है और आसपास सीएनजी नेटवर्क अच्छा है, उनके लिए ये फिफायती ऑप्शन है.
Petrol कार कम इस्तेमाल करने वालों के लिए सही
पेट्रोल कारें आज भी सबसे भरोसेमंद और आसान ऑप्शन मानी जातकी है. इनकी शुरुआती कीमत भी बाकी तकनीकों के मुकाबले कम होती है. साथ ही मेंटेनेंस भी आसान रहता है और देशभर में पेट्रोल आसानी से उपलब्ध है.
लेकिन पेट्रोल कारों का रनिंग खर्च सबसे ज्यादा होता है. आने वाले समय में फ्यूल की कीमत बढ़ने का असर भी सीधे जेब पर पड़ सकता है. अगर आपकी मासिक ड्राइविंग 500 से 800 किमी से कम है और आप कभी कभार लंबी यात्रा करते हैं, तो पेट्रोल कार आपके लिए सही ऑप्शन है.
कौन-सा विकल्प रहेगा बेहतर?
कौन-सी कार खरीदनी चाहिए ये पूरी तरह से आपकी मर्जी और जरूरत पर निर्भर करता है. अगर आपर रोजाना 20-30 किमी तक शहर में ड्राइव करते हैं और घर या ऑफिस में चार्जिंग की सुविधा है, तो EV भविष्य के लिहाज से बेहतर विकल्प हो सकती है. अगर चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध नहीं है लेकिन आप बेहतर माइलेज चाहते हैं, तो Hybrid कार संतुलित विकल्प साबित होगी.
वहीं जिन लोगों की ड्राइविंग ज्यादा है और उनके शहर में सीएनजी नेटवर्क अच्छा है उनके लिए सीएनजी कार सबसे किफायती ऑप्श मानी जा सकती है. दूसरी ओर, कम इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए पेट्रोल कार आज भी एक व्यावहारिक और सुविधाजनक विकल्प बनी हुई है.
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