Vrishabh Sankranti: मई का दूसरा पखवाड़ा शुरू होते ही उत्तर भारत समेत उत्तरी गोलार्ध के कई हिस्सों में गर्मी अचानक तेज महसूस होने लगती है. मौसम वैज्ञानिक इसे पृथ्वी की स्थिति और सूर्य की किरणों के बदलते कोण से जोड़ते हैं, जबकि ज्योतिष शास्त्र में इसे सूर्य के वृषभ राशि में प्रवेश और रोहिणी नक्षत्र के प्रभाव से समझाया जाता है. 15 मई 2026 को सूर्य मेष से निकलकर वृषभ राशि में गोचर करेंगे, जिसे 'वृषभ संक्रांति' कहते हैं. यह संक्रांति हर साल लगभग इसी तारीख को होता है. वृषभ संक्रांति के बाद के समय को गर्मी बढ़ने की अहम खगोलीय और ज्योतिषीय अवधि माना जाता है.
तेज धूप असर
मई के मध्य तक आते-आते दिन लंबे हो जाते हैं और सूर्य की किरणें धरती पर अधिक समय तक पड़ने लगती हैं. दोपहर के समय धूप सीधी और तीखी महसूस होती है. उत्तर और मध्य भारत के कई हिस्सों में इसी दौरान लू चलने लगती है, जिससे तापमान तेजी से बढ़ जाता है और वातावरण शुष्क हो जाता है.
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वृषभ गोचर प्रभाव
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब सूर्य वृषभ राशि में प्रवेश करते हैं, तो उनकी ऊर्जा अधिक तीव्र और स्थिर रूप में धरती पर प्रभाव डालती है. वृषभ राशि का स्वामी शुक्र ग्रह है, जिसे दैत्यों का गुरु माना जाता है. इस राशि में सूर्य का गोचर केवल राशिचक्र को प्रभावित नहीं करता, बल्कि पृथ्वी के तापमान और वातावरण में भी स्पष्ट परिवर्तन लाता है.
सबसे गर्म ग्रह है शुक्र
ज्योतिष शास्त्र कहता है कि वृषभ राशि के स्वामी शुक्र हैं, जो न केवल दैत्यों के गुरु हैं बल्कि सभी नवग्रहों में सबसे ज्यादा उष्ण यानी गर्म हैं. इस ग्रह की राशि में सूर्य गोचर से न राशिमंडल बल्कि धरती पर अत्यधिक तापमान का वातावरण बन जाता है. यही कारण है कि इस समय को भीषण गर्मी का चरण माना जाता है, जहां ऊर्जा संतुलन बिगड़ता हुआ महसूस होता है.
रोहिणी नक्षत्र और ‘नौतपा’
सूर्य का कृतिका से आगे बढ़कर रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करना भी इस अवधि को खास बनाता है. भारतीय परंपरा में रोहिणी काल को तेज गर्मी का संकेत माना गया है. ग्रामीण मान्यताओं में इसे ‘नौतपा’ से जुड़ा समय भी कहा जाता है, जब सूर्य की किरणें धरती को अधिक तीव्रता से तपाती हैं.
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खगोलीय कारण
वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो इस समय पृथ्वी का उत्तरी भाग सूर्य की ओर अधिक झुक जाता है. इसके कारण सूर्य की किरणें कर्क रेखा के आसपास लगभग सीधी पड़ती हैं. सीधी किरणें जमीन और वायुमंडल को तेजी से गर्म करती हैं. पिछले दिनों जमा हुई गर्मी भी इसमें जुड़ जाती है, जिससे तापमान और बढ़ जाता है.
'हीट एक्यूम्यूलेशन' है सबसे बड़ा कारण
इस अवधि में वातावरण में नमी कम हो जाती है और हवा शुष्क हो जाती है. दिन के समय तापमान तेजी से बढ़ता है, जबकि रात में भी ठंडक बहुत कम महसूस होती है. मौसम विशेषज्ञ इसे 'हीट एक्यूम्यूलेशन' यानी गर्मी के जमा होने का असर मानते हैं, जो मई के मध्य के बाद चरम पर पहुंचता है.
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
Vrishabh Sankranti: मई का दूसरा पखवाड़ा शुरू होते ही उत्तर भारत समेत उत्तरी गोलार्ध के कई हिस्सों में गर्मी अचानक तेज महसूस होने लगती है. मौसम वैज्ञानिक इसे पृथ्वी की स्थिति और सूर्य की किरणों के बदलते कोण से जोड़ते हैं, जबकि ज्योतिष शास्त्र में इसे सूर्य के वृषभ राशि में प्रवेश और रोहिणी नक्षत्र के प्रभाव से समझाया जाता है. 15 मई 2026 को सूर्य मेष से निकलकर वृषभ राशि में गोचर करेंगे, जिसे ‘वृषभ संक्रांति’ कहते हैं. यह संक्रांति हर साल लगभग इसी तारीख को होता है. वृषभ संक्रांति के बाद के समय को गर्मी बढ़ने की अहम खगोलीय और ज्योतिषीय अवधि माना जाता है.
तेज धूप असर
मई के मध्य तक आते-आते दिन लंबे हो जाते हैं और सूर्य की किरणें धरती पर अधिक समय तक पड़ने लगती हैं. दोपहर के समय धूप सीधी और तीखी महसूस होती है. उत्तर और मध्य भारत के कई हिस्सों में इसी दौरान लू चलने लगती है, जिससे तापमान तेजी से बढ़ जाता है और वातावरण शुष्क हो जाता है.
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वृषभ गोचर प्रभाव
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब सूर्य वृषभ राशि में प्रवेश करते हैं, तो उनकी ऊर्जा अधिक तीव्र और स्थिर रूप में धरती पर प्रभाव डालती है. वृषभ राशि का स्वामी शुक्र ग्रह है, जिसे दैत्यों का गुरु माना जाता है. इस राशि में सूर्य का गोचर केवल राशिचक्र को प्रभावित नहीं करता, बल्कि पृथ्वी के तापमान और वातावरण में भी स्पष्ट परिवर्तन लाता है.
सबसे गर्म ग्रह है शुक्र
ज्योतिष शास्त्र कहता है कि वृषभ राशि के स्वामी शुक्र हैं, जो न केवल दैत्यों के गुरु हैं बल्कि सभी नवग्रहों में सबसे ज्यादा उष्ण यानी गर्म हैं. इस ग्रह की राशि में सूर्य गोचर से न राशिमंडल बल्कि धरती पर अत्यधिक तापमान का वातावरण बन जाता है. यही कारण है कि इस समय को भीषण गर्मी का चरण माना जाता है, जहां ऊर्जा संतुलन बिगड़ता हुआ महसूस होता है.
रोहिणी नक्षत्र और ‘नौतपा’
सूर्य का कृतिका से आगे बढ़कर रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करना भी इस अवधि को खास बनाता है. भारतीय परंपरा में रोहिणी काल को तेज गर्मी का संकेत माना गया है. ग्रामीण मान्यताओं में इसे ‘नौतपा’ से जुड़ा समय भी कहा जाता है, जब सूर्य की किरणें धरती को अधिक तीव्रता से तपाती हैं.
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खगोलीय कारण
वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो इस समय पृथ्वी का उत्तरी भाग सूर्य की ओर अधिक झुक जाता है. इसके कारण सूर्य की किरणें कर्क रेखा के आसपास लगभग सीधी पड़ती हैं. सीधी किरणें जमीन और वायुमंडल को तेजी से गर्म करती हैं. पिछले दिनों जमा हुई गर्मी भी इसमें जुड़ जाती है, जिससे तापमान और बढ़ जाता है.
‘हीट एक्यूम्यूलेशन’ है सबसे बड़ा कारण
इस अवधि में वातावरण में नमी कम हो जाती है और हवा शुष्क हो जाती है. दिन के समय तापमान तेजी से बढ़ता है, जबकि रात में भी ठंडक बहुत कम महसूस होती है. मौसम विशेषज्ञ इसे ‘हीट एक्यूम्यूलेशन’ यानी गर्मी के जमा होने का असर मानते हैं, जो मई के मध्य के बाद चरम पर पहुंचता है.
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.